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स्वास्थ्य विभाग को थी लिंग परीक्षण की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 07 Aug 2016 02:06 AM IST
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स्वास्थ्य सेवाएं
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में भ्रूण लिंग परीक्षण के खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की मिलीभगत की परतें भी उधड़ रही हैं। हाल में वायरल हुए एक ऑडियो में स्पष्ट है कि मोहनपुरी में चल रहे भ्रूण लिंग परीक्षण की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को पहले से थी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। दावा किया जा रहा है कि ऑडियो में स्वास्थ्य विभाग के एक सहायक शोध अधिकारी की आवाज है।
वायरल ऑडियो 2:18 मिनट का है। इसमें सहायक शोध अधिकारी चिकित्सक संगठन के एक अधिकारी से बात कर रहे हैं। ऑडियो में अधिकारी यह कह रहे हैं कि उन्होंने डॉ. ऋषिराज त्यागी से रजिस्ट्रेशन लेने से पहले मना किया था। कहा था कि डॉक्टर साहब आप कहां के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। वह क्षेत्र लिंग परीक्षण के बदनाम है। इसके बाद भी वह नहीं माने और आवेदन कर दिया। इससे स्पष्ट है कि विभाग को पता था कि लिंग परीक्षण कहां होता है, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऑडियो में यह भी कहा गया है कि शलभ अल्ट्रासाउंड सेंटर की मशीन में डाटा सेव नहीं किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि शोध अधिकारी को मोहनपुरी क्षेत्र में संचालित भ्रूण लिंग परीक्षण के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। उन्होंने इस ऑडियो में दावा किया है कि डॉ. ऋषिराज त्यागी के केस में कुछ नहीं बिगड़ेगा, क्योंकि चिप में कोई डाटा नहीं मिला है। एक तरह से ऑडियो में सहायक शोध अधिकारी आरोपी चिकित्सक की पैरवी कर रहा है।
इसीलिए छापेमारी के बाद दी सूचना
पीसीपीएनडीटी के नोडल ऑफिसर डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि शुक्रवार को सोनीपत से आई टीम जब डीएम से मिली तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को छापेमारी के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। शलभ अल्ट्रासाउंड सेंटर में कार्रवाई के लिये डीएम ने एसीएम सिविल लाइन को टीम के साथ भेजा था। कार्रवाई शुरू होने के बाद ही शोध अधिकारी वीके गुप्ता को सामान सील करने के लिए बुलाया गया। दरअसल, आशंका यह थी कि कार्रवाई से पहले सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जाती तो शायद ही सच्चाई सामने आ पाती।
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वायरल ऑडियो 2:18 मिनट का है। इसमें सहायक शोध अधिकारी चिकित्सक संगठन के एक अधिकारी से बात कर रहे हैं। ऑडियो में अधिकारी यह कह रहे हैं कि उन्होंने डॉ. ऋषिराज त्यागी से रजिस्ट्रेशन लेने से पहले मना किया था। कहा था कि डॉक्टर साहब आप कहां के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। वह क्षेत्र लिंग परीक्षण के बदनाम है। इसके बाद भी वह नहीं माने और आवेदन कर दिया। इससे स्पष्ट है कि विभाग को पता था कि लिंग परीक्षण कहां होता है, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऑडियो में यह भी कहा गया है कि शलभ अल्ट्रासाउंड सेंटर की मशीन में डाटा सेव नहीं किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि शोध अधिकारी को मोहनपुरी क्षेत्र में संचालित भ्रूण लिंग परीक्षण के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। उन्होंने इस ऑडियो में दावा किया है कि डॉ. ऋषिराज त्यागी के केस में कुछ नहीं बिगड़ेगा, क्योंकि चिप में कोई डाटा नहीं मिला है। एक तरह से ऑडियो में सहायक शोध अधिकारी आरोपी चिकित्सक की पैरवी कर रहा है।
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इसीलिए छापेमारी के बाद दी सूचना
पीसीपीएनडीटी के नोडल ऑफिसर डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि शुक्रवार को सोनीपत से आई टीम जब डीएम से मिली तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को छापेमारी के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। शलभ अल्ट्रासाउंड सेंटर में कार्रवाई के लिये डीएम ने एसीएम सिविल लाइन को टीम के साथ भेजा था। कार्रवाई शुरू होने के बाद ही शोध अधिकारी वीके गुप्ता को सामान सील करने के लिए बुलाया गया। दरअसल, आशंका यह थी कि कार्रवाई से पहले सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जाती तो शायद ही सच्चाई सामने आ पाती।
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