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शहर की आबोहवा में घुलता मानक से तीन गुना जहर
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 30 Aug 2016 02:32 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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शहर की आबोहवा में प्रदूषण का जहर घुलता जा रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई जुलाई की रिपोर्ट में मेरठ में मानक से तीन गुना से ज्यादा वायु प्रदूषण बताया गया है। जबकि मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। वायु प्रदूषण में मेरठ प्रदेश में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।
प्रदेश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विगत दिनों 21 शहरों के विभिन्न क्षेत्रों से वायु प्रदूषण की जांच कराई थी। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा प्रदूषण वाराणसी और कानपुर में पाया गया। वहां पर रेसपरेबल सस्पेंडेड पार्टीकुलेट मैटर (आरएसपीएम) की मात्रा मानक से कहीं ज्यादा बढ़ी आयी है। वाराणसी में 237, कानपुर में 231, बरेली 219 इलाहाबाद में 199 और मेरठ में 188 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया है।
मास्टर प्लान की जरूरत
शहर की जहरीली हो रही हवा का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है। अगर समय रहते हुए यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पर मास्टर प्लान नहीं बनाया तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी। बोर्ड द्वारा जारी रिपोर्ट में लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, फीरोजाबाद, झांसी जैसे बड़े शहरों में प्रदूषण मानक से ऊपर पाया गया है।
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प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति
शहर आरएसपीएम
वाराणसी 237
कानपुर 231
बरेली 219
इलाहाबाद 199
मेरठ 188
मथुरा 186
खुर्जा 171
सहारनपुर 163
मुरादाबाद 154
गाजियाबाद 150
आगरा 149
मेरठ में पिछले चार माह का वायु प्रदूषण
महीना आरएसपीएम
मार्च 180
अप्रैल 181.4
मई 186.7
जून 190.3
जुलाई 188.3
(नोट: सभी आंकडे़ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में हैं)
वायु प्रदूषण के पांच प्रमुख कारण
1. बाजारों और फैक्ट्रियों में डीजल जनरेटर सेट
2. अंधाधुंध दौड़ते पुराने पेट्रोल/डीजल वाहन
3. औद्योगिक इकाइयों की चिमनी से निकलने वाला धुआं
4. घरेलू ठोस अवशिष्ट और प्लास्टिक, कबाड़ जलाने पर धुआं
5. पटाखे/आतिशबाजी
यह निकलती हैं गैस
अफसरों के अनुसार मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों के हवा में घुलने से वायु प्रदूषण फैलता है। अधिकांश डीजल/पेट्रोल चलित कार, टेंपो, बस और ट्रक जिनकी मियाद खत्म हो चुकी है। लेकिन फिर भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
प्रदूषित क्षेत्र
शहर में वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा बेगमपुल और केसरगंज एरिया में रिकॉर्ड किया जाता है। इसके अलावा दीपावली पर वायु प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है।
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प्रदेश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विगत दिनों 21 शहरों के विभिन्न क्षेत्रों से वायु प्रदूषण की जांच कराई थी। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा प्रदूषण वाराणसी और कानपुर में पाया गया। वहां पर रेसपरेबल सस्पेंडेड पार्टीकुलेट मैटर (आरएसपीएम) की मात्रा मानक से कहीं ज्यादा बढ़ी आयी है। वाराणसी में 237, कानपुर में 231, बरेली 219 इलाहाबाद में 199 और मेरठ में 188 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया है।
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मास्टर प्लान की जरूरत
शहर की जहरीली हो रही हवा का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है। अगर समय रहते हुए यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पर मास्टर प्लान नहीं बनाया तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी। बोर्ड द्वारा जारी रिपोर्ट में लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, फीरोजाबाद, झांसी जैसे बड़े शहरों में प्रदूषण मानक से ऊपर पाया गया है।
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प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति
शहर आरएसपीएम
वाराणसी 237
कानपुर 231
बरेली 219
इलाहाबाद 199
मेरठ 188
मथुरा 186
खुर्जा 171
सहारनपुर 163
मुरादाबाद 154
गाजियाबाद 150
आगरा 149
मेरठ में पिछले चार माह का वायु प्रदूषण
महीना आरएसपीएम
मार्च 180
अप्रैल 181.4
मई 186.7
जून 190.3
जुलाई 188.3
(नोट: सभी आंकडे़ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में हैं)
वायु प्रदूषण के पांच प्रमुख कारण
1. बाजारों और फैक्ट्रियों में डीजल जनरेटर सेट
2. अंधाधुंध दौड़ते पुराने पेट्रोल/डीजल वाहन
3. औद्योगिक इकाइयों की चिमनी से निकलने वाला धुआं
4. घरेलू ठोस अवशिष्ट और प्लास्टिक, कबाड़ जलाने पर धुआं
5. पटाखे/आतिशबाजी
यह निकलती हैं गैस
अफसरों के अनुसार मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों के हवा में घुलने से वायु प्रदूषण फैलता है। अधिकांश डीजल/पेट्रोल चलित कार, टेंपो, बस और ट्रक जिनकी मियाद खत्म हो चुकी है। लेकिन फिर भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
प्रदूषित क्षेत्र
शहर में वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा बेगमपुल और केसरगंज एरिया में रिकॉर्ड किया जाता है। इसके अलावा दीपावली पर वायु प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है।