स्टांप घोटाला मामला: बिल्डर चिह्नित, गिरफ्तारी की तलवार लटकी, भाजपा नेता डीएम से लगा रहे सिफारिश
सात करोड़ 31 लाख 54 हजार रुपए के स्टांप घोटाले के मामले में कई बिल्डर्स पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी है। वहीं नामजद आरोपियों की सिफारिश में भाजपा नेता डीएम से मुलाकात करने पहुंचे।पर्व एसोसिएट्स अतुल गुप्ता की, वेद और वासु एसोसिएट्स के मालिक संजीव गुप्ता को बचाने की जुगत लगाई जा रही है।
विस्तार
सात करोड़ 31 लाख 54 हजार रुपए के स्टांप घोटाले में नामजद पर्व, वेद और वासु एसोसिएट्स के बिल्डरों को पुलिस ने चिह्नित कर लिया है। पर्व एसोसिएट्स के अतुल गुप्ता निवासी तेजपाल एंकलेव, दिल्ली रोड, वेद व वासु एसोसिएट्स के मालिक संजीव गुप्ता निवासी कमलानगर, बागपत रोड हैं। इनकी गिरफ्तारी करने की तैयारी में पुलिस-प्रशासन लग गया है।
इससे पहले पुलिस दबिश शुरु करती कि बिल्डरों की सिफारिश में भाजपा नेता डीएम से मुलाकात करने पहुंच गए। कोषागार के हस्ताक्षर और मुहर लगे फर्जी स्टांप से रजिस्ट्री का बड़ा खेल कचहरी में चल रहा था।
मेरठ के छह रजिस्ट्रार की जांच रिपोर्ट में तीन साल में 997 फर्जी स्टांप लगाकर रजिस्ट्री होना पाया गया। इसमें सात करोड़ 31 लाख 45 हजार की राजस्व को हानि पहुंची है। जांच रिपोर्ट के बाद पर्व, वेद और वासु एसोसिएट्स आदि के खिलाफ गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज हो गया है।
रजिस्ट्रार की जांच के आधार पर पुलिस की विवेचना में पर्व एसोसिएट्स अतुल गुप्ता, वेद और वासु एसोसिएट्स संजीव कुमार गुप्ता के नाम है। उनको गिरफ्तारी करने की तैयारी शुरु कर दी। कानूनी लिखापढ़ी के बाद पुलिस-प्रशासन द्वारा आगे की कार्रवाई सुनिश्चित होगी। बताया गया कि दोनों बिल्डर बागपत रोड पर कॉलोनी काटते हैं। इस संबंध में बिल्डर अतुल गुप्ता से अमर उजाला के रिपोर्टर ने फोन पर बात की। उन्होंने जल्द ही अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही।
एक अधिवक्ता के नाम से बिके स्टांप
रजिस्ट्रारों की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि फर्जी स्टांप का बड़ा गिरोह है। एक ही अधिवक्ता के नाम से यह स्टांप जारी हुआ है। रजिस्ट्री में अधिवक्ता के हस्ताक्षर व मुहर हैं। इसके बावजूद एफआईआर में अधिवक्ता का नाम अभी उजागर नहीं किया है। उक्त अधिवक्ता के साथ फर्जी स्टांप में कौन-कौन शामिल है, इसकी तफ्तीश शुरु हो गई। जांच में बिल्डरों ने उक्त अधिवक्ता से ही स्टांप लिए हैं। कितने प्रतिशत की छूट से स्टांप लिया है। इसकी जांच भी शुरु हो गई है।
कोषागार की भूमिका भी संदिग्ध
स्टांप नागपुर से आते हैं। मेरठ मंडल से गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, शामली सहित कई जनपदों के कोषागार में स्टांप भेजे जाते हैं। फर्जी स्टांप के सीरियल नंबर से जानकारी मिली है कि 2012 में मेरठ कोषागार से उक्त स्टांप गाजियाबाद कोषागार में भेजे थे।
जांच अधिकारियों के मुताबिक मेरठ कोषागार ने 2012 में उक्त सीरियल नंबर के स्टांप गाजियाबाद को देना बता दिए। गाजियाबाद कोषागार ने 2013 में उक्त स्टांप से रजिस्ट्री होना बताया। सवाल उठता कि उक्त सीरियल नंबर के स्टांप 2023 में मेरठ कैसे पहुंचे, जिन पर मेरठ कोषागार की मुहर और हस्ताक्षर थे। कोषागार की भूमिका भी संदिग्ध है।
बिल्डरों को वसूली का नोटिस भेजा
एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी ने बताया कि रजिस्ट्री कार्यालय से दोनों बिल्डरों व अन्य को राजस्व वसूली का नोटिस भेजा गया है। रजिस्ट्री की तारीख से राजस्व 18 प्रतिशत ब्याज सहित वसूला जाएगा। जुर्माना अलग से लगेगी। अपराध हुआ है, इसकी जांच थाना पुलिस कर रही है। मामला गंभीर है, इसकी जांच ईओडब्ल्यू से कराई जा सकती है। वसूली के लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
पर्व, वेद, वासु एसोसिएट्स आदि स्टांप घोटाले में नामजद हुए हैं। आरोपियों को राजस्व वसूली के लिए नोटिस भेजें जा रहे हैं। इस घोटाले में तीन एसोसिएट्स के अलावा अन्य लोग भी हैं। उनको भी नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही है। कानूनी कार्रवाई चल रही है। -दीपक मीणा, जिलाधिकारी।