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...तो इसलिए देवबंद आ सकते है प्रधानमंत्री मोदी, जमीयत उलेमा-ए हिंद ने दिया न्यौता

Fri, 12 May 2017 08:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Fri, 12 May 2017 08:09 PM IST
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... so that Deoband can come, Prime Minister Modi, Jamiat Ulema-e-Hind gave the invitation
देवबंद आ सकते है पीए मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किरदार और शख्सियत का ही कमाल है कि मुस्लिम समाज के विकास के लिए काम करने वाले जमीयत उलेमा-ए हिंद ने उन्हें देवबंद आने का न्यौता दिया है। हालांकि जमीयत के इस न्यौते ने सबको चौंका भी दिया है। कारण, करीब छह साल पहले गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में कसीदे गढ़ने वाले मोहतमिम को मुंह की खानी पड़ी थी। मगर, उलमाओं के इस न्यौते से माना जा रहा है कि पीएम मोदी के आपसी सौहार्द और सबका साथ-सबका विकास के नारे पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद भी राजी है। हालांकि जमीयत उलेमा-ए-हिंद अरशद मदनी गुट पीएम मोदी को दिए गए न्यौते पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

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तीन तलाक सहित विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को गए जमीयत उलेमा-ए हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें देवबंद आने का न्यौता दिया है। जिस पर पीएम मोदी ने हल्की मुस्कान के साथ खुशी का इजहार कर स्वीकृति का संदेश भी दिया। जमीयत के इस न्यौते ने एक बारगी सबको चौंका दिया है। कारण, गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान परोक्ष रूप से कई बार दारुल उलूम और जमीयत उलेमा-ए- हिंद पीएम मोदी पर निशाना साध चुके हैं। 
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आपको बता दें कि दिसंबर 2010 में दारुल उलूम के मोहतमिम नियुक्त हुए गुलाम मोहम्मद मोहतमिम ने उस वक्त गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। इसके बाद मंजलिस ए शूरा की बैठक के बाद उन्हें अपना पद तक गंवाना पड़ा था। इसके बाद पूर्व सांसद और जमीयत के महासचिव मौलाना महमूद मदनी के गुजरात दौरे पर उन्हें सरकारी मेहमाननवाजी लेने का जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा था। केन्द्र में भाजपा सरकार बनने के बाद केन्द्र सरकार की कई योजनाओं और घोषणाओं का दारुल उलूम और उलमाओं ने मजबूती के साथ विरोध भी किया। मदरसों के आधुनिकीकरण, योग, सूर्य नमस्कार सहित कई मुद्दों पर यहां से तीखी प्रतिक्रियाएं भी आई। इसी बीच जमीयत का पीएम को दिया गया न्यौता सबको चौंकाने वाला है। 

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दारुल उलूम के आसपास बहती है सियासी हवा

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देवबंद आ सकते है प्रधानमंत्री

वहीं बीते बुधवार को जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष कारी उस्मान मंसूरपुरी और महासचिव मौलाना महमूद मदनी के नेतृत्व में 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पीएम मोदी से  मिलने पहुंचा था। करीब दो घंटे की मुलाकात में तीन तलाक, गोरक्षा के नाम पर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार सहित अन्य मुद्दों पर पीएम से चर्चा की गई थी। इस दौरान ही उन्हें देवबंद आने का न्यौता भी दिया गया था। हालांकि जमीयत उलेमा ए हिंद महमूद मदनी गुट के कोषाध्यक्ष हसीब सिद्दीकी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दावत देने का कोई खास मकसद नहीं है। हमारे बुलाने पर आते हैं तो देवबंद के डेवलपमेंट की बात उनसे की जाएगी। उधर, जमीयत उलेमा-ए हिंद अरशद मदनी गुट के प्रेस सचिव फजलुर्रहमान का कहना है कि ना तो हमने पीएम को बुलाया है और नहीं कुछ बता सकते हैं। प्रधानमंत्री के देवबंद आने पर इस्तकबाल कौन करेगा यह वहीं बता सकता है जिन्होंने उनको बुलाया होगा।

इस्लामिक तामिल का सबसे बड़ा मरकज दारुल उलूम भले ही सियासत का केन्द्र नहीं है, मगर सियासी बयार इस इदारे के आसपास बहती है। यही कारण है कि राजनीतिक दलों के लोग दारुल उलूम के जरिए मुसलमानों को संकेत देने की हर संभव कोशिश करते हैं। इससे पहले स्व. इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहने के दौरान कई बार दारुल उलूम पहुंच चुकी हैं। जमीयत उलेमा ए हिंद के संस्थापक सदस्य मरहूम अशद मदनी को कांग्रेस ने कई बार राज्यसभा भी भेजा है।

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