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कांग्रेसियों में जान फुंकने दो बार मेरठ आई थीं शीला दीक्षित
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कांग्रेसियों में जान फुंकने दो बार मेरठ आई थीं शीला दीक्षित
मेरठ। दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित दो बार मेरठ आयी थीं। सम्मेलनों के दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंकने का काम किया था। वह कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने से जोड़कर चलती थीं। कार्यकर्ता उनको अपने मार्गदर्शक के रूप में देखते थे।
कांग्रेसी बताते हैं कि 20 साल पहले प्यारेलाल शर्मा स्मारक मैदान में कांग्रेस का मंडलीय अधिवेशन हुआ था। जिसमें शीला दीक्षित ने कार्यकर्ताओं में राजनीतिक चेतना जगाने का काम किया था। उसके बाद शीला दिल्ली की सीएम बनी थीं। मेरठ के कांग्रेसी बताते हैं कि वह सीएम रहते कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं से ही नहीं बल्कि अन्य लोगों से भी शालीनता से साथ मिलती थीं। पूर्व विधायक राजेन्द्र शर्मा बताते हैं कि चार साल पहले पार्टी की तरफ से पं. जवाहर लाल नेहरू की याद में एक सेमिनार चौ. चरण सिंह विवि के नेताजी सुभाष चंद बोस प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया था। जिसमें शीला दीक्षित बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई थीं। उन्होंने कहा कि शीला जी ने दिल्ली का जो विकास कराया है वह कोई और नहीं कर सकता है।
शनिवार को दोपहर बाद जैसे ही शीला दीक्षित के निधन की सूचना मिली तो कांग्रेेसियों में शोक की लहर दौड़ गयी। सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की। कांग्रेसी नेता डा. मैराजुददीन के मुताबिक शीला दीक्षित के जाने से पार्टी को ही नहीं समाज को भी भारी क्षति हुई है। हाजी यूसुफ कुरैशी कहते हैं कि इतनी उम्र में भी वह लोकसभा चुनाव में पूरी तरह सक्रिय रहीं। दिल्ली का आगामी विधान सभा चुनाव भी उनके नेतृत्व में लड़ा जाना था।
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मेरठ। दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित दो बार मेरठ आयी थीं। सम्मेलनों के दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंकने का काम किया था। वह कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने से जोड़कर चलती थीं। कार्यकर्ता उनको अपने मार्गदर्शक के रूप में देखते थे।
कांग्रेसी बताते हैं कि 20 साल पहले प्यारेलाल शर्मा स्मारक मैदान में कांग्रेस का मंडलीय अधिवेशन हुआ था। जिसमें शीला दीक्षित ने कार्यकर्ताओं में राजनीतिक चेतना जगाने का काम किया था। उसके बाद शीला दिल्ली की सीएम बनी थीं। मेरठ के कांग्रेसी बताते हैं कि वह सीएम रहते कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं से ही नहीं बल्कि अन्य लोगों से भी शालीनता से साथ मिलती थीं। पूर्व विधायक राजेन्द्र शर्मा बताते हैं कि चार साल पहले पार्टी की तरफ से पं. जवाहर लाल नेहरू की याद में एक सेमिनार चौ. चरण सिंह विवि के नेताजी सुभाष चंद बोस प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया था। जिसमें शीला दीक्षित बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई थीं। उन्होंने कहा कि शीला जी ने दिल्ली का जो विकास कराया है वह कोई और नहीं कर सकता है।
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शनिवार को दोपहर बाद जैसे ही शीला दीक्षित के निधन की सूचना मिली तो कांग्रेेसियों में शोक की लहर दौड़ गयी। सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की। कांग्रेसी नेता डा. मैराजुददीन के मुताबिक शीला दीक्षित के जाने से पार्टी को ही नहीं समाज को भी भारी क्षति हुई है। हाजी यूसुफ कुरैशी कहते हैं कि इतनी उम्र में भी वह लोकसभा चुनाव में पूरी तरह सक्रिय रहीं। दिल्ली का आगामी विधान सभा चुनाव भी उनके नेतृत्व में लड़ा जाना था।
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