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Meerut News: सेंट्रल मार्केट के आसपास ही भूखंड 661/6 के दुकानदारों को मिलेंगी दुकानें
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मेरठ। शास्त्रीनगर सेक्टर छह के सेंट्रल मार्केट में भूखंड 661/6 पर बने 40 साल पुराने कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने के विरोध में धरने पर बैठे व्यापारी डीएम के आश्वासन पर मान गए। डेढ़ घंटे तक चली वार्ता में व्यापारियों को फिर से बसाने का आश्वासन दिया गया। कहा कि व्यापारियों को सेंट्रल मार्केट के आसपास ही दुकानें बनाकर दी जाएंगी। इसके बाद व्यापारियों ने सेंट्रल मार्केट में चल रहा धरना दोपहर 2:30 बजे समाप्त कर दिया।
सेंट्रल मार्केट के भूखंड संख्या 661/6 पर बने कॉम्प्लेक्स में 22 दुकानें थी। इन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास विकास परिषद ने पिछले सप्ताह ढहा दिया था। इससे ये व्यापारी बेरोजगार हो गए। व्यापारियों ने शुक्रवार से सेंट्रल मार्केट में बिल्डिंग के मलबे के सामने ही धरना शुरू कर दिया था। शनिवार को धरने का दूसरा ही दिन था कि जिला प्रशासन ने पीड़ित व्यापारियों को सुबह दस बजे ही वार्ता के लिए बुला लिया। व्यापारी किशोर वाधवा, रजत गोयल, रजत अरोरा, राजीव गुप्ता जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के आवास पर पहुंचे। यहां पहले से ही जिलाधिकारी, एडीएम सिटी बृजेश सिंह, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा, आवास विकास के अधिकारी, एसडीएम सदर मौके पर मौजूद थे।
व्यापारी बोले- खड़ा हो गया है आर्थिक संकट
अधिकारी और व्यापारियों के बीच बैठक में व्यापारियों ने कहा कि कॉम्प्लेक्स गिराकर उनको बेरोजगार कर दिया गया है। परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कॉम्प्लेक्स के प्रत्येक व्यापारी को एक-एक करोड़ रुपये सहायता राशि दी जाए। ताकि परिवारों की मदद हो सके। सेंट्रल मार्केट के आसपास ही खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर दुकानें बनवाकर दी जाएं। कॉम्प्लेक्स के व्यापारियों को रजिस्ट्री के आधार पर भूमि का स्वामित्व दिया जाए।
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शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
व्यापारियों ने बताया कि जिला अधिकारी ने हमारी मांगों को जायज बताते हुए मांग पूरी कराने का आश्वासन दिया है। सभी व्यापारियों के मांग पत्र के आधार पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। उधर आवास विकास परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह पीड़ित 22 व्यापारियों से भूमि रजिस्ट्री के अभिलेख लेकर नाम परिवर्तन की कार्रवाई करें। ताकि व्यापारी कॉम्प्लेक्स की भूमि में अपने हिस्से पर स्वामित्व का अधिकार पा सकें। सेंट्रल मार्केट के आसपास ही सरकारी भूमि की तलाश की जिम्मेदारी नगरायुक्त को सौंपी गई है। पूर्व में महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने नई सड़क पर नगर निगम के नए कार्यालय में बनायी जा रही दुकानों में इन व्यापारियों को प्राथमिकता पर दुकान देने का आश्वासन दिया था। किशोर वाधवा ने कहा कि हमें उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन पर भरोसा है। न्याय जरूर मिलेगा।
ये लोग रहे धरने पर
- धरने पर जगपाल बौद्ध, नरेन्द्र राष्ट्रवादी, एके अग्रवाल, किसान मजदूर संगठन के युवा जिलाध्यक्ष अंशुल तोमर, महानगर अध्यक्ष विजय राघव, संजीव आदि समेत व्यापारी रहे।
कनाडा से शिखर वाधवा बोले, मेरठ में हमारे साथ हुआ अन्याय
मेरठ। सेंट्रल मार्केट में अवैध कॉम्प्लेक्स गिराए जाने के बाद पीड़ित व्यापारियों का दर्द सामने आ रहा है। किशोर वाधवा के बेटे शिखर वाधवा ने कनाडा से सोशल मीडिया के माध्यम से अपना दर्द बयां किया है। कहा कि अगर पीड़ित परिवार धरने पर बैठते हैं तो जिला प्रशासन जेल भेजने की धमकी दे रहा है। करें तो क्या करें। शिखर वाधवा ने कहा कि 12 साल पहले हमने अपना समस्त पैसा लगाकर बिल्डिंग खरीदी थी। सरकार ने हमारी बिल्डिंग को एक ही झटके में तोड़ दिया। सेंट्रल मार्केट में अन्य बिल्डिंग के खिलाफ भी कार्रवाई होनी थी लेकिन उन्हें छोड़ दिया। जिनकी बिल्डिंग गिरी नहीं वह दिवाली मना रहे हैं। अब हमें लगता है कि इंडिया छोड़कर कनाडा आना सही निर्णय रहा। कनाडा में भ्रष्टाचार नहीं है। यहां की सरकार ने उन्हें नागरिकता दी है। मेरठ में माता-पिता की आय का बिल्डिंग से मिलने वाला किराया एक ही साधन था।
