35 पन्नों में लिखी शूटर प्रशांत के जुर्म की पूरी दास्तां, तिहाड़ जेल भेजा
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शूटर प्रशांत विश्नोई वन्य जीवों और विदेशी हथियारों की तस्करी करता था, इसकी पूरी दास्तां वन विभाग के अधिकारियों ने 35 पन्नों में लिखी है। जो बुधवार को कोर्ट में पेश की गई।
वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि प्रशांत के खिलाफ उनके पास पुख्ता सुबूत हैं। प्रशांत की कोठी से वन्य जीवों का मांस, अवशेष व विदेशी हथियारों की बरामदगी से लेकर गिरफ्तारी तक सुबूत जुटाए गए हैं। आरोपी प्रशांत के बयानों को भी अंकित किया गया है। इन्हीं पुख्ता सुबूतों को आधार बनाकर उन्होंने कोर्ट में रिमांड मांगा था, जिस पर सुनवाई हुई। इसमें एक साल चार्जशीट लगाने के लिए मिलता है। इस दौरान वह प्रशांत के खिलाफ और मजबूत सुबूत जुटा लेंगे, जो उसे सजा तक पहुंचाएंगे। रिटायर कर्नल देवेंद्र कुमार का बेटा प्रशांत वन्य तस्करी और विदेशी हथियारों के मामले में फंस गया है, यह चर्चा शहर के वीआईपी लोगों में बनी हुई है।
हंसकर बोला प्रशांत, डू नॉट वरी, मेरे पास लाइसेंस है
प्रशांत से मिलने के लिए कुछ आर्म्स वाले भी पहुंचे। कस्टडी में प्रशांत को देखकर बोले कि यह क्या हो गया। जिस पर प्रशांत बोला कि डू नॉट वरी, मेरे पास सभी हथियारों के लाइसेंस है। वन्य जीव को मारने की परमीशन भी है। मुझको बेवजह फंसाया जा रहा है। कोई आरोप सिद्ध नहीं हो सकता। प्रशांत कोर्ट में सादी टी शर्ट, पेंट और चप्पल पहनकर आया था। उसके चेहरे पर मामूली सा भी पछतावा नहीं था। वह कस्टडी में हंसता रहा।
शूटर प्रशांत विश्नोई को तिहाड जेल से बुधवार को दिल्ली पुलिस ने स्थानीय एसीजेएम कोर्ट में पेश किया। आरोपी और वन विभाग के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में करीब एक घंटा 20 मिनट तक बहस की। जिसके बाद कोर्ट ने वन विभाग की अर्जी मंजूर करते हुए प्रशांत का 14 दिन का न्यायिक रिमांड मंजूर कर दिया। शूटर को दिल्ली पुलिस वापिस तिहाड़ जेल ले गई।
वन विभाग ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या चार में अर्जी दाखिल की थी कि शूटर प्रशांत विश्नोई को तिहाड़ जेल से तलब कर उसका न्यायिक रिमांड बनाया जाए। कोर्ट के आदेश पर प्रशांत को दिल्ली पुलिस पेश करने एसीजेएम कोर्ट-4 में पहुंची थी। वन विभाग के एसडीओ संजीव कुमार और उनके अधिवक्ता सतीश कुमार त्यागी ने प्रशांत विश्नोई के खिलाफ वन्य जीवों का शिकार करने के संबंध में दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड बनाने की मांग की। जिस पर आरोपी प्रशांत पक्ष की तरफ से अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रशांत पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। उसके न्यायिक रिमांड की अर्जी खारिज की जाए। बहस सुनने के बाद कोर्ट ने न्यायिक रिमांड मंजूर कर दिया।
चुप्पी साधे रहा शूटर
प्रशांत विश्नोई को डीआरआई की टीम ने पांच दिन पूर्व गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। इस दौरान प्रशांत ने पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान समेत कई राज्यों में साथी शूटरों के साथ वन्य जीवों का शिकार करने की बात कही थी। कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को वन विभाग टीम ने तिहाड जेल में प्रशांत से पूछताछ की, तो उसने कहा था कि जो कुछ भी बोलेगा, उसका वकील बोलेगा। अब बुधवार को भी मेरठ कोर्ट में भी प्रशांत चुप्पी साधे रहा।
कस्टडी में लिया गया
शूटर प्रशांत से मिलने के लिए उसके परिचितों की कचहरी में भीड़ रही। उसके परिचित उससे मिलने कोर्ट में अंदर तक घुस आए। दिल्ली पुलिस के मना करने पर भी परिचित नहीं माने। जिसकी शिकायत मिलने पर कोर्ट के निर्देश पर प्रशांत को कस्टडी में लेकर अन्य मुल्जिमों के साथ कठघरे में रखा गया। प्रशांत के परिचितों को भी पुलिस ने कोर्ट से बाहर कर दिया।
अब यह होगा
वन विभाग की अर्जी पर प्रशांत का वन विभाग की तरफ से दर्ज कराए गए मुकदमे में न्यायिक रिमांड बन चुका है। अब वन विभाग प्रशांत को कस्टडी रिमांड पर लेने की कार्यवाही करेगा।
धक्कामुक्की हुई
दिल्ली पुलिस ने करीब एक बजे प्रशांत को कोर्ट में पेश किया। करीब तीन घंटे चली प्रक्रिया के बाद दिल्ली पुलिस प्रशांत को वापस ले जाने के लिए कोर्ट से बाहर लाई। जहां पर मीडिया और अन्य लोगों का तांता लगा था। मीडिया ने प्रशांत का पक्ष जानने का प्रयास किया। लेकिन वह कुछ नहीं बोला। इस दौरान धक्कामुक्की होने पर दिल्ली पुलिस प्रशांत को वापस कोर्ट में ले गई। बाद में सिविल लाइन थाने की पुलिस बुलाकर प्रशांत को गाड़ी तक पहुंचाया गया। तब जाकर दिल्ली पुलिस उसे लेकर दिल्ली रवाना हुई।
इन तथ्यों पर हुई बहस
अभियोजन पक्ष : शूटर प्रशांत पर वन विभाग की तरफ से सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमे में अपराध संख्या 06 सन 2017-18 अंतर्गत धारा 9, 44, 49ए, 49बी, 50, 51 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 संशोधित 2003 के अंतर्गत न्यायिक हिरासत में लेने की याचना की गई।
बचाव पक्ष : धारा 55 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत कोई नोटिस नहीं दिया गया इसलिए कानूनी रूप से रिमांड नहीं दिया जा सकता है।
अभियोजन पक्ष : अभी विवेचना जारी है। कानूनी कार्यवाही चल रही है इसलिए अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में लेकर उसका न्यायिक रिमांड बनाया जाए।
निर्णय : एसीजेएम चतुर्थ ने अभियुक्त प्रशांत विश्नोई का न्यायिक रिमांड बनाने और अभियुक्त को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के आदेश जारी किए।
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