मेरठ में महसूस हुए भूकंप के तेज झटके, घबराकर घरों से बाहर निकले लोग
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उत्तर भारत में शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे आए भूकंप से मेरठ में भी धरती कांप उठी। भूकंप के झटकों से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल गए। भूकंप की कंपन चंडीगढ़, अलीगढ़, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर समेत पाकिस्तान में भी महसूस किए गए।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार 5 मिनट की अवधि में दो भूकंप आए। भूकंप का इसका पहला केंद्र ताजिकिस्तान रहा और दूसरा केंद्र पंजाब का अमृतसर रहा। ताजिकिस्तान में भूकंप की तीव्रता 6.3 रही, जबकि अमृतसर में 6.1 तीव्रता मापी गई। हालाकि अभी तक इस भूकंप से किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं है।
दिल्ली एनसीआर में रात 10 बजकर 35 मिनट के करीब भूकंप के झटके महसूस किए गए। दिल्ली एनसीआर में आए भूकंप से मेरठ में अपने घरों में बैठे लोग सहम गए। जिस समय झटके महसूस किए गए उस समय ज्यादातर लोग अपने घरों में ही थे हैं और ऐसे में झटकों के बाद लोग घर से बाहर निकल आए। भूकंप की तीव्रता 6.1बताई जा रही है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉक्टर यूपी शाही के अनुसार भूकंप का केंद्र तजाकिस्तान रहा जमीन से करीब 80 किलोमीटर नीचे था दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ में भी में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
भूकंप के झटके लगते ही मेरठवासी भी सहम गए। लोग घरों से बाहर निकल आए, जो लोग बाहर नहीं निकले वे अपनी बालकनी में आ गए। आम तौर पर भूकंप के दौरान लोग घरों से बाहर आ जाते हैं।
एक बार के झटके के बाद दोबारा भूकंप के झटके नहीं महसूस किए गए ऐसे में घरों में वापस जाया जा सकता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मेरठ मे 4.2 आसपास बताई गई है। मेरठ के लोगों का कहना है कि झटके काफी तेज थे। दरअसल, यहां लोग आराम से अपने घरों पर थे। आसानी से झटके महसूस किए गए, जो लोग रात मे दफ्तरो मे थे वह भी बाहर आ गए।
मेरठ जोन चार में है शामिल
डा. यूपी शाही के अनुसार भूकंप की दृष्टिकोण से 5 सिस्मिक जोन है। पांचवां जोन सबसे ज्यादा संभावित होता है। उसके बाद 4 आता है। मेरठ भूकंप के सिस्मिक जोन में आता है। इसके अलावा जोन चार में जम्मू कश्मीर का निचला भाग, हिमाचल, दिल्ली व एनसीआर के भाग, उत्तर प्रदेश का उत्तरी भाग, बिहार, बंगाल, व सिक्किम आता है। अगर आगे इससे ज्यादा तेज स्पीड से यह आता है तो ओर भी खतरा हो सकता है।
भूकंप के साथ कोहरे ने भी दिया झटका
शुक्रवार को मौसम अचानक बदल गया। पूरे शहर में कोहरे की चादर ओढ़ ली। आमतौर पर फरवरी के इस महीने में कोहरा देखने को नही मिलता था वह आज देखने को मिला। रात को और भी मौसम में बदलाव आ गया। भूकंप के झटके तो लगे ही साथ ही रात को भयंकर कोहरे की चादर पूरे मेरठ और आसपास के इलाकों में छा गई। कई जगह जीरो विजिबिलिटी हो गई। लोगों को गाड़ी रोक कर रास्ता देखना पड़ा।
भूकंप से निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर असर नहीं
शताब्दीनगर में चल रहे रेपिड रेल निर्माण पर भूकंप का कोई असर नही पड़ा है। रात के समय भी एलएंडटी पिलर बनाने का कार्य करता है लेकिन इंजीनियरों के मुताबिक कार्य करने पर कोई असर नही पड़ा है। हालांकि, आने वाले दिनों में मेरठ में भूमिगत टनल का कार्य शुरू होगा। अगर उस समय भूकंप आएगा तो चिंता की बात होगी।
मेरठ की सीमा में रैपिड रेल, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, एक्सप्रेस-वे का कार्य लगभग पूरा हो गया है। लेकिन मोहिदद्दीनपुर में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिये पिलर स्ट्रक्चर का कार्य किया जा रहा है लेकिन यहां भी कोई नुकसान नही हुआ है। वहीं, शताब्दीनगर में रैपिड रेल के कास्टिंग यार्ड में विभिन्न मशीनें चलाई जा रही है लेकिन कोई नुकसान नही हुआ है।