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Meerut News: स्मॉग कर रहा वार, नाक-गला हो रहे बीमार

Thu, 30 Oct 2025 03:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 03:01 AM IST
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Smog is attacking, people are getting sick in the nose and throat.
मेरठ। दिवाली के बाद से मौसम में बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। सुबह और रात के समय शहर के ऊपर स्मॉग की मोटी चादर छाई रहती है। यह न सिर्फ दृश्यता घटा रही है बल्कि अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डालने लगी है। नाक और गले में जलन, खांसी, आंखों में चुभन और सांस लेने में तकलीफ के मामले तेजी से बढ़े हैं।
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बुधवार को जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 4137 मरीज पहुंचे। इनमें सबसे ज्यादा संख्या खांसी, जुकाम, बुखार, सांस लेने में दिक्कत और गले में संक्रमण आदि के थे। जब हवा में धूल, वाहन प्रदूषण, धुआं और औद्योगिक गैसें मिलकर वातावरण की निचली सतह पर जम जाती हैं तब स्मॉग बनता है। सूरज की रोशनी इन कणों पर पड़ने से रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और ओजोन व अन्य गैसें बनती हैं। यह श्वसन तंत्र के लिए बेहद हानिकारक हैं।
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सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि स्मॉग की मौजूदा स्थिति में बच्चों, बुजुर्गों और दमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को सबसे अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं। इससे खांसी, गले में दर्द, आंखों में जलन, थकान और सांस फूलने जैसी शिकायतें बढ़ गई हैं।
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इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा

जिला अस्पताल के नाक, कान गला रोग (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. बीपी कौशिक ने बताया कि स्मॉग के लंबे समय तक असर से एलर्जी, दमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग बढ़ सकते हैं। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज या हृदय संबंधी समस्या है, उनके लिए यह मौसम और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे मरीज सुबह की सैर या तेज गतिविधियों से फिलहाल परहेज करें।

बचाव ही है सबसे बड़ा उपाय
- स्मॉग से बचाव के लिए जरूरी है कि लोग घर से निकलते समय एन-95 या सर्जिकल मास्क लगाएं।
- वाहन कम चलाएं और जरूरत न होने पर बाहर न जाएं।
- घरों में पौधों की संख्या बढ़ाएं, कमरे में एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।
- खूब पानी पीएं ताकि शरीर से हानिकारक तत्व बाहर निकल सकें।
- शाम या सुबह की बजाय दोपहर के समय व्यायाम करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
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