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सिस्टम लापरवाह, 100 करोड़ की फसल तबाह, कमीशन के लालच में अधिकारियों ने नहीं कराई तटबंधों की मरम्मत 

Sun, 09 Sep 2018 10:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sun, 09 Sep 2018 10:36 AM IST
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system laaparvaah, 100 crore ki fasal tabaah
file - फोटो : amarujala
पश्चिमी यूपी में  सिंचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा गंगा खादर में 19 गांवों में रहने वाले 4810 लोग झेल रहे हैं। यदि समय रहते कमीशन का लालच छोड़कर सिंचाई विभाग के अधिकारी समय से तटबंध की मरम्मत करा देते तो इस समय इन गांवों में पानी नहीं भरा होता। करीब 7500 हेक्टेयर से ज्यादा खड़ी 100 करोड़ रुपये धान की फसल भी तबाह नहीं होती। जानें आखिर कैसे कमीशन के लालच में अधिकारियों की गलती का खामियाजा भुगत रहे हैं गांवों के किसान:-
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गंगा खादर में हर साल बारिश के दौरान बाढ़ का प्रकोप आता था। गंगा में पानी बढ़ने के साथ ग्राम फतेहपुर प्रेम के पास से गंगा कटान शुरू करते हुए आसपास के गांवों और जंगलों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर देती थी। इससे बचने के लिए वर्ष 2013 में यहां ग्रामीणों की मदद से दो कच्चे तटबंध तैयार किए गए। पहला तटबंध करीब 11 किमी लंबा और दूसरा करीब डेढ़ किमी लंबा है। बल्लियों को गाड़कर उसके साथ प्लास्टिक के बोरों में रेत और पत्थर आदि डालकर यह बड़ा तटबंध तैयार किया गया था। हर साल गंगा में पानी बढ़ता और इस तटबंध को क्षतिग्रस्त करता था। इसके बाद सिंचाई विभाग और ग्रामीण इसकी मरम्मत करा देते थे। 

गत वर्ष हुए थे 70 लाख खर्च
गत वर्ष भी हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक ने अपनी विधायक निधि से करीब 70 लाख रुपये खर्च करते हुए इस तटबंध की मरम्मत करायी थी। लेकिन पानी इस कदर तेज था कि इस तटबंध को क्षतिग्रस्त कर दिया। लेकिन इस बार सिंचाई विभाग की लापरवाही इस कदर हावी रही कि मौसम विभाग की तमाम चेतावनियों और लगातार बढ़ते पानी के बावजूद इस तटबंध की पूर्व में मरम्मत नहीं करायी गयी। 

 
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25 लाख रुपये पानी में बहे
जब तटबंध तोड़कर पानी गांवों में भरना शुरू हुआ और जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने दौरा किया तो सिंचाई विभाग नींद से जागा। सिंचाई विभाग ने करीब 25 लाख रुपये इस तटबंध की मरम्मत में लगाए। लेकिन इसमें भी घपला कर दिया। तटबंध की मरम्मत आंशिक रूप से की गयी, जो तेज पानी के बहाव में किसी काम की नहीं रही। 

अब विकट हैं हालात
आज हालात ये हैं कि खादर क्षेत्र के गांव सिरजेपुर, हादीपुर गांवड़ी, बधवा, खेड़ी कलां, हरीपुर, परसापुर हंसापुर, गोकलपुर, दुपेड़ी चाव, ऐदलपुर, खरखाली, मनोहरपुर, दबखेडृी, चामरोद, भागूपुर, बाजमपुर, फतेहपुर प्रेम, रठोडा कला, किशनपुर खादर और मखदूमपुर बाढ़ की पूरी तरह चपेट में हैं। इन गांवों के भीतर एक फिट से चार फिट तक पानी भरा है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के सामान तक लाने ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन तमाम गांवों के किसानों की 7523.045 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी करीब 100 करोड़ रुपये की धान की फसल नष्ट हो चुकी है। 
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नुकसान तो इससे ज्यादा 
यह आंकड़ा सिर्फ उन 19 गांवों का है जो सीधे प्रभावित हुए हैं। जबकि इन खेतों में लगे ट्यूबवेल पंप, झोपड़ी आदि के साथ ही परीक्षितगढ़ खादर क्षेत्र में भी सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसल क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में इस बाढ़ के कहर में डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने की बात ग्रामीण कर रहे हैं। 

स्थायी समाधान का प्रयास होगा
मैंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया है। वास्तव में बाढ़ से किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई के साथ ही भविष्य में यह नुकसान होने से बचे, इसके शीघ्र ही स्थायी समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। -सुरेश राणा, गन्ना राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार उत्तर प्रदेश सरकार 

शीघ्र मिलेगी राहत
अब गंगा के जलस्तर में काफी कमी आ रही है। शनिवार को गंगा में सिर्फ 72 हजार क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज किया गया। यदि बारिश नहीं होती है और पीछे से ज्यादा पानी नहीं आता है तो शीघ्र ही खादर क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी। -पीयूष कुमार, अवर अभियंता बिजनौर बैराज


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