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टीबी केेे रेड जोन में गर्भवती महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Mar 2017 02:23 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार 2024 तक देश को टीबी मुक्त कराने का प्लान बना चुकी है। लेकिन टीबी का कीड़ा आम महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं को तेजी से अपना शिकार बना रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में दर्ज टीबी के मरीजों में 30 फीसदी गर्भवती महिलाएं हैं। चौंकाने वाली बात यह कि निम्न वर्ग के साथ उच्च वर्ग की महिलाएं भी बीमारी से पीड़ित हैं।
चिकित्सकों के अनुसार निम्न आय वर्ग परिवारों में प्रदूषण, गंदगी और बढ़ती आबादी टीबी के नये मरीज तैयार कर रही है। वहीं उच्च आय वर्ग के संभ्रांत परिवारों में जंक फूड की अधिकता, बढ़ती अनियमित दिनचर्या, अच्छी प्रोटीन डाइट का अभाव मातृत्व पर टीबी का संकट बढ़ा रहा है। प्रोटीन की कमी के कारण जच्चा-बच्चा में टीबी का खतरा बढ़ा है। गर्भवती महिलाओं में एमडीआर और एक्सडीआर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। महिलाओं में एमडीआर और एक्सडीआर टीबी होते ही एबॉर्शन का खतरा बढ़ता है। संक्रमण की दवाओं में टॉक्सिक अधिक होने के कारण एमडीआर की मरीज महिलाओं को ये दवाएं देने से भ्रूण की जान को खतरा होता है।
गर्भवती माताएं इन बातों का रखें ख्याल
सफाई का विशेष ख्याल रखें। भीड़ भरे इलाकों, अस्पतालों व गंदगी के इलाकों में जाने से बचें। परिवार, मोहल्ले में किसी को टीबी है उसके संपर्क में न जाएं। घर में किसी को खांसी है वो व्यक्ति तुरंत बलगम की जांच कराएं। गर्भवती महिलाओं के पास न जाएं। दूसरे व्यक्ति की खांसी व बलगम का संपर्क गर्भवती महिला से न हो। महिला को एक हफ्ते से अधिक खांसी हो तो बलगम की तुरंत जांच कराएं। महिलाएं जंक फूड के बजाय रोटी, पनीर, दही, दूध, फल, हरी सब्जी, दालें व मछली प्रोटीन डाइट का सेवन करें।
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एक ग्राम प्रोटीन के लिए चाहिए इतनी डाइट
चार कटोरी दाल, पनीर, पांच रोटी, दो ग्लास दूध, दो कटोरी दही, दो अंडे, फल, हरी सब्जी, सूखे मेवे, सोयाबीन का सेवन करें। इसके अलावा मांस, मछली का भी सेवन करें।
आम व्यक्ति में प्रोटीन की आवश्यकता
बैठकर काम करने वाले आम व्यक्ति, कर्मचारी को प्रतिदिन - शरीर के प्रतिकि ग्रा वजन पर .75 ग्राम प्रोटीन
छात्र, ग्रोइंग उम्र के बच्चों, युवतियों को प्रतिदिन- शरीर के प्रतिक्रिगा वजन पर .90 ग्राम प्रोटीन
मार्केटिंग, टीचर, चलकर काम करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन - शरीर के प्रति किग्रा वजन पर 1 ग्राम प्रोटीन
खिलाड़ियों व अधिक शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन - शरीर के प्रति किग्रा वजन पर 1.25 ग्राम प्रोटीन
गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन- शरीर के प्रति किग्रा वजन पर 1 से 1.50 ग्राम प्रोटीन
एक किग्रा प्रोटीन .25 ग्राम ले रही माताएं
टीबी के मरीजों में गर्भवती महिला मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक है। इसका बड़ा कारण प्रोटीन डाइट का अभाव है। अच्छे परिवारों की महिलाएं भी फिगर, चटपटा खाने की आदत और डाइटिंग के चक्कर में प्रोटीन डाइट से दूर हैं। भूख लगने पर जंक फूड, कोल्डड्रिंक से पेट भरती हैं। डाइटिंग के कारण रोटी, दाल, दूध नहीं लेती। जो प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है। गर्भवती महिला को शरीर के वजन के अनुसार प्रतिदिन एक से डेढ़ ग्राम प्रतिकि ग्रा प्रोटीन चाहिए। महिलाएं .25 ग्राम प्रोटीन ही सेवन कर रही हैं। इसका असर सीधे इम्युनिटी को कमजोर करके टीबी का संक्रमण बढ़ रहा है। साकेत, शास्त्रीनगर, पांडवनगर, डिफेंस एन्क्लेव, जागृति विहार जैसे पॉश इलाके की महिलाओं में भी यह शिकायत आ रही है। - डॉ. वीएन त्यागी, वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ
लो इम्युनिटी और खून की कमी से बचें
गर्भवती महिलाओं में 85 फीसदी गर्भवती महिलाएं ऐसी हैं, जो खून की कमी से जूझ रही हैं। खून की कमी के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बल्क मधुमेह के मरीज की तरह घट रही है। लो इम्युनिटी और खून की कमी टीबी क ा मरीज बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। गर्भवती महिलाओं में लो इम्युनिटी की बड़ी समस्या है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता घटते ही टीबी का वायरस तेजी से जच्चा पर हमला करके उसे अपनी चपेट में लेता है। संक्रमण बढ़ते ही पूरी प्रेगनेंसी खतरे में पड़ जाती है। अहमद नगर, नूर नगर, लिसाड़ी गेट, हापुड़ रोड, मछेरान सहित अन्य इलाकों की महिलाओं में टीबी का बड़ा खतरा है। - डॉ. सपना गोयल वरिष्ठ महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ