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सेंट्रल मार्केट के भूखंड संख्या 661/6 पर बने कॉम्प्लेक्स में 22 दुकानें थी। इन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास विकास परिषद ने पिछले सप्ताह ढहा दिया था। इससे ये व्यापारी बेरोजगार हो गए। व्यापारियों ने शुक्रवार से सेंट्रल मार्केट में बिल्डिंग के मलबे के सामने ही धरना शुरू कर दिया था। शनिवार को धरने का दूसरा ही दिन था कि जिला प्रशासन ने पीड़ित व्यापारियों को सुबह दस बजे ही वार्ता के लिए बुला लिया। व्यापारी किशोर वाधवा, रजत गोयल, रजत अरोरा, राजीव गुप्ता जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के आवास पर पहुंचे। यहां पहले से ही जिलाधिकारी, एडीएम सिटी बृजेश सिंह, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा, आवास विकास के अधिकारी, एसडीएम सदर मौके पर मौजूद थे।
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व्यापारी बोले- खड़ा हो गया है आर्थिक संकट
अधिकारी और व्यापारियों के बीच बैठक में व्यापारियों ने कहा कि कॉम्प्लेक्स गिराकर उनको बेरोजगार कर दिया गया है। परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कॉम्प्लेक्स के प्रत्येक व्यापारी को एक-एक करोड़ रुपये सहायता राशि दी जाए। ताकि परिवारों की मदद हो सके। सेंट्रल मार्केट के आसपास ही खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर दुकानें बनवाकर दी जाएं। कॉम्प्लेक्स के व्यापारियों को रजिस्ट्री के आधार पर भूमि का स्वामित्व दिया जाए।
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शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
व्यापारियों ने बताया कि जिला अधिकारी ने हमारी मांगों को जायज बताते हुए मांग पूरी कराने का आश्वासन दिया है। सभी व्यापारियों के मांग पत्र के आधार पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। उधर आवास विकास परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह पीड़ित 22 व्यापारियों से भूमि रजिस्ट्री के अभिलेख लेकर नाम परिवर्तन की कार्रवाई करें। ताकि व्यापारी कॉम्प्लेक्स की भूमि में अपने हिस्से पर स्वामित्व का अधिकार पा सकें। सेंट्रल मार्केट के आसपास ही सरकारी भूमि की तलाश की जिम्मेदारी नगरायुक्त को सौंपी गई है। पूर्व में महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने नई सड़क पर नगर निगम के नए कार्यालय में बनायी जा रही दुकानों में इन व्यापारियों को प्राथमिकता पर दुकान देने का आश्वासन दिया था। किशोर वाधवा ने कहा कि हमें उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन पर भरोसा है। न्याय जरूर मिलेगा।
ये लोग रहे धरने पर
- धरने पर जगपाल बौद्ध, नरेन्द्र राष्ट्रवादी, एके अग्रवाल, किसान मजदूर संगठन के युवा जिलाध्यक्ष अंशुल तोमर, महानगर अध्यक्ष विजय राघव, संजीव आदि समेत व्यापारी रहे।
कनाडा से शिखर वाधवा बोले, मेरठ में हमारे साथ हुआ अन्याय
मेरठ। सेंट्रल मार्केट में अवैध कॉम्प्लेक्स गिराए जाने के बाद पीड़ित व्यापारियों का दर्द सामने आ रहा है। किशोर वाधवा के बेटे शिखर वाधवा ने कनाडा से सोशल मीडिया के माध्यम से अपना दर्द बयां किया है। कहा कि अगर पीड़ित परिवार धरने पर बैठते हैं तो जिला प्रशासन जेल भेजने की धमकी दे रहा है। करें तो क्या करें। शिखर वाधवा ने कहा कि 12 साल पहले हमने अपना समस्त पैसा लगाकर बिल्डिंग खरीदी थी। सरकार ने हमारी बिल्डिंग को एक ही झटके में तोड़ दिया। सेंट्रल मार्केट में अन्य बिल्डिंग के खिलाफ भी कार्रवाई होनी थी लेकिन उन्हें छोड़ दिया। जिनकी बिल्डिंग गिरी नहीं वह दिवाली मना रहे हैं। अब हमें लगता है कि इंडिया छोड़कर कनाडा आना सही निर्णय रहा। कनाडा में भ्रष्टाचार नहीं है। यहां की सरकार ने उन्हें नागरिकता दी है। मेरठ में माता-पिता की आय का बिल्डिंग से मिलने वाला किराया एक ही साधन था।