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पुन: प्रेषित...डिजिटल पर लेट नाइट चलाएं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनी गुहार, एसआईटी करेगी मुहब्बत हत्याकांड का राजफाश

Thu, 24 Sep 2026 05:31 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 05:31 PM IST
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Supreme Court Hears Plea, SIT to Unravel Muhabbat Murder Case
अविका होटल में 17 फरवरी को की थी हत्या, जलाया था चेहरा और नष्ट किए थे सीसीटीवी फुटेज
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तुर्कमेनिस्तान से आई मां की याचिका पर दिया आदेश, 2 माह में दाखिल करनी होगी जांच रिपोर्ट
जेपी शर्मा
मेरठ। तुर्कमेनिस्तान निवासी मुहब्बत सुनातोव्ना (40) की हत्या के मामले में उसकी मां नाजमुदिनोवा गुलनारा की गुहार सुप्रीम कोर्ट ने सुन ली है। मंगलवार को गुलनारा की रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील वरुण नारंग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की पीठ ने मेरठ पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए मामले की जांच एसआईटी (विशेष जांच दल) से कराने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि एसआईटी का नेतृत्व कम से कम एएसपी (अपर पुलिस अधीक्षक) स्तर का अधिकारी करेगा और दो महीने में जांच रिपोर्ट सक्षम अदालत में दाखिल करनी होगी।
17 फरवरी को परतापुर के रिठानी स्थित अविका होटल में मुहब्बत की हत्या की गई थी। वारदात के बाद उसका शव मवाना थाना क्षेत्र में ले जाकर खेत में फेंक दिया गया था। 21 फरवरी को पुलिस ने महिला का शव बरामद किया और 26 फरवरी को एक फर्जी पहचान पत्र के आधार पर दिल्ली की अर्चिता अरोड़ा मानकर हत्याकांड का जल्दबाज़ी में खुलासा किया था। पुलिस ने मामले में होटल संचालक देवपुरी निवासी चंचल कुमार उर्फ बंटी, बागपत के जौहड़ी गांव निवासी गुरमुख, प्रभात नगर निवासी संदीप और खजूरीवाली गली मलियाना निवासी विवेक को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना था कि रुपये के लेनदेन को लेकर चंचल कुमार का मुहब्बत से विवाद हुआ था। इसी विवाद में आरोपियों ने कंबल से मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों ने होटल के सीसीटीवी फुटेज आदि नष्ट कर दिए थे। ठोस साक्ष्य न जुटाने के कारण आरोपियों को जमानत मिल गई थी।
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आज को सुप्रीम कोर्ट परिसर में मां को सौंपे जाएंगे शव के अवशेष
पुलिस ने अंतिम संस्कार की राख संरक्षित नहीं की थी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि शव परीक्षण के समय संरक्षित किए गए मृतका के शव के अवशेष (दाहिनी जांघ की मांसल त्वचा, एक दांत, स्टर्नम हड्डी का टुकड़ा और सिर के बाल) शुक्रवार को दोपहर 12 से 1 बजे के बीच सुप्रीम कोर्ट परिसर में मां गुलनारा को सौंपे जाएं। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय और तुर्कमेनिस्तान दूतावास को निर्देश दिया गया है कि वे मां को अवशेषों के साथ स्वदेश लौटने में पूरी सहायता प्रदान करें।
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मां ने इयररिंग्स देखकर की पहचान, डीएनए से हुई पुष्टि
मुहब्बत की मान्य तुर्कमेनिस्तान में रहते हुए दिल्ली में रहने वाली अजीजा से वीडियो कॉल पर बात करते हुए शव के फोटो देखे थे। फोटो में इयररिंग्स देखकर उन्होंने बेटी के शव की पहचान की थी। इसके बाद शव के अवशेष से उसकी मां के रक्त का डीएनए मिलान भी कराया गया था। रिपोर्ट में शव मुहब्बत का होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद मुहब्बत की मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।
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मानव तस्करी और अनैतिक धंधे का हो सकता है खुलासा
वारदात के बाद आरोपियों की व्हाट्सएप चैटिंग से बातचीत के कुछ ऐसे स्क्रीन शॉट सामने आए थे, जिसमें विदेशी लड़कियां उपलब्ध कराने आदि की बातचीत उजागर हुई थी। आशंका थी कि आरोपियों के तार अनैतिक धंधे में लिप्त बड़े रैकेट से जुड़े हैं। यह रैकेट विदेश से नौकरी आदि के नाम पर मानव तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है। अब एसआईटी की जांच से इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ होने की उम्मीद है।
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चूड़ी व धागे से मान लिया हिंदू, कर दिया था अंतिम संस्कार
मेरठ। जांच एजेंसी ने शव की शिनाख्त न होने पर मृतका द्वारा पहनी गई चूड़ी और गर्दन में बंधे धागे के आधार पर यह मान लिया था कि मृतका हिंदू धर्म का पालन करती थी। इसी आधार पर पुलिस अधिकारियों ने सूरजकुंड श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने तो परिजनों को सूचित किया और न ही तुर्कमेनिस्तान के दूतावास को सूचना दी। जब मीडिया और दूतावास के सहयोग से सत्यापन हुआ तब मृतका के तुर्कमेनिस्तान निवासी होने की पुष्टि हो सकी।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी : मेरठ पुलिस की जांच ढीली, एफआईआर में की देरी
मृतका की मां के वकील वरुण नारंग के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मेरठ पुलिस की शुरुआती जांच पर सख्त टिप्पणी की है। कहा कि मेरठ पुलिस के अधिकारियों द्वारा की गई जांच ढीली और अपर्याप्त थी। इसकी पुष्टि एफआईआर दर्ज करने में देरी और शव बरामद होने के बाद जांच के तरीके से होती है। मृतका के शरीर पर जलने के निशान थे। फिर भी मृत्यु के कारण के संबंध में साक्ष्य एकत्र करने का पहला प्रयास नहीं किया गया। जब शव पर चोटों के भौतिक साक्ष्य मौजूद थे तो एफआईआर दर्ज न करने का कोई कारण नहीं हो सकता था। कारण चाहे जो भी हो शव का पोस्टमार्टम चार दिनों तक बिना किसी औचित्य के टाल दिया गया। जांच अधिकारी की लापरवाही इस बात से भी जाहिर होती है कि शव के अंतिम संस्कार के बाद उसकी राख को भी संरक्षित नहीं किया गया। इससे याचिकाकर्ता को अपनी बेटी के अवशेषों को घर ले जाने की सांत्वना से भी वंचित होना पड़ा। इसी वजह से कोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच का भी आदेश दिया है। हालांकि एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही इस मामले में मवाना थाना प्रभारी पूनम जादौन और उप निरीक्षक प्रीति शर्मा की जांच शुरू करा दी थी।


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वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया सुनवाई के दौरान लगी होटल में आग
मूहब्बत की मां के वकील का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कोई यह भी बताया की सुनवाई के दौरान ही 12 सितंबर को अविका का होटल में भीषण आग लग गई थी। मेरठ से दिल्ली रोड स्थित इसी होटल में मुहब्बत की हत्या हुई और सीसीटीवी फुटेज नष्ट किए गए थे।
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