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चिकित्सकों के अनुसार निम्न आय वर्ग परिवारों में प्रदूषण, गंदगी और बढ़ती आबादी टीबी के नये मरीज तैयार कर रही है। वहीं उच्च आय वर्ग के संभ्रांत परिवारों में जंक फूड की अधिकता, बढ़ती अनियमित दिनचर्या, अच्छी प्रोटीन डाइट का अभाव मातृत्व पर टीबी का संकट बढ़ा रहा है। प्रोटीन की कमी के कारण जच्चा-बच्चा में टीबी का खतरा बढ़ा है। गर्भवती महिलाओं में एमडीआर और एक्सडीआर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। महिलाओं में एमडीआर और एक्सडीआर टीबी होते ही एबॉर्शन का खतरा बढ़ता है। संक्रमण की दवाओं में टॉक्सिक अधिक होने के कारण एमडीआर की मरीज महिलाओं को ये दवाएं देने से भ्रूण की जान को खतरा होता है।
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गर्भवती माताएं इन बातों का रखें ख्याल
सफाई का विशेष ख्याल रखें। भीड़ भरे इलाकों, अस्पतालों व गंदगी के इलाकों में जाने से बचें। परिवार, मोहल्ले में किसी को टीबी है उसके संपर्क में न जाएं। घर में किसी को खांसी है वो व्यक्ति तुरंत बलगम की जांच कराएं। गर्भवती महिलाओं के पास न जाएं। दूसरे व्यक्ति की खांसी व बलगम का संपर्क गर्भवती महिला से न हो। महिला को एक हफ्ते से अधिक खांसी हो तो बलगम की तुरंत जांच कराएं। महिलाएं जंक फूड के बजाय रोटी, पनीर, दही, दूध, फल, हरी सब्जी, दालें व मछली प्रोटीन डाइट का सेवन करें।
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एक ग्राम प्रोटीन के लिए चाहिए इतनी डाइट
चार कटोरी दाल, पनीर, पांच रोटी, दो ग्लास दूध, दो कटोरी दही, दो अंडे, फल, हरी सब्जी, सूखे मेवे, सोयाबीन का सेवन करें। इसके अलावा मांस, मछली का भी सेवन करें।
आम व्यक्ति में प्रोटीन की आवश्यकता
बैठकर काम करने वाले आम व्यक्ति, कर्मचारी को प्रतिदिन - शरीर के प्रतिकि ग्रा वजन पर .75 ग्राम प्रोटीन
छात्र, ग्रोइंग उम्र के बच्चों, युवतियों को प्रतिदिन- शरीर के प्रतिक्रिगा वजन पर .90 ग्राम प्रोटीन
मार्केटिंग, टीचर, चलकर काम करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन - शरीर के प्रति किग्रा वजन पर 1 ग्राम प्रोटीन
खिलाड़ियों व अधिक शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन - शरीर के प्रति किग्रा वजन पर 1.25 ग्राम प्रोटीन
गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन- शरीर के प्रति किग्रा वजन पर 1 से 1.50 ग्राम प्रोटीन
एक किग्रा प्रोटीन .25 ग्राम ले रही माताएं
टीबी के मरीजों में गर्भवती महिला मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक है। इसका बड़ा कारण प्रोटीन डाइट का अभाव है। अच्छे परिवारों की महिलाएं भी फिगर, चटपटा खाने की आदत और डाइटिंग के चक्कर में प्रोटीन डाइट से दूर हैं। भूख लगने पर जंक फूड, कोल्डड्रिंक से पेट भरती हैं। डाइटिंग के कारण रोटी, दाल, दूध नहीं लेती। जो प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है। गर्भवती महिला को शरीर के वजन के अनुसार प्रतिदिन एक से डेढ़ ग्राम प्रतिकि ग्रा प्रोटीन चाहिए। महिलाएं .25 ग्राम प्रोटीन ही सेवन कर रही हैं। इसका असर सीधे इम्युनिटी को कमजोर करके टीबी का संक्रमण बढ़ रहा है। साकेत, शास्त्रीनगर, पांडवनगर, डिफेंस एन्क्लेव, जागृति विहार जैसे पॉश इलाके की महिलाओं में भी यह शिकायत आ रही है। - डॉ. वीएन त्यागी, वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ
लो इम्युनिटी और खून की कमी से बचें
गर्भवती महिलाओं में 85 फीसदी गर्भवती महिलाएं ऐसी हैं, जो खून की कमी से जूझ रही हैं। खून की कमी के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बल्क मधुमेह के मरीज की तरह घट रही है। लो इम्युनिटी और खून की कमी टीबी क ा मरीज बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। गर्भवती महिलाओं में लो इम्युनिटी की बड़ी समस्या है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता घटते ही टीबी का वायरस तेजी से जच्चा पर हमला करके उसे अपनी चपेट में लेता है। संक्रमण बढ़ते ही पूरी प्रेगनेंसी खतरे में पड़ जाती है। अहमद नगर, नूर नगर, लिसाड़ी गेट, हापुड़ रोड, मछेरान सहित अन्य इलाकों की महिलाओं में टीबी का बड़ा खतरा है। - डॉ. सपना गोयल वरिष्ठ महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