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इस वर्ष एक बार ही होगा सोमवती अमावस्या का पूजन, ये चीजें दान करने से घर में आती है खुशहाली

Tue, 06 Apr 2021 04:20 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 06 Apr 2021 04:20 PM IST
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Somavati Amavasya will be worshiped once this year
सोमवती अमावस्या - फोटो : ani

इस संवत्सर में सोमवती अमावस्या एक बार ही पड़ेगी। यह अगले सप्ताह 12 अप्रैल को होगी। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। इस दिन दान करने से व्यक्ति के घर में सुख शांति और खुशहाली आती है। पितृ देव भी संतुष्ट होते हैं।

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सोमवती अमावस्या के दिन स्नान-दान करने की परंपरा है। यदि गंगा स्नान न हो सके तो किसी भी नदी में स्नान कर शिव-पार्वती और तुलसी जी की पूजा करनी चाहिए। सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। विवाहित महिलाएं पीपल के दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा करती हैं।
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शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या मोक्षदायिनी भी है। पितृ दोष हो, संतानहीन योग हो या फिर अन्य नवग्रह दोष हो तो ऐेसे लोगों को इस दिन उपवास अवश्य रखना चाहिए।

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विष्णु पुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अमावस्या का उपवास रखने से पितृगण के साथ ही ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षी और समस्त भूत प्राणी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं। गंगा स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वहीं, कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो तो उसे बलवान करने के लिए कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक करें।

सोमवती अमावस्या पर ऐसा करें
- सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठें।
- नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- एक स्टील के लोटे में कच्चा दूध जल पुष्प अक्षत, काले तिल और गंगाजल मिलाकर पीपल की जड़ में दाएं हाथ से दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके अर्पण करें।
- सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करें
- अपने मन की इच्छा बोलते हुए सफेद मिष्ठान्न पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पण करें

सोमवती अमावस्या का समय
अमावस्या आरंभ:
रविवार 11 अप्रैल को सूर्योदय पश्चात प्रात: 6:04 बजे से
अमावस्या समाप्त: सोमवार 12 अप्रैल को प्रात: 8:01 बजे।

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