{"_id":"5dacf7f18ebc3e0181673c1f","slug":"stairway-and-fragmented-terraces-found-in-the-ancient-pagoda-of-sinauli","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बागपत: सिनौली के प्राचीन शिवालय में मिला सीढ़ीदार रास्ता और खंडित मृणमूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बागपत: सिनौली के प्राचीन शिवालय में मिला सीढ़ीदार रास्ता और खंडित मृणमूर्ति
Mon, 21 Oct 2019 05:42 AM IST
Mohit Mudgal
रामटेक शर्मा/ मुकेश पंवार, अमर उजाला, मेरठ
रामटेक शर्मा/ मुकेश पंवार, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Mohit Mudgal
Updated Mon, 21 Oct 2019 05:42 AM IST
विज्ञापन
खुदाई के दौरान मिला सीढ़ीदार रास्ता और खंडित मृणमूर्ति।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच हजार साल का इतिहास अपने गर्भ में समेटने वाली हड़प्पा कालीन सिनौली साइट ने एक बार फिर प्राचीन इतिहास उगला है। गांव के बीच में स्थित अति प्राचीन शिवालय की मरम्मत के लिए की गई खोदाई में प्राचीन चौड़ी ईंटों से निर्मित सीढ़ीदार रास्ता और एक खंडित मृणमूर्ति मिली है।
मंदिर के पुजारी यशवीर ने बताया कि गांव के लगभग बीच में मान पट्टी स्थित शिवालय हजारों साल पुराना है। बताया जाता है कि यहां से शिवलिंग निकलने के बाद ग्रामीणों ने मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर की बड़ी मान्यता है। पिछले हफ्ते ग्रामीणों के सहयोग से इस मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया गया था। मंदिर परिसर में प्रारंभिक खोदाई के दौरान सीढ़ियां दिखाई दीं।
ग्रामीणों ने सीढ़ियों को आगे तक साफ किया तो दीवार दिखी। अनुमान लगाया जा रहा है कि बेसमेंट में कोई हॉलनुमा कमरा हो सकता है, जहां तक ये सीढ़ियां पहुंचती होंगी। फिलहाल ग्रामीणों ने खोदाई रोक दी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान नई दिल्ली के अधिकारियों को सूचना दे दी है। एएसआई के निदेशक डॉ. संजय मंजुल का कहना है कि जल्द ही टीम के साथ गांव आकर जांच शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिर के पुजारी यशवीर ने बताया कि गांव के लगभग बीच में मान पट्टी स्थित शिवालय हजारों साल पुराना है। बताया जाता है कि यहां से शिवलिंग निकलने के बाद ग्रामीणों ने मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर की बड़ी मान्यता है। पिछले हफ्ते ग्रामीणों के सहयोग से इस मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया गया था। मंदिर परिसर में प्रारंभिक खोदाई के दौरान सीढ़ियां दिखाई दीं।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने सीढ़ियों को आगे तक साफ किया तो दीवार दिखी। अनुमान लगाया जा रहा है कि बेसमेंट में कोई हॉलनुमा कमरा हो सकता है, जहां तक ये सीढ़ियां पहुंचती होंगी। फिलहाल ग्रामीणों ने खोदाई रोक दी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान नई दिल्ली के अधिकारियों को सूचना दे दी है। एएसआई के निदेशक डॉ. संजय मंजुल का कहना है कि जल्द ही टीम के साथ गांव आकर जांच शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
सिनौली की माटी में दफन है 5000 साल पुराना इतिहास
आयताकार हैं सीढ़ियों की ईंटें
ग्रामीण ब्रजपाल, विपिन पूनिया और मुखिया प्रधान कहना है कि सीढ़ियां प्राचीन बेहद चौड़ी आयताकार ईंटों से बनाई गई हैं, जो सिनौली साइट के उत्खनन के दौरान मिल चुकी ईंटों से मेल खाती हैं। सीढ़ियों के दोनों तरफ की बाउंड्री बेहद कलात्मक ढंग से सजाई गई है, जिस पर चूने से लिपाई कर नक्काशी की गई है। लाल मिट्टी से बनी खंडित मृण मूर्ति भी मिली है। मूर्ति की आंख व कान के उभारों को चूने से सजाया गया है। ग्रामीण इसे देवता की मूर्ति बता रहे हैं।
तरह-तरह की चर्चाएं
उत्खनन स्थल से महज 500 मीटर दूर सीढ़ियां मिलने से चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हो सकता है कि यहां प्राचीन काल में कोई मंदिर रहा हो। ग्राम प्रधान पति योगेन्द्र का कहना है कि यहां पूरी सावधानी से खोदाई होना चाहिए।
बागपत जनपद का महाभारतकालीन सादिकपुर सिनौली गांव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संस्थान द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। एएसआई आगरा सर्किल ने सादिकपुर को राष्ट्रीय महत्व का पुरातत्वीय स्थल घोषित करने की प्रारंभिक अधिसूचना भी जारी कर रखी है।
