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धर्म का बोध कराती है श्रीमद्भागवत गीता : स्वामी अनंतानंद
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- दशावतार भगवान परशुराम मंदिर में महामंडलेश्वर ने किए प्रवचन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गढ़ रोड स्थित दशावतार भगवान परशुराम मंदिर में गीता ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तीसरे दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती महाराज ने श्रीमद्भावगत गीता पर तात्विक प्रवचन सुनाए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता धर्म का बोध कराती है। प्रत्येक हिंदू के घर में वेद, उपनिषद, गीता, पुराण, रामायण एवं महाभारत अवश्य होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में परंपरा है कि जहां देवालय होते थे, वहां विद्यालय भी होने चाहिए। देवताओं के हाथ में शास्त्र भी होते हैं और शस्त्र भी होते हैं। गीता का मुख्य विषय ब्रह्म विद्या, पात्रता अंतःकरण की निर्मलता और प्रयोजन आत्मस्वरूप की प्राप्ति है।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान केवल वासनाहीन साधक का ही वरण करते हैं। सत्य का बोध होते हुए भी उसकी उपेक्षा करना मानसिक कृपणता है। कर्मयोग की साधना में परिपक्वता के बिना भक्तियोग में प्रवेश नहीं होता। भगवान कल्पवृक्ष पारिजात के समान हैं। जो भक्त जिस भाव से शरणागत होता है, उसे उसी भाव में फल मिलता है।
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व्यास पूजन गिरीश त्यागी, श्रीजी त्यागी और श्रवण शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. हरिश्चंद्र शर्मा, सच्चिदानंद शर्मा, सुभाष शर्मा, कन्हैया शर्मा, सुशील बंसल, राजकुमार एडवोकेट, विघ्नेश शर्मा, डॉ. निर्मला शर्मा, मिथलेश शर्मा रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गढ़ रोड स्थित दशावतार भगवान परशुराम मंदिर में गीता ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तीसरे दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती महाराज ने श्रीमद्भावगत गीता पर तात्विक प्रवचन सुनाए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता धर्म का बोध कराती है। प्रत्येक हिंदू के घर में वेद, उपनिषद, गीता, पुराण, रामायण एवं महाभारत अवश्य होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में परंपरा है कि जहां देवालय होते थे, वहां विद्यालय भी होने चाहिए। देवताओं के हाथ में शास्त्र भी होते हैं और शस्त्र भी होते हैं। गीता का मुख्य विषय ब्रह्म विद्या, पात्रता अंतःकरण की निर्मलता और प्रयोजन आत्मस्वरूप की प्राप्ति है।
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कथा व्यास ने कहा कि भगवान केवल वासनाहीन साधक का ही वरण करते हैं। सत्य का बोध होते हुए भी उसकी उपेक्षा करना मानसिक कृपणता है। कर्मयोग की साधना में परिपक्वता के बिना भक्तियोग में प्रवेश नहीं होता। भगवान कल्पवृक्ष पारिजात के समान हैं। जो भक्त जिस भाव से शरणागत होता है, उसे उसी भाव में फल मिलता है।
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व्यास पूजन गिरीश त्यागी, श्रीजी त्यागी और श्रवण शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. हरिश्चंद्र शर्मा, सच्चिदानंद शर्मा, सुभाष शर्मा, कन्हैया शर्मा, सुशील बंसल, राजकुमार एडवोकेट, विघ्नेश शर्मा, डॉ. निर्मला शर्मा, मिथलेश शर्मा रहे।