फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Teacher's Day 2019: Teachers and student morals Decreased with modernity

शिक्षक दिवस: गुरु-शिष्य की टूटती परंपरा, बात-बात में बिगड़ रही बात, आधुनिकता के साथ घटे संस्कार

Thu, 05 Sep 2019 05:08 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 05 Sep 2019 05:08 PM IST
विज्ञापन
Teacher's Day 2019: Teachers and student morals Decreased with modernity
रिटायर्ड शिक्षक श्रीपाल वर्मा व महेंद्र सिंह सिसौदिया - फोटो : अमर उजाला
समय बदल चुका है। एक दौर था जब शिक्षक का आदेश छात्र-छात्राओं के लिए अंतिम होता था। किसी बात पर कोई सवाल नहीं। स्कूल में पिटाई की बात समाज और घर में छिपाई जाती थी, लेकिन बदले दौर में हालात भी बदल गए हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें स्कूल में शिक्षकों के सिर्फ डांटने पर ही अभिभावक और छात्र-छात्राएं थाने तक पहुंच गए।  
विज्ञापन


समाज में आ रहे नए बदलाव पर सेवानिवृत्त शिक्षक कहते हैं कि संस्कार कम हुए हैं। शिक्षा अब व्यवसाय की तरफ बढ़ रही है। यही वजह है कि गुरु और शिष्य के बीच सम्मान की परंपरा भी टूटती दिख रही है। शिक्षा पर आधुनिकता पूरी तरह हावी हो गई है। 
विज्ञापन


डौला गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक से सेवानिवृत्त  शिक्षक महेंद्र सिंह सिसौदिया कहते हैं कि पहले विद्यार्थियों में संस्कार डाले जाते थे, अब वो सब खत्म हो गए हैं। शिक्षक समाज से अलग होते जा रहे हैं। मोबाइल शिक्षक और छात्रों के बीच की दूरी को बढ़ा रहा है। आज के हालत को देखा तो पहले की शिक्षा ही उन्हें अच्छी लगी। जो भी उन्होंने अपनी सेवा दी है, वहीं पर छात्रों को अच्छी तरह पढ़ाकर संस्कारवान बनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

बसा टीकरी गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय से रिटायर्ड हुए खुशीराम ने कहा कि पहले संस्कार के साथ बच्चे पढ़ाई करने आते थे। शिक्षक और छात्रों में निकटता होती थी। अब का माहौल ऐसा नहीं है।

पहले तो जहां शिक्षक खड़े हो जाते थे, वहां पर छात्र कुर्सी लेकर चले आते थे। अब शिक्षक कहीं खड़े हो, कोई छात्र भटकता भी नहीं है। यदि हम सफाई को झाडू़ उठाते तो उससे पहले छात्र काम में लग जाते थे। अब तो माहौल  बदला है। शिक्षक के साथ शिक्षा बदल गई है। 

अमीनगर सराय निवासी इंटरमीडिएट कॉलेज से सेवानिवृत्त शिक्षक श्रीपाल वर्मा ने कहा कि गुरू और शिष्य में नाता मां और बाप का होता था। शिक्षक जिस प्रकार अपने बेटे को चाहते थे, वैसे ही कक्षा के सभी बच्चों से वैसा ही व्यवहार करते थे।

उनके पढ़ाई छात्र जो उच्च पदों पर है, आज भी उनके पैर छूते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहले की शिक्षा और अब की शिक्षा में क्या बदलाव हुआ है। अब तो शिक्षक के साथ-साथ छात्रों पर भी आधुनिकता हावी हो गई है।

केस-1
एक साल पहले पब्लिक स्कूल में एक शिक्षक ने बच्चे को डांट दिया। छात्र ने अभिभावकों से शिकायत की। इसके बाद मामला थाने पहुंच गया। यहां पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ।

केस-2
बागपत जिले के स्कूल में मासूम से दुष्कर्म की वारदात हुई। शिक्षकों ने आगे बढ़कर प्रकरण में पुलिस की मदद लेने के बजाए मामले को दबाने का प्रयास किया। हालांकि इसके बाद दोनों को निलंबित किया।

बदल रहा दौर
जेवी डिग्री कॉलेज बड़ौत के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह कहते हैं कि दौर बदल रहा है। पढ़ने और पढ़ाने का तरीका बदल गया है। एक समय वह भी था, जब कक्षा में पढ़ाई के लिए बच्चे क्लास रूम के कोने में खड़ा होकर पढ़ने को तैयार हो जाते थे, लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते चलन और आधुनिकता की चकाचौंध में स्कूल तक छात्र-छात्राएं नहीं पहुंच रहे हैं। यह चिंता का कारण है। शिक्षकों और अभिभावकों को मिलकर समाधान करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed