मुजफ्फरनगर-शामली के जांबाजों से थर्रा गई थी पाकिस्तानी सेना, 12 सैनिक हुए थे शहीद
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देश के इतिहास में 16 दिसंबर 1971 का दिन विशेष गौरव के रूप में अंकित है। इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को न केवल लंबे युद्ध में पराजित किया, बल्कि पाकिस्तानी सेना के जरनल नियाजी को उस समय के पूर्वी पाकिस्तान के शहर ढाका में करीब 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने घुटने टेकने के लिए भी मजबूर कर दिया था। इसी दिन विश्व पटल पर बांग्लादेश के रूप में एक नए देश का भी उदय हुआ।
शहीदों की याद में वर्ष 1972 में शहर के नुमाइश मैदान में शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया था, जिसका अनावरण तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने स्वयं मुजफ्फरनगर आकर किया था। इस स्मारक पर पाकिस्तान की जंग में शहीद हुए जनपद मुजफ्फरनगर और शामली के सभी 12 शहीदों के नाम अंकित हैं, जिन्हें दोनों जनपदों के नागरिक विजय दिवस पर अश्रूपुर्ण नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
हर साल आयोजित होते हैं कार्यक्रम
पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक विजय की याद में शहीद स्मारक पर प्रतिवर्ष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। रविवार को भी जिले के अधिकारियों ने स्मारक पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। जनपद के शहीदों में शामिल 12 जवानों में शामिल शामली जनपद के कस्बा कांधला के गांव जसाला निवासी कैप्टन मदनपाल को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
वहीं, शहर की गांधी कॉलोनी निवासी लेफ्टिनेंट राजकुमार, गांव कूकड़ा के लांस नायक धर्मपाल सिंह, बरला निवासी लांस नायक राधेश्याम, बामनहेड़ी निवासी लांस नायक खचेड़ सिंह, डांगरोल के सिपाही हरपाल सिंह, गांव नाला निवासी सिपाही चरण सिंह, शामली के बुटराड़ी के हवलदार जगदीश प्रसाद, कुरमाली गांव के नायक जयपाल सिंह, कांधला के रिछपाल सिंह, बरवाला के सुरेंद्र पाल सिंह व गांव गोयला निवासी जयपाल सिंह ने इस युद्ध में लड़ते हुए शहादत दी थी। आज भी बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक मुजफ्फरनगर में हैं जो भारत-पाकिस्तान के उस युद्ध में अपनी वीरता से दुश्मन को थर्रा चुके हैं।