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Meerut News: छात्रों ने मधुमेह के मरीजों के लिए तैयार किया सहजन शुगर फ्री बिस्कुट
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सीसीएसयू ने सहजन से बना शुगर-फ्री बिस्कुट के चैक करते। स्रोत स्वयं
सर छोटू राम इंस्टीट्यूट के कृषि अभियंत्रिकी विभाग के छात्रों ने किया शोध परीक्षण में सफल
औपचारिकता पूरी कर उत्पादन कर बाजार में उतारने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सीसीएसयू परिसर स्थित सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कृषि अभियंत्रिकी विभाग के छात्रों ने मोरिंगा (सहजन) शुगर-फ्री बिस्कुट तैयार किया है। दावा किया है कि यह बिस्कुट मधुमेह और एनीमिया के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी होगा।
विभाग के छात्र शिवांश मिश्रा और उनकी टीम ने लंबे समय तक सहजन के पोषक गुणों और बिस्कुट बनाने के बारे में शोध किया। छात्रों यह प्रोजेक्ट कृषि अभियंत्रिकी विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. क्षितिज कुमार के मार्गदर्शन में पूरा किया गया।
छात्रों ने बताया कि मोरिंगा को दुनिया भर में सुपरफूड माना जाता है। तैयार किए गए बिस्कुट में चीनी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। जिससे यह डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प बन सकता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन-ए और प्रोटीन भरपूर मात्रा मौजूद है, जो शरीर में खून की कमी दूर करने में मददगार होगी। खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंग या हानिकारक एजेंस आदि का प्रयोग नहीं किया है। बृहस्पतिवार को विभाग में परीक्षकों ने इसके स्वाद, सुगंध, बनावट और कुरकुरेपन की जांच की। परीक्षण में बिस्कुट सफल रहा और इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
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संस्थान के अधिकारियों के अनुसार टेस्टिंग प्रक्रिया सफल होने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर उत्पादन की तैयारी की जा रही है। जल्द ही यह मोरिंगा शुगर-फ्री बिस्कुट बाजार में आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि लोग स्वास्थ्यवर्धक खाद्य विकल्प अपना सकें। इसके लिए आवश्यक जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
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औपचारिकता पूरी कर उत्पादन कर बाजार में उतारने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सीसीएसयू परिसर स्थित सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कृषि अभियंत्रिकी विभाग के छात्रों ने मोरिंगा (सहजन) शुगर-फ्री बिस्कुट तैयार किया है। दावा किया है कि यह बिस्कुट मधुमेह और एनीमिया के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी होगा।
विभाग के छात्र शिवांश मिश्रा और उनकी टीम ने लंबे समय तक सहजन के पोषक गुणों और बिस्कुट बनाने के बारे में शोध किया। छात्रों यह प्रोजेक्ट कृषि अभियंत्रिकी विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. क्षितिज कुमार के मार्गदर्शन में पूरा किया गया।
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छात्रों ने बताया कि मोरिंगा को दुनिया भर में सुपरफूड माना जाता है। तैयार किए गए बिस्कुट में चीनी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। जिससे यह डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प बन सकता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन-ए और प्रोटीन भरपूर मात्रा मौजूद है, जो शरीर में खून की कमी दूर करने में मददगार होगी। खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंग या हानिकारक एजेंस आदि का प्रयोग नहीं किया है। बृहस्पतिवार को विभाग में परीक्षकों ने इसके स्वाद, सुगंध, बनावट और कुरकुरेपन की जांच की। परीक्षण में बिस्कुट सफल रहा और इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
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संस्थान के अधिकारियों के अनुसार टेस्टिंग प्रक्रिया सफल होने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर उत्पादन की तैयारी की जा रही है। जल्द ही यह मोरिंगा शुगर-फ्री बिस्कुट बाजार में आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि लोग स्वास्थ्यवर्धक खाद्य विकल्प अपना सकें। इसके लिए आवश्यक जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।