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नगर निगम कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे सवाल

Wed, 09 Dec 2020 02:29 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2020 02:29 AM IST
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Standing questions on municipal functioning
नगर निगम कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे सवाल
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मेरठ। भगत सिंह मार्केट में नगर निगम और पुलिस ने टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ जहां निगम ने दुकानदारों के अतिक्रमण पर ध्यान नहीं दिया तो दूसरी तरफ पुलिस की सांठगांठ से बाजार में सड़क ही व्यापार के लिए बिकती रही। आज हालात ये हैं कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने में भी निगम और पुलिस के पसीने छूट रहे हैं।
भगत सिंह मार्केट में कुल 400 दुकानें हैं, जिसमें 190 नगर निगम की हैं। नगर निगम इन दुकान मालिकों से सांठगांठ कर कम किराया वसूलता है, जबकि दुकान के मालिक इन्हीं दुकानों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करते हुए मात्र 100 रुपये के स्टांप पर लाखों रुपये में दूसरे दुकानदार को दे जाते हैं। सांठगांठ के खेल में नगर निगम पहले चुप्पी साध लेता है और फिर धीरे से किरायेदारी बदल देता है। दुकानदारों ने अपनी दुकानों के क्षेत्रफल से आगे जाकर भी अतिक्रमण कर लिया है। जिस कारण भगत सिंह मार्केट का मार्ग संकीर्ण हो गया है, लेकिन कभी भी नगर निगम या पुलिस ने इन दुकानदारों को उनका सामान दुकान के भीतर ही सीमित रखने की कार्रवाई नहीं की। जिसका परिणाम ये हुआ कि अब ठेले वाले भी इस मार्केट में आ खड़े हुए। जिस दुकान के बाहर ठेले वाले सुबह से शाम तक स्थायी रूप से खड़े होते हैं, वहां का दुकानदार भी इनसे किराया वसूलता है। निगम की सड़क पर दुकानदार यहां वसूली कर रहा है। इसके बाद पुलिस भी यहां आकर वसूली कर चुप्पी साधकर निकल जाती है। अब तो यहां पर दलाल सक्रिय हो गए हैं, जो पुलिस तक इन ठेले वालों से वसूली कर पैसा पहुंचा देते हैं।
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लगातार बढ़ते इस अतिक्रमण के खिलाफ शिकायतें हुई, लेकिन नगर निगम, प्रशासन या पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया। जिसका परिणाम ये हुआ कि मामला हाईकोर्ट पहुंचा और वहां से इस अतिक्रमण को हटाने का आदेश जारी हो गया। अब नगर निगम और पुलिस दोनों के पसीने छूट रहे हैं।
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प्रर्वतन दल पर बेवजह खर्च किया जा रहा पैसा
नगर निगम ने दो साल पहले सेवानिवृत्त सेना अधिकारी के नेतृत्व में प्रवर्तन दल नियुक्त किया था। इसमें दो सेवानिवृत्त कर्नल और 42 जवान हैं। इनको प्रतिमाह 9.80 लाख रुपये वेतन दिया जाता है, लेकिन सिर्फ पॉलिथीन मुक्त अभियान आदि में ही इनका उपयोग होता नजर आता है।

वीडियोग्राफी कराने को हटा रहे अतिक्रमण
हाईकोर्ट में एसएसपी और डीएम को भी व्यक्तिगत रूप से शपत्र पत्र दाखिल करना है। पूरे माहौल को देखते हुए एडीजी राजीव सभरवाल तो दो दिन पूर्व निरीक्षण कर गए, लेकिन जिलाधिकारी ने अभी तक सुध नहीं ली है। वहीं पुलिस ने कल से नया खेल शुरू कर दिया है। अस्थाई अतिक्रमण करने वालों को हटाकर वीडियोग्राफी कराई जा रही है। शिकायतकर्ता ने भी इसके प्रतिपक्ष में अपनी तरफ से पुलिस की वीडियोग्राफी के बाद अपनी वीडियोग्राफी शुरू करा दी है।
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