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विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना गन्ने की फसल का यह रोग, अधिकारी कर रहे किसानों को जागरूक

Fri, 12 Jul 2019 01:46 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 12 Jul 2019 01:46 PM IST
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Sugarcane crops are facing heavy losses from a particular disease in western UP
गन्ने की फसल में लगा पोक्खा बोइंग रोग - फोटो : अमर उजाला

सर्वाधिक उपज और चीनी उत्पादन में प्रदेश का नाम रोशन करने वाला गन्ना इस समय ‘पोक्खा बोइंग’ (एक विशेष फंफूदी) नामक रोग से ग्रसित होने लगा है। गन्ने की फसल में लगा यह रोग गन्ना विभाग और किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। किसान इस रोग को चोटी बेधक रोग मानकर कीटनाशक का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि पोक्खा बोइंग को खत्म करने के लिए फफूंद नाशकों की जरूरत होती है। गन्ना विभाग की तरफ से किसानों को जागरूक करने के साथ इस रोग से निपटने के टिप्स भी दिए जा रहे हैं।

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किसानों की मेहनत और गन्ना विभाग की देखरेख से प्रदेश में इस साल गन्ने की औसत उत्पादकता करीब 79 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हुई है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। ये सब स्वस्थ गन्ने की वजह से हुआ है। लेकिन गन्ने की फसल में लग रहे पोक्खा बोइंग रोग ने किसानों से लेकर गन्ना अधिकारियों तक की नींद उड़ा दी है। वहीं त्रिवेणी ग्रुप शुगर मिल सहारनपुर के जीएम केन डॉ. बीएस तोमर ने बताया कि पोक्खा बोइंग रोग गन्ने की फसल में एक महामारी का रूप ले रहा है। चोटी बेधक रोग और पोक्खा बोइंग रोग के लक्षण करीब-करीब एक जैसे होते हैं। दोनों ही रोगों में पौधे की पत्तियां उलझी हुई दिखाई देती हैं। किसान इस भ्रम में रहकर चोटी बेधक रोग का उपचार कीटनाशकों द्वारा करने लगते हैं।
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ये है पोक्खा बोइंग रोग की पहचान
सर्वप्रथम खेत में पौधों की पत्तियां उलझी हुई दिखाई पड़ती है। पत्तियों पर सिकुड़न जैसे निशान बन जाते हैं। बीच की गोफ पीली होकर रस्सी जैसी दिखाई पड़ती है। बीच की गोफ व साथ वाली पत्तियां जली हुई सी दिखाई पड़ती है। अगोला पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है, जिसे टोप रोट भी कहते हैं।

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रोग को नियंत्रित करने के उपाय
डॉ. बीएस तोमर ने बताया कि प्रथम अवस्था में बावस्टिन 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव से बहुत लाभ मिलता है। द्वितीय अवस्था में कॉपर ऑक्सी क्लोराइड या डाइथेन एम-45 दो ग्राम प्रति लीटर पानी या कार्बडाजिम 0.1 प्रतिशत (1 ग्राम/लीटर पानी) के कम से कम दो छिड़काव करे। अथवा कोनिका 250 ग्राम, मैजिक स्प्रे 700 ग्राम  प्रति एकड़ पर्णीय छिड़काव करे। या कोनिका 250 ग्राम, सुपर मैजिक 3 किलोग्राम, यूरिया 25 किलोग्राम प्रति एकड़ सिंचाई के बाद प्रयोग करना लाभदायक होता है।

कर रहे जागरूक
कुछ क्षेत्रों में गन्ने की फसल में पोक्खा बोइंग रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। गन्ना विभाग के अधिकारी गोष्ठी के माध्यम से किसानों को जागरूक कर रहे हैं और रोग पर नियंत्रण करने की जानकारी भी दे रहे हैं। - राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र

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