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श्रद्धा और भक्ति से मिलती है आत्मिक शांति : भावभूषण
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 18वें दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य मंदिर में भगवान के अभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने विधान स्थल पर भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा का विधिविधान से अभिषेक और पूजन किया।
श्री शांतिनाथ विधान के दौरान क्षेत्र पर विराजमान मुनि भावभूषण महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्मोपदेश देते हुए कहा कि जिनेंद्र भगवान के अनंत गुणों का वर्णन बड़े-बड़े विद्वान भी पूर्ण रूप से नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि भगवान के गुणों का स्मरण, स्तुति और आराधना मनुष्य के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। महाराज ने कहा कि जिस प्रकार प्रलयकाल में मगरमच्छों से भरे विशाल समुद्र को कोई व्यक्ति अपनी भुजाओं के बल पर पार नहीं कर सकता, उसी प्रकार जिनेंद्र भगवान की महिमा का पूर्ण वर्णन करना भी संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव से पूजन, विधान, जाप और आराधना करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा मन को शांति प्राप्त होती है।
श्री दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से पात्रों का सम्मान किया गया। विधान की मांगलिक क्रियाएं युवा विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुईं। सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रश्नमंच और धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन भी किया गया। संचालन में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 18वें दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य मंदिर में भगवान के अभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने विधान स्थल पर भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा का विधिविधान से अभिषेक और पूजन किया।
श्री शांतिनाथ विधान के दौरान क्षेत्र पर विराजमान मुनि भावभूषण महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्मोपदेश देते हुए कहा कि जिनेंद्र भगवान के अनंत गुणों का वर्णन बड़े-बड़े विद्वान भी पूर्ण रूप से नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि भगवान के गुणों का स्मरण, स्तुति और आराधना मनुष्य के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। महाराज ने कहा कि जिस प्रकार प्रलयकाल में मगरमच्छों से भरे विशाल समुद्र को कोई व्यक्ति अपनी भुजाओं के बल पर पार नहीं कर सकता, उसी प्रकार जिनेंद्र भगवान की महिमा का पूर्ण वर्णन करना भी संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव से पूजन, विधान, जाप और आराधना करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा मन को शांति प्राप्त होती है।
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श्री दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से पात्रों का सम्मान किया गया। विधान की मांगलिक क्रियाएं युवा विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुईं। सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रश्नमंच और धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन भी किया गया। संचालन में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का सहयोग रहा।
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