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खामोश मतदाता बढ़ा रहे दावेदारों की परेशानी

Sat, 13 Mar 2021 02:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Mar 2021 02:04 AM IST
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Silent voters are increasing the problems of the claimants
खामोश मतदाता बढ़ा रहे दावेदारों की परेशानी
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हस्तिनापुर। पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची जारी होने के बाद गांवों में चुनाव को लेकर सुगबुगाहट बढ़ती जा रही है। दावेदारों ने अपने पक्ष में मतदाताओं को लुभाने के लिए खातिरदारी भी शुरू कर दी है। अब वह राजनीतिक सहयोग की जुगत लगा रहे हैं।
इस बार पंचायत चुनाव इतने आसान नहीं रहेंगे, जितने गत वर्षों में रहे। इस बार आरक्षण ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वहीं खामोश मतदाता भी दावेदारों की नींद उड़ा रहे हैं। दावेदार असमंजस की स्थिति में हैं। वह मतदाताओं को समझ नहीं पा रहे हैं। वहीं मतदाता भी अभी खामोश हैं, जबकि ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए खातिरदारी और दावतों का दौर शुरू कर दिया है।
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ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक के चुनाव लड़ने के लिए सभी दावेदार राजनीतिक सहयोग की जुगत में लगे हैं। बड़ी संख्या में पार्टी संगठनों के पास अपने आवेदन पहुंचा रहे हैं। दावेदारों को अंदाजा है कि पार्टी की विचारधारा उनकी चुनावी नैया पार लगा सकती है। कई दावेदारों ने चुनावी समीकरण देखते हुए पार्टी बदलने का मन बना लिया है। कई ने अपनी पसंद के दल में एंट्री ले ली है तो कई लेने की तैयारी में हैं।
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इन चुनाव में भी होंगे मुद्दे
पंचायत चुनाव में इस बार दावेदारों को कई मुद्दों का सामना करना पड़ेगा। उनका संतोषजनक जवाब भी मतदाताओं को देना होगा। जिला पंचायत से क्षेत्र पंचायत तक के दावेदारों को देखा जाएगा कि वह किस पार्टी से जुड़े हैं। कई मुद्दे पार्टी प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। कृषि कानून को लेकर चल रहा किसान आंदोलन और लगातार बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दाम मुख्य हैं।

जातीय समीकरण का लगा रहे हिसाब
जिला पंचायत और ग्राम पंचायत के दावेदार जातीय समीकरणों के आधार पर एक-दूसरे के मतों में सेंधमारी करने की जुगत लगा रहे हैं। संभावित जीत दर्ज करने वाले ग्राम प्रधानों का सहारा जिला पंचायत चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को मिल जाए तो उनकी भी नैया पार हो सकती है, जिससे ऐसे दावेदारों को चिह्नित किया जा रहा है।
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