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इलेक्ट्रॉनिक मैपिंग से टारगेट तय, जांबाजों ने दिखाया शौर्य
Wed, 27 Feb 2019 02:15 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला
न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: Gaurav sharma
Updated Wed, 27 Feb 2019 02:15 AM IST
सार
ग्रुप कैप्टन आरकेसिंह बोले, भारतीय वायु सेना ऐसे ऑपरेशन के लिए हर वक्त तैयार
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मेरठ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के कैंप को ध्वस्त करके भारतीय वायु सेना के जांबाजों ने शौर्य का कार्य किया है। भारतीय वायु सेना ऐसे ऑपरेशन के लिए हर वक्त तैयार है। इलेक्ट्रॉनिक मैपिंग से टारगेट तय करने के बाद हमारे पायलटों ने बहुत बेहतर काम किया। यह कहना है भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन रहे आरके सिंह का।
लंबे समय तक सेना में हैलीकॉप्टर पायलट रहे ग्रुप कैप्टन आरके सिंह बताते हैं कि वायु सेना के लड़ाकों ने बेहतरीन तरीके से पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। मिराज 2000 के साथ अवाच सिस्टम के जरिए आतंकियों के कैंप ध्वस्त कर दिए। वायु सेना को यहीं नहीं रुकना चाहिए था। जो भी दूसरे कैंपों की रिपोर्ट थीं उनको भी टारगेट करना चाहिए। क्योंकि पाकिस्तान इस पर भी उतना ही रियेक्शन कर रहा है। और ज्यादा कैंपों पर हमले होते तो भी उसका यही रवैया होता।
ग्रुप कैप्टन बताते हैं कि जिस तरह से ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, यह पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक वार सिस्टम का पार्ट था। लेजर तकनीक प्रयोग की गई। इलेक्ट्रॉनिक मैपिंग से टारगेट इस तरह से तय किया जाता है कि कितने डिग्री नॉर्थ में कितने डिग्री साउथ में हमला करना है। प्लेन की कितनी स्पीड रहेगी, कितने हाइट पर रहना होगा, कहां से उसको टर्न लेना है। यह सब पहले से प्लांट हो जाता है। इस स्ट्राइक में भी इलेक्ट्रॉनिक मैपिंग के जरिए ऑपरेशन किया गया। पाकिस्तान के सेटेलाइट सिस्टम की फ्रीक्वेंसी को कुछ देर के लिए कम करके ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। जब तक पाकिस्तानी सेना को समझ आया, तब तक भारतीय वायु सेना के पायलट अपना काम कर चुके थे।
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आरके सिंह बताते हैं कि जिस इलाके में हमला हुआ है वह पूरा पहाड़ी क्षेत्र है। हमारी वायु सेना पहाड़ी क्षेत्र में हमला करने के लिए पूरी तरह से अभ्यस्त है। भले ही वायु सेना का लंबे समय से किसी से युद्ध नहीं हुआ। लेकिन हमारे यहां पर जो रूटीन ट्रेनिंग है वह ऐसे क्षेत्रों में कार्र्रवाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बाकायदा वायु सेना की स्पेशल ट्रेनिंग चलती रहती है। ऐसे में इस तरह के ऑपरेशन के लिए भारतीय वायु सेना पूरी तरह से आगे भी तैयार है।
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लंबे समय तक सेना में हैलीकॉप्टर पायलट रहे ग्रुप कैप्टन आरके सिंह बताते हैं कि वायु सेना के लड़ाकों ने बेहतरीन तरीके से पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। मिराज 2000 के साथ अवाच सिस्टम के जरिए आतंकियों के कैंप ध्वस्त कर दिए। वायु सेना को यहीं नहीं रुकना चाहिए था। जो भी दूसरे कैंपों की रिपोर्ट थीं उनको भी टारगेट करना चाहिए। क्योंकि पाकिस्तान इस पर भी उतना ही रियेक्शन कर रहा है। और ज्यादा कैंपों पर हमले होते तो भी उसका यही रवैया होता।
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ग्रुप कैप्टन बताते हैं कि जिस तरह से ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, यह पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक वार सिस्टम का पार्ट था। लेजर तकनीक प्रयोग की गई। इलेक्ट्रॉनिक मैपिंग से टारगेट इस तरह से तय किया जाता है कि कितने डिग्री नॉर्थ में कितने डिग्री साउथ में हमला करना है। प्लेन की कितनी स्पीड रहेगी, कितने हाइट पर रहना होगा, कहां से उसको टर्न लेना है। यह सब पहले से प्लांट हो जाता है। इस स्ट्राइक में भी इलेक्ट्रॉनिक मैपिंग के जरिए ऑपरेशन किया गया। पाकिस्तान के सेटेलाइट सिस्टम की फ्रीक्वेंसी को कुछ देर के लिए कम करके ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। जब तक पाकिस्तानी सेना को समझ आया, तब तक भारतीय वायु सेना के पायलट अपना काम कर चुके थे।
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आरके सिंह बताते हैं कि जिस इलाके में हमला हुआ है वह पूरा पहाड़ी क्षेत्र है। हमारी वायु सेना पहाड़ी क्षेत्र में हमला करने के लिए पूरी तरह से अभ्यस्त है। भले ही वायु सेना का लंबे समय से किसी से युद्ध नहीं हुआ। लेकिन हमारे यहां पर जो रूटीन ट्रेनिंग है वह ऐसे क्षेत्रों में कार्र्रवाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बाकायदा वायु सेना की स्पेशल ट्रेनिंग चलती रहती है। ऐसे में इस तरह के ऑपरेशन के लिए भारतीय वायु सेना पूरी तरह से आगे भी तैयार है।