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अक्षय तृतीया पर इस बार बन रहे हैं छह राजयोग
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अक्षय तृतीया पर इस बार बन रहे हैं छह राजयोग
मेरठ। अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, ऐसे कार्यों का अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस बार अक्षय तृतीया पर छह राजयोग बन रहे हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कोई भी शुभ काम बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया कोई भी कार्य कभी निष्फल नहीं होता है। यही वजह है कि लोग घरों में वैवाहिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन को ही चुनते हैं। इस बार कोरोना वायरस व लॉकडाउन के कारण न तो शहर में कोई विवाह होगा और न ही गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य होंगे। न ही इस बार सोने चांदी की खरीदारी हो पाएगी। ऐसे में लोग घरों में रहकर ही परमेश्वर का ध्यान करें।
घर में संध्या दीपावली की तरह जलाएं दीप
इस साल की अक्षय तृतीया विशेष रहने वाली है। हालांकि अक्षय तृतीया की रौनक गत वर्षों की भांति कोरोना वायरस के चलते फीकी रहेगी। इस दौरान आप अपने घर पर ही गंगा जल से स्नान करें और दान का संकल्प लें। संध्या के समय सभी अपने घर के मंदिर, छत व मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इस वैश्विक महामारी के अंत की भी प्रार्थना करें।
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अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र बेहद शुभ
इस बार अक्षय तृतीया के दिन छह राजयोग बन रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र का बनना बेहद शुभ माना जा रहा है। इसके साथ ही यह त्योहार अबूझ मुहूर्त में पड़ रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय के समय शंख, नीचभंग, पर्वत योग, अमला, रूचक और शश योग का निर्माण हो रहा है। इन योग के अलावा इस दिन महादीर्घायु और दान योग भी बन रहे हैं। यह योग सूर्य, मंगल, गुरु, बुध और शनि ग्रह के कारण बन रहे हैं। तृतीया तिथि का आरंभ 25 अप्रैल को पूर्वाह्न 11.52 बजे से होगा जो अगले दिन दोपहर करीब 1.23 बजे तक रहेगी। उदय व्यापिनी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने से 26 अप्रैल को अक्षय तृतीय मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को विष्णु भगवान का परशुराम के रूप में अवतार हुआ था।
इस मंत्र का करें जाप
अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यता के अनुसार सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया पर ही हुई थी। अक्षय तृतीया के दिन से वेद व्यासजी ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरंभ किया। इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। लॉकडाउन के कारण इस बार घर में रहकर ही पूजा की जा सकती है। मान्यता है कि लक्ष्मीजी की प्रतिमा को कच्चे दूध से स्नान करवाकर केसर, कुमकुम से उनका पूजन करें। यदि गंगाजल है तो उसका भी उपयोग कर सकते हैं। इस दौरान ऊं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मयै नम: मंत्र का जाप किया जाता है।
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मेरठ। अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, ऐसे कार्यों का अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस बार अक्षय तृतीया पर छह राजयोग बन रहे हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कोई भी शुभ काम बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया कोई भी कार्य कभी निष्फल नहीं होता है। यही वजह है कि लोग घरों में वैवाहिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन को ही चुनते हैं। इस बार कोरोना वायरस व लॉकडाउन के कारण न तो शहर में कोई विवाह होगा और न ही गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य होंगे। न ही इस बार सोने चांदी की खरीदारी हो पाएगी। ऐसे में लोग घरों में रहकर ही परमेश्वर का ध्यान करें।
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घर में संध्या दीपावली की तरह जलाएं दीप
इस साल की अक्षय तृतीया विशेष रहने वाली है। हालांकि अक्षय तृतीया की रौनक गत वर्षों की भांति कोरोना वायरस के चलते फीकी रहेगी। इस दौरान आप अपने घर पर ही गंगा जल से स्नान करें और दान का संकल्प लें। संध्या के समय सभी अपने घर के मंदिर, छत व मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इस वैश्विक महामारी के अंत की भी प्रार्थना करें।
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अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र बेहद शुभ
इस बार अक्षय तृतीया के दिन छह राजयोग बन रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र का बनना बेहद शुभ माना जा रहा है। इसके साथ ही यह त्योहार अबूझ मुहूर्त में पड़ रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय के समय शंख, नीचभंग, पर्वत योग, अमला, रूचक और शश योग का निर्माण हो रहा है। इन योग के अलावा इस दिन महादीर्घायु और दान योग भी बन रहे हैं। यह योग सूर्य, मंगल, गुरु, बुध और शनि ग्रह के कारण बन रहे हैं। तृतीया तिथि का आरंभ 25 अप्रैल को पूर्वाह्न 11.52 बजे से होगा जो अगले दिन दोपहर करीब 1.23 बजे तक रहेगी। उदय व्यापिनी और रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने से 26 अप्रैल को अक्षय तृतीय मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को विष्णु भगवान का परशुराम के रूप में अवतार हुआ था।
इस मंत्र का करें जाप
अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यता के अनुसार सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया पर ही हुई थी। अक्षय तृतीया के दिन से वेद व्यासजी ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरंभ किया। इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। लॉकडाउन के कारण इस बार घर में रहकर ही पूजा की जा सकती है। मान्यता है कि लक्ष्मीजी की प्रतिमा को कच्चे दूध से स्नान करवाकर केसर, कुमकुम से उनका पूजन करें। यदि गंगाजल है तो उसका भी उपयोग कर सकते हैं। इस दौरान ऊं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मयै नम: मंत्र का जाप किया जाता है।