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Meerut News: मानसिक, शारीरिक और सामाजिक कारणों का संयोजन है आत्महत्या
Fri, 14 Feb 2025 12:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Fri, 14 Feb 2025 12:26 AM IST
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बिजनौर। जिले में पिछले डेढ़ माह में ही 25 से ज्यादा आत्महत्याएं हो चुकी है। मेडिकल अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कह रहे हैं कि आत्महत्या करने का निर्णय किसी एक घटना का परिणाम नहीं होता है। यह कई मानसिक, शारीरिक और सामाजिक कारणों का संयोजन है। इसलिए इसके कारणों को समझना पड़ेगा। आत्महत्या की प्रवृत्तियों को पूरी तरह से समाप्त करना कठिन हो सकता है, लेकिन कई सुरक्षा कारक इसे रोकने में मदद कर सकते हैं।
यह हैं आत्महत्या के कारण
1. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं : अवसाद, बाइपोलर डिसऑर्डर, स्किज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियां आत्महत्या के जोखिम को बढ़ाती हैं।
2. अल्कोहल या नशीली दवाओं का सेवन : नशीली दवाओं की लत और अत्यधिक शराब पीना आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ाते हैं।
3. पारिवारिक तनाव : पारिवारिक विवाद, तलाक, घरेलू हिंसा, और बच्चों की उपेक्षा आत्महत्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं।
4. आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां : बेरोजगारी, गरीबी, और समाज में अलगाव की भावना भी आत्महत्या के जोखिम को बढ़ाती है।
5. पिछले आत्महत्या के प्रयास : जो लोग पहले आत्महत्या का प्रयास कर चुके होते हैं, उनमें आत्महत्या का जोखिम अधिक होता है।
6. जीवन में अनसुलझे आघात : यौन शोषण, हिंसा या अन्य गहरे मानसिक आघात का सामना करने वाले लोगों में भी आत्महत्या की प्रवृत्ति देखी जाती है।
इस तरह आत्महत्या रोकथाम में मिलेगी मदद
1.मजबूत पारिवारिक और सामाजिक समर्थन : परिवार और दोस्तों का साथ और सहारा मिलना मानसिक तनाव को कम कर सकता है।
2. मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच : समय पर चिकित्सा और काउंसलिंग से व्यक्ति को सही मार्गदर्शन और मदद मिल सकती है।
3.समस्या-समाधान के कौशल विकसित करना : तनावपूर्ण परिस्थितियों में सही तरीके से समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करने से आत्महत्या के विचारों को रोका जा सकता है।
4. धार्मिक और आध्यात्मिक विश्वास : आध्यात्मिकता और धर्म में रुचि रखने वाले लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति कम देखी जाती है।
5. सकारात्मक सोच और उम्मीद बनाए रखना : मानसिक रूप से सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी समाधान ढूंढ सकते हैं।
समाज को जागरूक बनाने और आत्महत्या की रोकथाम के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। हर जिंदगी कीमती है और एक छोटी सी मदद किसी की जान बचा सकती है। डॉ. नितिन कुमार, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल
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यदि मन उदास है, काम में मन नहीं लग रहा, भूख नहीं लग रही या चिड़चिड़ापन है और वजन घट रहा है और थकान रहती है तो बिना हिचके मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। यदि किसी को आवाजें आ रही हैं या बात-बात पर शक करता है तो भी यह सीवियर डिप्रेशन के लक्षण हैं। समय पर इलाज और काउंसलिंग जान बचा सकती है।
डॉ. प्रीति चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोरोग विभाग, मेडिकल कॉलेज
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यह हैं आत्महत्या के कारण
1. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं : अवसाद, बाइपोलर डिसऑर्डर, स्किज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियां आत्महत्या के जोखिम को बढ़ाती हैं।
2. अल्कोहल या नशीली दवाओं का सेवन : नशीली दवाओं की लत और अत्यधिक शराब पीना आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ाते हैं।
3. पारिवारिक तनाव : पारिवारिक विवाद, तलाक, घरेलू हिंसा, और बच्चों की उपेक्षा आत्महत्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं।
4. आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां : बेरोजगारी, गरीबी, और समाज में अलगाव की भावना भी आत्महत्या के जोखिम को बढ़ाती है।
5. पिछले आत्महत्या के प्रयास : जो लोग पहले आत्महत्या का प्रयास कर चुके होते हैं, उनमें आत्महत्या का जोखिम अधिक होता है।
6. जीवन में अनसुलझे आघात : यौन शोषण, हिंसा या अन्य गहरे मानसिक आघात का सामना करने वाले लोगों में भी आत्महत्या की प्रवृत्ति देखी जाती है।
इस तरह आत्महत्या रोकथाम में मिलेगी मदद
1.मजबूत पारिवारिक और सामाजिक समर्थन : परिवार और दोस्तों का साथ और सहारा मिलना मानसिक तनाव को कम कर सकता है।
2. मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच : समय पर चिकित्सा और काउंसलिंग से व्यक्ति को सही मार्गदर्शन और मदद मिल सकती है।
3.समस्या-समाधान के कौशल विकसित करना : तनावपूर्ण परिस्थितियों में सही तरीके से समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करने से आत्महत्या के विचारों को रोका जा सकता है।
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4. धार्मिक और आध्यात्मिक विश्वास : आध्यात्मिकता और धर्म में रुचि रखने वाले लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति कम देखी जाती है।
5. सकारात्मक सोच और उम्मीद बनाए रखना : मानसिक रूप से सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी समाधान ढूंढ सकते हैं।
समाज को जागरूक बनाने और आत्महत्या की रोकथाम के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। हर जिंदगी कीमती है और एक छोटी सी मदद किसी की जान बचा सकती है। डॉ. नितिन कुमार, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल
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यदि मन उदास है, काम में मन नहीं लग रहा, भूख नहीं लग रही या चिड़चिड़ापन है और वजन घट रहा है और थकान रहती है तो बिना हिचके मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। यदि किसी को आवाजें आ रही हैं या बात-बात पर शक करता है तो भी यह सीवियर डिप्रेशन के लक्षण हैं। समय पर इलाज और काउंसलिंग जान बचा सकती है।
डॉ. प्रीति चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोरोग विभाग, मेडिकल कॉलेज