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अभिनंदन की रिहाई पर छलका जांबाज सैनिक का दर्द, ऐसे किया था 12 आतंकियों को ढेर

Sat, 02 Mar 2019 06:05 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 02 Mar 2019 06:05 PM IST
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Soldier Rajkumar expressed happiness over release of Abhinandan and he had killed 12 terrorists
लांस नायक राजकुमार - फोटो : अमर उजाला

वीर सैनिकों ने कश्मीर में दुश्मन पाकिस्तान के भेजे आतंकियों के खिलाफ जान की बाजी लगा कर शौर्य गाथा लिखी है। लांस नायक राजकुमार का अदम्य साहस वीरता की मिसाल है। कश्मीर में 12 आतंकियों को ढेर करने में वह लहूलुहान हो गए थे। दहशतगर्दों से लड़ते हुए उनका मुंह गोलियों से छलनी हो गया था। मगर, सेना की सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ।

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मुजफ्फरनगर में सिसौली क्षेत्र के गांव भौराकलां के किसान स्वर्गीय बीरसेन का बेटा राजकुमार दो अक्तूबर 1992 को 7 जाट रेजिमेंट, बरेली में भर्ती हुआ था। उनकी बटालियन तीन साल की स्थायी पोस्टिंग के लिए कश्मीर में तैनात की गई। वर्ष 2002 के दो अक्तूबर में कश्मीर के राजौरी में एलओसी के पास मंदेर सेक्टर में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली। कैप्टन दिलीप झा के साथ लांस नायक राजकुमार समेत उनकी टुकड़ी में 14 सैनिक थे। रात का वक्त था। घड़ी की सुईयों में 8.15 बज चुके थे। अचानक आतंकियों से आमना-सामना हो गया। साहसी सैनिकों ने आठ आतंकी मौके पर ही मार दिए। चार आतंकी बच कर भाग निकले। कैप्टन झा और राजकुमार उनका पीछा करते हुए आगे बढ़े और आतंकियों को घेर कर ढेर कर दिया। आतंकियों के हमले में लांस नायक का मुंह गोलियों से छलनी हो गया। बिहार प्रांत के कैप्टन दिलीप झा शहीद हो गए। लहूलुहान राजकुमार को सेना ने उधमपुर कमांड हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जहां उनके आठ ऑपरेशन हुए। उनका जबड़ा खत्म हो चुका था। बाद में उन्हें दिल्ली के आरआर हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। आर्मी के डॉक्टरों ने राजकुमार के पांच ऑपरेशन और किए। आठ साल तक चली शल्य चिकित्सा के बाद भी उन्होंने अपना हौसला नहीं डिगने दिया। अदम्य साहस के लिए 15 अगस्त 2003 को राष्ट्रपति ने उन्हें सेना पदक से नवाजा। वर्ष 2016 में वह हवलदार एसीपी के पद से सेवानिवृत्त हुए। विंग कमांडर अभिनंदन की पाक से रिहाई पर हर्ष जताते हुए पूर्व सैनिक राजकुमार कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अपनी बटालियन की बहादुरी की गौरव गाथा नहीं भूले है।

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पति बने साहस की मिसाल: अंजू 
पूर्व सैनिक राजकुमार गांव में खेती-किसानी करते है। मां भंवरकली को अपने बेटे की वीरता पर नाज है। उनकी पत्नी अंजू देवी कहती हैं कि कश्मीर में आतंकी हमले में घायल होने के बाद उनके बचने की उम्मीदें नहीं थी। सैनिक का साहस कैसा होता है, यह 13 ऑपरेशन करा कर उन्होंने साबित किया। बेटी काजल और बेटा आकाश को फख्र है कि उनके पिता ने देश की सेवा में जान की बाजी लगाई।

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