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Meerut News: महापौर के निरीक्षण में बंद मिले एसटीपी, पांच करोड़ होते हैं खर्च
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मेरठ/गंगानगर। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने सोमवार को पहले दिन ही शहर में लगे एसटीपी (सीवर टीटमेंट प्लांट) का निरीक्षण किया। ये एसटीपी बंद मिले। इस पर महापौर ने कड़ी नाराजगी जताई और शासन से शिकायत की बात कही। यह भी पता चला कि पांच करोड़ सालाना खर्च होने के बावजूद ऐसे हालात हैं।
गंगानगर स्थित रक्षापुरम में लगे एसटीपी को देखने के लिए महापौर टीम के साथ पहुंच गए। यहां एसटीपी बंद हालत में मिला। महापौर ने मेडा के अधिकारियों को फोन किया। मेडा के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार को एसटीपी की हालत दिखाई। इसके बाद मेडा, अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय और जलकल विभाग के अधिकारी अशोक कुमार को लेकर महापौर गंगानगर ब्लॉक-के में पहुंचे। यहां भी एसटीपी बंद मिला। महापौर ने जानकारी ली तो पता चला कि शहर में 13 जगह पर एसटीपी लगे हैं। मेडा इन्हें नगर निगम को हेंडओवर करना चाहता है।
मेडा की ओर से प्रतिवर्ष मेंटीनेंस पर पांच करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके बाद महापौर, मेडा और नगर निगम की टीम ने पल्लवपुरम में दो, कंकरखेड़ा में दो, वेदव्यासपुरी में दो, पल्लवपुरम में दो सहित 11 एसटीपी का निरीक्षण किया। महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि सभी एसटीपी बंद मिले हैं। इनकी हालत बहुत ही खराब है। स्थानीय लोगों से जानकारी मिली कि तीन-चार एसटीपी तो पांच साल से बंद हैं। महापौर ने इस हालात पर नाराजगी जताई।
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निरीक्षण के दौरान एसटीपी के ठेकेदार के साथ-साथ स्थानीय लोगों और पार्षदों से भी जानकारी ली। जिस पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों ने महापौर को बताया कि गंगानगर ब्लॉक-के में 10 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में मशीनें ही खराब थी। कई जगह पर जनरेटर भी जर्जर हालत में मिले। थोड़ी मात्रा में ही सिल्ट जमा मिली। चार प्लांट से कर्मचारी भी नदारद मिले।
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गंगानगर स्थित रक्षापुरम में लगे एसटीपी को देखने के लिए महापौर टीम के साथ पहुंच गए। यहां एसटीपी बंद हालत में मिला। महापौर ने मेडा के अधिकारियों को फोन किया। मेडा के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार को एसटीपी की हालत दिखाई। इसके बाद मेडा, अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय और जलकल विभाग के अधिकारी अशोक कुमार को लेकर महापौर गंगानगर ब्लॉक-के में पहुंचे। यहां भी एसटीपी बंद मिला। महापौर ने जानकारी ली तो पता चला कि शहर में 13 जगह पर एसटीपी लगे हैं। मेडा इन्हें नगर निगम को हेंडओवर करना चाहता है।
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मेडा की ओर से प्रतिवर्ष मेंटीनेंस पर पांच करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके बाद महापौर, मेडा और नगर निगम की टीम ने पल्लवपुरम में दो, कंकरखेड़ा में दो, वेदव्यासपुरी में दो, पल्लवपुरम में दो सहित 11 एसटीपी का निरीक्षण किया। महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि सभी एसटीपी बंद मिले हैं। इनकी हालत बहुत ही खराब है। स्थानीय लोगों से जानकारी मिली कि तीन-चार एसटीपी तो पांच साल से बंद हैं। महापौर ने इस हालात पर नाराजगी जताई।
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निरीक्षण के दौरान एसटीपी के ठेकेदार के साथ-साथ स्थानीय लोगों और पार्षदों से भी जानकारी ली। जिस पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों ने महापौर को बताया कि गंगानगर ब्लॉक-के में 10 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में मशीनें ही खराब थी। कई जगह पर जनरेटर भी जर्जर हालत में मिले। थोड़ी मात्रा में ही सिल्ट जमा मिली। चार प्लांट से कर्मचारी भी नदारद मिले।