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गत वर्ष के मुकाबले कम आ रही चीनी की रिकवरी
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गत वर्ष के मुकाबले कम आ रही चीनी की रिकवरी
बहसूमा। पिछले सत्र के मुकाबले इस बार गन्ने की रिकवरी और फसल उत्पादन पर असर देखने को मिल रहा है। चीनी मिल के आंकडे़ इसकी पुष्टि कर रहे हैं। इस बार रिकवरी कम है। जिसका असर चीनी उत्पादन पर भी पड़ना तय माना जा रह है।
विगत सीजन में चीनी मिलों का पेराई सत्र मई माह चला। किसानों का कहना है कि पेराई सत्र लंबा खिंचने की वजह से इस सीजन में क्षेत्र के गन्ने की फसल को तैयार होने के लिए उचित समय नहीं मिल सका। जिस कारण फसल की उत्पादकता में कमी देखी जा रही है। वहीं, कृषि वैज्ञानिक गन्ने की फसल में कुछ बीमारियों के आने से इसके उत्पादन पर असर मान रहे हैं। इसका असर गन्ना उत्पादन के साथ ही मिलों की शुगर रिकवरी पर दिखाई दे रहा है। टिकौला शुगर मिल के अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष 22 नवंबर के आंकड़ों के अनुसार इस पेराई सत्र में औसत शुगर रिकवरी कम आई है। गत वर्ष 22 नवंबर को रिकवरी 11.15 प्रतिशत थी, जबकि इस सीजन में 22 नंवबर को 10.35 प्रतिशत है। गत वर्ष की तुलना में इस बार चीनी का परता 71 फीसदी कम दर्ज किया गया है।
कृषि वैज्ञानिक मुकेश सिंह का कहना है कि जनवरी से मार्च तक हुई बारिश और पोका बोईंग रेड रॉट और तना छेदक जैसी बीमारी से गन्ने की उत्पादन क्षमता पर इस बार असर पड़ा है। जिससे फसल उत्पादन में कमी दिखाई दे रही है।
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टिकौला शुगर मिल के गन्ना महाप्रबंधक साईम अंसार का कहना है कि गत सीजन में मई माह तक चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई की। उन्होंने कहा कि किसान भी कोरोना काल में गन्ने की उचित देखरेख नहीं कर पाए।
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बहसूमा। पिछले सत्र के मुकाबले इस बार गन्ने की रिकवरी और फसल उत्पादन पर असर देखने को मिल रहा है। चीनी मिल के आंकडे़ इसकी पुष्टि कर रहे हैं। इस बार रिकवरी कम है। जिसका असर चीनी उत्पादन पर भी पड़ना तय माना जा रह है।
विगत सीजन में चीनी मिलों का पेराई सत्र मई माह चला। किसानों का कहना है कि पेराई सत्र लंबा खिंचने की वजह से इस सीजन में क्षेत्र के गन्ने की फसल को तैयार होने के लिए उचित समय नहीं मिल सका। जिस कारण फसल की उत्पादकता में कमी देखी जा रही है। वहीं, कृषि वैज्ञानिक गन्ने की फसल में कुछ बीमारियों के आने से इसके उत्पादन पर असर मान रहे हैं। इसका असर गन्ना उत्पादन के साथ ही मिलों की शुगर रिकवरी पर दिखाई दे रहा है। टिकौला शुगर मिल के अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष 22 नवंबर के आंकड़ों के अनुसार इस पेराई सत्र में औसत शुगर रिकवरी कम आई है। गत वर्ष 22 नवंबर को रिकवरी 11.15 प्रतिशत थी, जबकि इस सीजन में 22 नंवबर को 10.35 प्रतिशत है। गत वर्ष की तुलना में इस बार चीनी का परता 71 फीसदी कम दर्ज किया गया है।
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कृषि वैज्ञानिक मुकेश सिंह का कहना है कि जनवरी से मार्च तक हुई बारिश और पोका बोईंग रेड रॉट और तना छेदक जैसी बीमारी से गन्ने की उत्पादन क्षमता पर इस बार असर पड़ा है। जिससे फसल उत्पादन में कमी दिखाई दे रही है।
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टिकौला शुगर मिल के गन्ना महाप्रबंधक साईम अंसार का कहना है कि गत सीजन में मई माह तक चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई की। उन्होंने कहा कि किसान भी कोरोना काल में गन्ने की उचित देखरेख नहीं कर पाए।