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सुरक्षा मांगने पर गवाहों को मिल रही गोलियां  

Sun, 04 Feb 2018 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 04 Feb 2018 01:18 AM IST
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suraksha maangi  par gavaaho ko mil rahi golia
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अपनों को इंसाफ दिलाने के लिए लोगों को मौत का सामना करना पड़ रहा है। जान की बाजी लगाकर लोग न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन इस जुर्म के जंगल में सुरक्षा न मिलने से लोगों का वास्ता मौत से पड़ रहा है।
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मेरठ में हत्या के 1275 गवाहों को जान का खतरा बना हुआ है। कई चश्मदीद गवाहों की हत्या से मुकदमों में मुल्जिमों को राहत मिल रही है। लगातार हत्या होने से गवाहों में दहशत है। सोहरका गांव में दोहरे हत्याकांड होने के बाद से 100 से अधिक लोगों ने पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा मांगी है। पुलिस का दावा है कि 1275 गवाह अब पुलिस की निगरानी में है। सुरक्षा के बंदोबस्त कराए जा रहे है। लेकिन शनिवार को चश्मदीद गवाह सावित्री पर जानलेवा हमले के बाद पुलिस के दावों पर फिर सवाल उठ गए हैं कि पुलिस यह कैसी सुरक्षा दे रही है जो गवाहों पर सरेआम हमले हो रहे हैं। शुक्रवार को कंकरखेड़ा में गवाह पर हमला हुआ था। 
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इन गवाहों की हुई हत्या 
5 नवंबर 2014 में मेरठ कचहरी में नितिन गंजा की हत्या, डॉ. सुभाष मलिक, सतवीर सिंह, यासीन, भावना हत्याकांड, प्रधान सतेंद्र व उसकी पत्नी की हत्या, सोहरका में दोहरा हत्याकांड। इसके अलावा कई गवाहों पर जानलेवा हमले हुए हैं। इन सभी का कसूर बस इतना है कि ये अपनों की हत्या के बदले में इंसाफ मांग रहे थे। अभी कई और गवाह ऐसे हैं, जिन्हें जान का खतरा बना हुआ है। जेल में बंद योगेश भदौड़ा, उधम सिंह, सुंदर भाटी समेत कई ऐसे बदमाश हैं, उनके खिलाफ लोग गवाही देने से डर रहे हैं। शायद यही वजह है कि पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिलता और अपराधी को आसानी से जमानत मिल जाती है। वह बेखौफ होकर घूमते हैं। 
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