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गीता और ब्रह्मसूत्र का अध्ययन कल्याणकारी : प्रो. रामनाथ झा
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मेरठ। बृहस्पतिवार को मेरठ कॉलेज के डॉ. रामकुमार गुप्ता सभागार में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ व संस्कृत विभाग के द्वारा विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. वाचस्पति मिश्र ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के संस्कृत विभाग के वरिष्ठ प्रो. रामनाथ झा का स्वागत किया। प्रो.झा ने कहा कि गीता और ब्रह्मसूत्र का अध्ययन मानव के लिए कल्याणकारी है।
उनके द्वारा भारतीय दर्शन की वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में उपयोगिता विषय पर अपने विचार व्यक्त किए गए। प्रो. झा ने बताया कि अनेक आधुनिक भौतिक वैज्ञानिकों ने यह माना कि भारत में ज्ञान की एक समृद्ध परंपरा विद्यमान है। अनेक वैज्ञानिकों जैसे जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर, श्रोडिंजर और हाइजनबर्ग आदि ने उपनिषदों का ज्ञान भी प्राप्त किया व उन्होंने यह पाया कि उपनिषदों में जो तथ्य बताए गए हैं वह उनके द्वारा किए गए वैज्ञानिक अनुसंधानो के आधार हैं। आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. अर्चना सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह में प्रो. नीरज कुमार, प्रो. पंजाब मलिक, प्रो. योगेश कुमार, प्रो. संदीप कुमार. डॉ. अशोक कुमार, डॉ. पंकज भारती तथा डॉ. अरविंद कुमार उपस्थित रहे।
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उनके द्वारा भारतीय दर्शन की वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में उपयोगिता विषय पर अपने विचार व्यक्त किए गए। प्रो. झा ने बताया कि अनेक आधुनिक भौतिक वैज्ञानिकों ने यह माना कि भारत में ज्ञान की एक समृद्ध परंपरा विद्यमान है। अनेक वैज्ञानिकों जैसे जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर, श्रोडिंजर और हाइजनबर्ग आदि ने उपनिषदों का ज्ञान भी प्राप्त किया व उन्होंने यह पाया कि उपनिषदों में जो तथ्य बताए गए हैं वह उनके द्वारा किए गए वैज्ञानिक अनुसंधानो के आधार हैं। आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. अर्चना सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह में प्रो. नीरज कुमार, प्रो. पंजाब मलिक, प्रो. योगेश कुमार, प्रो. संदीप कुमार. डॉ. अशोक कुमार, डॉ. पंकज भारती तथा डॉ. अरविंद कुमार उपस्थित रहे।
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