ग्रामीण ब्रजपाल, विपिन पूनिया और मुखिया प्रधान कहना है कि सीढ़ियां प्राचीन बेहद चौड़ी आयताकार ईंटों से बनाई गई हैं, जो सिनौली साइट के उत्खनन के दौरान मिल चुकी ईंटों से मेल खाती हैं। सीढ़ियों के दोनों तरफ की बाउंड्री बेहद कलात्मक ढंग से सजाई गई है, जिस पर चूने से लिपाई कर नक्काशी की गई है। लाल मिट्टी से बनी खंडित मृण मूर्ति भी मिली है। मूर्ति की आंख व कान के उभारों को चूने से सजाया गया है। ग्रामीण इसे देवता की मूर्ति बता रहे हैं।
तरह-तरह की चर्चाएं
उत्खनन स्थल से महज 500 मीटर दूर सीढ़ियां मिलने से चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हो सकता है कि यहां प्राचीन काल में कोई मंदिर रहा हो। ग्राम प्रधान पति योगेन्द्र का कहना है कि यहां पूरी सावधानी से खोदाई होना चाहिए।
बागपत जनपद का महाभारतकालीन सादिकपुर सिनौली गांव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संस्थान द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। एएसआई आगरा सर्किल ने सादिकपुर को राष्ट्रीय महत्व का पुरातत्वीय स्थल घोषित करने की प्रारंभिक अधिसूचना भी जारी कर रखी है।
सादिकपुर, सिनौली में एएसआई तीन चरणों में उत्खनन कर चुकी है। यहां से मिले पुरा अवशेषों में मानव बस्ती के प्रमाण, ईंटों की दीवार, महिला का कंकाल, जिसके कानों से सोने के आभूषण थे, शाही ताबूत, मिट्टी की भट्ठी, धनुष, मृद भांड और तांबे की तलवार आदि मिल चुके हैं। एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार 17 जून 2019 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर चुके हैं, जिस पर आपत्तियां मांगी जा रही हैं। सिनौली गांव को आगरा सर्किल का 267वां संरक्षित स्मारक बनाने की तैयारी है।
2005 में शुरू हुआ था उत्खनन
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान ने 2005 में सिनौली गांव में प्रथम चरण की खोदाई शुरू कराई थी। यहां शवाधान केंद्र से एकसाथ 116 शव मिले थे। इसके बाद 15 फरवरी 2018 को यहां एएसआई की महानिदेशक डॉ. ऊषा शर्मा के निर्देश पर पुरातत्वविद डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में दूसरे और तीसरे चरण की खोदाई हुई। महज ढाई फीट नीचे से 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता के कुछ अवशेष मिले।
इनमें सैन्य ताबूत, अश्व चालित साढ़े तीन फीट के रथ और 2.5 फीट की तलवार शामिल हैं। सभी में तांबे का बड़े पैमाने पर प्रयोग हुआ है। ताबूत पर आठ योद्धाओं की उकेरी गईं आकृतियां तांबे से बनी हैं। इन सभी को एएसआई के दिल्ली स्थित म्यूजियम में रखा गया है।
अब तक मिले पुरा अवशेष
सिनोली साइट से रथ और ताबूत के साथ दफन दो योद्धा, उनकी तलवारें, ढाल, मुकुट, सोने और बहुमूल्य पत्थरों के मनके, कवच और पास में ही पांच अन्य लोगों के शव मिले थे। एक श्वान का भी अवशेष प्राप्त हुआ था। वहीं दाल व अन्य अनाज के दाने, चूड़ियां, कंघा, दर्पण, कटोब, मृद भांड और कई रोजमर्रा की चीजें भी मिल चुकी हैं।
2005 में शुरू हुआ था उत्खनन
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान ने 2005 में सिनौली गांव में प्रथम चरण की खोदाई शुरू कराई थी। यहां शवाधान केंद्र से एकसाथ 116 शव मिले थे। इसके बाद 15 फरवरी 2018 को यहां एएसआई की महानिदेशक डॉ. ऊषा शर्मा के निर्देश पर पुरातत्वविद डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में दूसरे और तीसरे चरण की खोदाई हुई। महज ढाई फीट नीचे से 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता के कुछ अवशेष मिले।
इनमें सैन्य ताबूत, अश्व चालित साढ़े तीन फीट के रथ और 2.5 फीट की तलवार शामिल हैं। सभी में तांबे का बड़े पैमाने पर प्रयोग हुआ है। ताबूत पर आठ योद्धाओं की उकेरी गईं आकृतियां तांबे से बनी हैं। इन सभी को एएसआई के दिल्ली स्थित म्यूजियम में रखा गया है।
अब तक मिले पुरा अवशेष
सिनोली साइट से रथ और ताबूत के साथ दफन दो योद्धा, उनकी तलवारें, ढाल, मुकुट, सोने और बहुमूल्य पत्थरों के मनके, कवच और पास में ही पांच अन्य लोगों के शव मिले थे। एक श्वान का भी अवशेष प्राप्त हुआ था। वहीं दाल व अन्य अनाज के दाने, चूड़ियां, कंघा, दर्पण, कटोब, मृद भांड और कई रोजमर्रा की चीजें भी मिल चुकी हैं।