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Meerut News: पूर्व विधायक योगेश वर्मा को झटका, अतुल प्रधान-रफीक अंसारी में होगी जोर आजमाइश
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पूर्व विधायक योगेश वर्मा को झटका, अतुल प्रधान-रफीक अंसारी में होगी जोर आजमाइश
मेरठ। महापौर के लिए सोमवार को आरक्षण जारी होने के बाद मौजूदा महापौर सुनीता वर्मा और उनके पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा को झटका लगा है। वह फिर से नगर निगम चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए यह सीट आरक्षित होने के बाद अब सरधना से विधायक अतुल प्रधान और शहर विधायक रफीक अंसारी के बीच टिकट को लेकर जोर आजमाइश हो सकती है। अतुल प्रधान अपनी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को और रफीक अंसारी खुद या फिर अपनी पत्नी खुर्शीदा को चुनाव लड़ाना चाहते हैं। दोनों ने आवेदन किए हुए हैं।
सपा से गूमी गांव के कर्मवीर गूमी हैं, जिन्होंने आवेदन किया हुआ है। इसके अलावा सपा नेता जितेंद्र गुर्जर भी टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं। इस बार निगम चुनाव में समाजवादी पार्टी की कठिन परीक्षा होगी। अभी तक सपा अपने बूते पर महापौर का चुनाव नहीं जीत सकी है। सुनीता वर्मा भी जब चुनाव जीती थीं तो वह बसपा में थीं। इसके बाद सपा में शामिल हुई थीं। साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हुई थी और 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी हारे थे और चार पार्षद जीते थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया हारीं और चार पार्षद जीते थे। नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि आरक्षण और परिस्थितियों के हिसाब से सपा हाईकमान टिकट तय करेगी। इस बार के विधानसभा चुनाव में सपा के सात में से चार विधायक बने हैं। सपा मेयर का चुनाव मजबूती से लडे़गी।
आरक्षण पर लगाएंगे आपत्ति: योगेश वर्मा
पूर्व विधायक योगेश वर्मा का कहना है कि आरक्षण नियमानुसार नहीं हुआ है। वह इस पर आपत्ति लगाएंगे। सीट एससी या फिर सामान्य होनी चाहिए थी।
टिकट मिला तो मजबूती से लड़ेंगे चुनाव
विधायक अतुल प्रधान का कहना है कि टिकट की रेस में हैं। अगर पार्टी टिकट देती है तो सीमा प्रधान मजबूती से चुनाव लडे़ंगी और जीतेंगी।
टिकट मिला तो खुद लडूंगा चुनाव
विधायक रफीक अंसारी का कहना है कि सीट महिला के लिए आरक्षित होती तो पत्नी को चुनाव लड़ाते, अब ऐसी बाध्यता नहीं है, इसलिए पार्टी ने टिकट दिया तो खुद चुनाव लड़ेंगे।
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मेरठ। महापौर के लिए सोमवार को आरक्षण जारी होने के बाद मौजूदा महापौर सुनीता वर्मा और उनके पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा को झटका लगा है। वह फिर से नगर निगम चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए यह सीट आरक्षित होने के बाद अब सरधना से विधायक अतुल प्रधान और शहर विधायक रफीक अंसारी के बीच टिकट को लेकर जोर आजमाइश हो सकती है। अतुल प्रधान अपनी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को और रफीक अंसारी खुद या फिर अपनी पत्नी खुर्शीदा को चुनाव लड़ाना चाहते हैं। दोनों ने आवेदन किए हुए हैं।
सपा से गूमी गांव के कर्मवीर गूमी हैं, जिन्होंने आवेदन किया हुआ है। इसके अलावा सपा नेता जितेंद्र गुर्जर भी टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं। इस बार निगम चुनाव में समाजवादी पार्टी की कठिन परीक्षा होगी। अभी तक सपा अपने बूते पर महापौर का चुनाव नहीं जीत सकी है। सुनीता वर्मा भी जब चुनाव जीती थीं तो वह बसपा में थीं। इसके बाद सपा में शामिल हुई थीं। साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हुई थी और 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी हारे थे और चार पार्षद जीते थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया हारीं और चार पार्षद जीते थे। नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि आरक्षण और परिस्थितियों के हिसाब से सपा हाईकमान टिकट तय करेगी। इस बार के विधानसभा चुनाव में सपा के सात में से चार विधायक बने हैं। सपा मेयर का चुनाव मजबूती से लडे़गी।
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आरक्षण पर लगाएंगे आपत्ति: योगेश वर्मा
पूर्व विधायक योगेश वर्मा का कहना है कि आरक्षण नियमानुसार नहीं हुआ है। वह इस पर आपत्ति लगाएंगे। सीट एससी या फिर सामान्य होनी चाहिए थी।
टिकट मिला तो मजबूती से लड़ेंगे चुनाव
विधायक अतुल प्रधान का कहना है कि टिकट की रेस में हैं। अगर पार्टी टिकट देती है तो सीमा प्रधान मजबूती से चुनाव लडे़ंगी और जीतेंगी।
टिकट मिला तो खुद लडूंगा चुनाव
विधायक रफीक अंसारी का कहना है कि सीट महिला के लिए आरक्षित होती तो पत्नी को चुनाव लड़ाते, अब ऐसी बाध्यता नहीं है, इसलिए पार्टी ने टिकट दिया तो खुद चुनाव लड़ेंगे।
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