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सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने तब्लीगी जमात और दारुल उलूम पर उठाए सवाल
Tue, 21 Apr 2020 08:49 PM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
Published by: कपिल kapil
Updated Tue, 21 Apr 2020 08:49 PM IST
सार
- तब्लीगी जमात और दारुल उलूम पर उठाए सवाल
- फरहा फैज बोलीं, कोरोना संक्रमण के बीच दोनों की गतिविधियां देश के लिए ठीक नहीं
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अधिवक्ता फरहा फैज
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विस्तार
तीन तलाक मामले के बाद से सुर्खियों में रहीं और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने मंगलवार को मीडिया को जारी पत्र के माध्यम से कोरोना के संक्रमण में तब्लीगी जमात और दारुल उलूम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों की गतिविधियां देश के लिए ठीक नहीं है। उनका कहना है कि मौलाना साद से जुड़ी तब्लीगी जमात दारुल उलूम देवबंद से ही जुड़ी शाखा है।
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फरहा के मुताबिक तीन तलाक के केस के दौरान ही पेश की गई एक रिपोर्ट में दारुल उलूम में छात्रों की संख्या करीब 30 हजार सामने आई थी, लेकिन इस संख्या को लेकर गुमराह किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संस्था की ओर से करीब 2500 छात्रों के होने की जानकारी दी जा रही है। इसलिए बाकी छात्र कहां हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। फरहा फैज ने यह भी कहा कि अन्य मामलों पर फतवे जारी करने वाले संस्थान ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए समय रहते हिदायत क्यों नहीं दी और कोरोना संक्रमण को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार मौलाना साद को सजा दिलाने की सरकार से मांग के मामले में चुप्पी क्यों रखी है। इन सब कारणों से मौजूदा हालात में आम मुस्लिमों की परेशानी बढ़ी है। साथ ही समाज की छवि को नुकसान पहुंचा है।
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कौम को गुमराह और मदरसों को बदनाम करने की कोशिश : उलमा
फरहा फैज के बयान पर पलटवार करते हुए मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि ऐसे लोग और जमात को बदनाम कर रहे हैं। दारुल उलूम ने स्वयं स्वास्थ्य विभाग को बुलाकर छात्रों की जांच कराई और लगातार प्रशासन से संपर्क में हैं। फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि वे फरहा को दावत देते हैं कि वे आएं, कुरान पढ़ें, समझें और इस्लाम क्या है, उसे जानने के बाद बात करें। विवादित बयान देना फरहा की आदत बन गई है।
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