फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   TB war in Meerut district, more than 33 thousand new patients in five years

मेरठ जिले में टीबी का वार, पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीजों को बनाया शिकार 

Sun, 20 Jan 2019 06:34 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 20 Jan 2019 06:34 PM IST
विज्ञापन
TB war in Meerut district, more than 33 thousand new patients in five years
भारत में टीबी

टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) का अगर एक मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 12 मरीजों को टीबी का शिकार बना सकता है। इससे भी भयावह हालात यह हैं कि व्यक्ति को टीबी हो और उसे इसका पता भी न हो कि वह इस बीमारी का शिकार है और उसकी वजह से और भी लोग टीबी के मरीज हो सकते हैं।

विज्ञापन


जिला क्षय रोग विभाग के सात से 17 जनवरी तक (रविवार छोड़कर) कराए गए सर्वे में टीबी की बीमारी के 258 नए मरीज ऐसे मिले हैं जिन्हें जानकारी ही नहीं थी कि उन्हें टीबी है। यह मरीज ढाई से तीन हजार स्वस्थ लोगों को टीबी के बीमार बना सकते थे। इनका इलाज शुरू कर दिया गया है।

विज्ञापन

65 प्रतिशत पुरुष, 35 फीसदी निकलीं महिलाएं
घर-घर जाकर जांच करने का यह सर्वे 47451 घरों में 474475 लोगों पर कराया गया, जिनमें से संदेह होने पर 2196 लोगों के बलगम के सैंपल लिए गए, जिनकी लैंब में जांच कराई गई। इनमें से 258 के सैंपल की रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि हुई है। इनमें 25 से 50 साल उम्र के मरीज सबसे ज्यादा हैं।

इनमें करीब 65 प्रतिशत पुरुष और 35 फीसदी महिलाएं हैं। यह अभियान लल्लापुरा, मलियाना, साबुन गोदाम, मकबरा डिग्गी, भावनपुर, पुलिस लाइंस, संजयनगर, रजपुरा, रोहटा, घिसौली, करनावल, लावड़, सरधना, सलावा और कंकरखेड़ा क्षेत्र में चलाया गया। 

पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीज 
जिले में पिछले पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीजों को टीबी की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़े उन लोगों के हैं, जिनका स्वास्थ्य विभाग ने इलाज किया है। इस अभियान का नाम ‘टीबी-फ्री इंडिया’ है। प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2025 तक देश को टीबी रोगियों से मुक्त करने के प्रयास के तहत सक्रिय क्षय रोगी अभियान चलाया गया।

बीच में इलाज छोड़ना है खतरनाक
घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एक मरीज साल भर अगर इलाज न कराए तो वह 10-12 लोगों को यह बीमारी दे सकता है। नियमित जांच कराने के बाद नियमित दवाएं खाने से बीमारी ठीक हो जाती है। चिंता इस बात की है कि कई मरीज बीच में इलाज छोड़ देते हैं, जो कि गलत तरीका है। इससे बीमारी बढ़ सकती है। - डॉ. एमएस फौजदार, जिला क्षय रोग अधिकारी

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed