Teachers Day 2023: समाज को दे रहे नए आयाम..., राह दिखाने वाले शिक्षकों को प्रणाम
शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन को संवारने के लिए मार्गदर्शित करने का काम करते हैं। शिक्षक आपको किताबी ज्ञान देने के साथ ही भविष्य में क्या करना है, इस बारे में सिखाते हैं। अनुशासन, व्यवहार, सही और गलत के बारे में बताते हैं। इन सब से अलग कई शिक्षक समाज के वंचित वर्ग में भी ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं।
विस्तार
शिक्षा ही जीवन है और शिक्षक मार्गदर्शक। ऐसे में कई शिक्षक, प्रोफेसर, शैक्षिक संस्थाएं मुख्यधारा से हटकर समाज के वंचितों जनों तक भी ज्ञान का प्रकाश फैलाने का काम कर रहे हैं। जरूरतमंद, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले और कूड़ा बीनने वाले बच्चों के नन्हें हाथों व कंधों से जिम्मेदारी का बोझ हटाकर उन्हें शिक्षित कर उनके उज्जवल भविष्य की कहानी लिख रहे हैं। आज शिक्षक दिवस के मौके पर ऐसे सभी शिक्षकों को प्रणाम।
एक गांव के 85 बच्चों के हाथों में थमाई कलम
सीसीएसयू के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के प्रोफेसर जमाल अहमद सिद्दीकी ने खरखौदा के गांव उल्दन के गिल्ली-डंडा खेलने और दिनभर पतंग उड़ाने में व्यस्त रहने वाले बच्चों के हाथों में कलम थमाई। एक-एक कर करीब 85 बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया। इसके लिए गांव में एक कमरे की व्यवस्था कर बच्चों को किताब-कॉपी उपलब्ध कराईं। अब सभी बच्चों को कक्षा पांच मेें प्रवेश दिलवाएंगे।
यह भी पढ़ें: Meerut Crime News: दुष्कर्म के आरोपी पिता ने दी तेजाब डालने की धमकी, थाने में पूछताछ के बाद महिला की मौत
हर उम्र तक पहुंचा रहे शिक्षा
कनोहर लाल डिग्री कॉलेज की प्रो. किरण प्रदीप पिछले 7 सालों से ज़रूरतमंद बच्चों को भी शिक्षा दें रही हैं। अवकाश वाले दिन कॉलोनी के बच्चों को पढ़ाई के साथ उनके कौशल विकास पर भी ध्यान देती हैं। उनके अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए वह कॉलेज और घर में चतुर्थ श्रेणी वर्ग की महिलाओं को इंग्लिश बोलना सिखाने के साथ जागरूक भी कर रही हैं।
कबाड़ से जुगाड़ कर बच्चों को पढ़ाया
जानी क्षेत्र के सालेहनगर प्राथमिक विद्यालय की सहायक अध्यापक रीना काकरान ने कबाड़ से जुगाड़ कर बच्चों के लिए लर्निंग मैटेरियल तैयार किया। नवाचार के जरिए बच्चों का भविष्य संवारा। वह सैकड़ों कविताएं भी लिख चुकी हैं। यूट्यूब पर उनका चैनल किलकारी भी काफी प्रसिद्ध है। शिक्षण क्षेत्र में योगदान के लिए उनका राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।
हर उम्र तक पहुंचा रहे शिक्षा
कनोहर लाल डिग्री कॉलेज की प्रो. किरण प्रदीप पिछले 7 सालों से ज़रूरतमंद बच्चों को भी शिक्षा दें रही हैं। अवकाश वाले दिन कॉलोनी के बच्चों को पढ़ाई के साथ उनके कौशल विकास पर भी ध्यान देती हैं। उनके अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए वह कॉलेज और घर में चतुर्थ श्रेणी वर्ग की महिलाओं को इंग्लिश बोलना सिखाने के साथ जागरूक भी कर रही हैं।
पर्यावरण के प्रति कर रहीं जागरूक
रघुनाथ गर्ल्स पीजी कॉलेज में जन्तु विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रो. कल्पना चौधरी सामाजिक संस्थाएं ‘पहल एक प्रयास’ तथा ‘एनवायरमेंट एन्ड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ आदि के साथ जुड़कर समय समय पर पर पौधरोपण, सड़क सुरक्षा सम्बन्धित जागरूकता अभियान, पर्यावरण के प्रति सजगता के लिए लोगों को प्रेरित करने का काम पिछले दस सालों से कर रही हैं।
हिंदी में करा रहे एमबीबीएस की पढ़ाई
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के एंडोकि्रनोलॉजी (अंत:स्राव विद्या) के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज अग्रवाल हिंदी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं। वे अब तक दो किताबें लिख चुके हैं। वह साल 2017 से इस अभियान में जुटे हैं कि डॉक्टरी की पढ़ाई कैसे आसान हिंदी भाषा में कराई जा सके। वह 300 से ज्यादा वीडियो और एक हजार से ज्यादा लेख लिख चुके हैं।
थायरायड ग्रंथि पर उनके हिंदी जर्नल का सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल अक्तूबर में विमोचन भी किया था और इसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था। डॉ. पंकज अग्रवाल का कहना है कि वह जो पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं, उसकी शब्दावली मेडिकल की ही है, लेकिन उसे ऐसे लिखा जा रहा है, जिसे स्टूडेंट्स आसानी से समझ सकें और उसका इंटरनेशनल स्टैंडर्ड भी बना रहे।