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शिक्षिका बहन की मौत्, ब्लैक फंगस ने छिनी भाई की आंखें
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शिक्षिका बहन की मौत, ब्लैक फंगस ने भाई की आंखें छीनीं
मेरठ। कोरोना के कहर से कुछ परिवार बर्बाद हो गए हैं। रेलवे रोड निवासी शिक्षिका बहन को कोरोना ने लील लिया और अब ब्लैक फंगस से भाई ने आंखों की रोशनी खो दी है। वह मेडिकल कॉलेज में मौत से जंग लड़ रहा है। युवक की मां भी संक्रमित हो गई थीं, गनीमत है कि वह ठीक होकर घर चली गईं।
नगर निगम से रिटायर्ड कर्मचारी प्रदीप जैन रेलवे रोड पर परिवार के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी 38 साल की बेटी शालिनी जैन जानी ब्लॉक में शिक्षिका थीं। उनकी ड्यूटी पंचायत चुनाव में लगी थी। जब वह पंचायत चुनाव कराकर घर पहुंचीं तो अगले दिन बुखार आ गया था। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर 2 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 3 मई को उनकी मौत हो गई। उनकी 8 साल की बेटी है। वह बेटी के साथ मायके में ही थीं। बेटी की मौत के बाद परिवार पूरी तरह से उबर भी नहीं पाया था कि इकलौते बेटा अनिकांत जैन और मां रेणु संक्रमित हो गए।
कोरोना से ठीक होने के बाद रेणु तो घर चली गईं, लेकिन अनिकांत को ब्लैक फंगस ने चपेट में ले लिया। प्रदीप जैन ने बताया कि बेटे का निजी अस्पताल में इलाज कराया। मगर उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। 20 दिन बाद करीब छह लाख का बिल बनाकर चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए। अब मजबूरन बेटे को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करना पड़ा है। उसकी हालत चिंताजनक बनी है। वह मौत और जिंदगी के बीच जंग लड़ रहा है। मेडिकल में अनिकांत का इलाज कर रहे डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि वह बहुत गंभीर है।
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मेरठ। कोरोना के कहर से कुछ परिवार बर्बाद हो गए हैं। रेलवे रोड निवासी शिक्षिका बहन को कोरोना ने लील लिया और अब ब्लैक फंगस से भाई ने आंखों की रोशनी खो दी है। वह मेडिकल कॉलेज में मौत से जंग लड़ रहा है। युवक की मां भी संक्रमित हो गई थीं, गनीमत है कि वह ठीक होकर घर चली गईं।
नगर निगम से रिटायर्ड कर्मचारी प्रदीप जैन रेलवे रोड पर परिवार के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी 38 साल की बेटी शालिनी जैन जानी ब्लॉक में शिक्षिका थीं। उनकी ड्यूटी पंचायत चुनाव में लगी थी। जब वह पंचायत चुनाव कराकर घर पहुंचीं तो अगले दिन बुखार आ गया था। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर 2 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 3 मई को उनकी मौत हो गई। उनकी 8 साल की बेटी है। वह बेटी के साथ मायके में ही थीं। बेटी की मौत के बाद परिवार पूरी तरह से उबर भी नहीं पाया था कि इकलौते बेटा अनिकांत जैन और मां रेणु संक्रमित हो गए।
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कोरोना से ठीक होने के बाद रेणु तो घर चली गईं, लेकिन अनिकांत को ब्लैक फंगस ने चपेट में ले लिया। प्रदीप जैन ने बताया कि बेटे का निजी अस्पताल में इलाज कराया। मगर उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। 20 दिन बाद करीब छह लाख का बिल बनाकर चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए। अब मजबूरन बेटे को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करना पड़ा है। उसकी हालत चिंताजनक बनी है। वह मौत और जिंदगी के बीच जंग लड़ रहा है। मेडिकल में अनिकांत का इलाज कर रहे डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि वह बहुत गंभीर है।
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