दुष्कर्म पीड़िता के प्रसव का मामला: नवजात के साथ भी हुआ अमानवीय व्यवहार, आरोपी के डीएनए की होगी जांच
मेरठ में दुष्कर्म पीड़िता किशोरी के सीएचसी में प्रसव के मामले में जांच समीति गठित कर दी गई है। वहीं आरोपी के डीएनए सैंपल टेस्ट के लिए भेजे गए हैं। आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
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दुष्कर्म पीड़िता किशोरी के सीएचसी के परिसर में उपचार के अभाव में बच्चे को जन्म देने के मामले में जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने शनिवार को मौके पर पहुंचकर जांच की। टीम ने सीएचसी के सीसीटीवी फुटेज और रजिस्टर की गहनता से पड़ताल की। आरोपी के डीएनए सैंपल टेस्ट के लिए भेजे गए हैं वहीं आरोपी को जेल भेज दिया गया।
घटना के दौरान तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों से पूछताछ की गई। सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट हो गया कि स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के चलते पीड़िता डेढ़ घंटे तक बेंच पर दर्द से तपड़ती रही। लापरवाही बरतने वाले पांच कर्मचारियों से स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया गया है। वहीं जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िता द्वारा जन्मे नवजात के साथ भी आमानवीय व्यवहार किया गया।
थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी(13) से दो बच्चों के बाप ने आठ माह तक दुष्कर्म किया। इसके चलते किशोरी गर्भवती हो गई। शुक्रवार सुबह पीड़िता की हालत बिगड़ने पर परिजन सरधना सीएचसी लेकर पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक पीड़िता दर्द से तड़पती रही, लेकिन स्वास्थ्यकर्मचारियों ने कोई सुध नहीं ली।
प्रसव पीड़ा बढ़ने पर गर्भवती किशोरी ने सीएचसी परिसर में बेंच पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। किशोरी की चीख स्वास्थ्यकर्मियों के कानों तक नहीं पहंची। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता को भर्ती करते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया। इस लापरवाही के मामले में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की।
इस मामले में शनिवार को जांच टीम में शामिल एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी, एसीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार, एसीएम चतुर्थ रश्मि बरनवाल सरधना सीएचसी पंहुचे। जांच के दौरान सीएचसी परिसर की सीसीटीवी फुटेज को गहनता से देखा गया। इसमें पाया गया कि गर्भवती किशोरी करीब डेढ़ घंटे परिसर में बेंच पर ही तड़पती रही। जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपनी लापरवाही छिपाने का प्रयास करते रहे।
घटना के दौरान ड्यूटी पर तैनात मुख्य पांच कर्मचारियों से जांच टीम ने पूछताछ की। यह भी सामने आया कि चिकित्सक और स्टाफ नर्स ने किशोरी की हालत बिगड़ने पर भी उपचार नहीं दिया। जांच टीम ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज किए। इसके बाद मौके पर तैनात चिकित्सक, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, वार्ड आया को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच टीम ने रिपोर्ट तैयार कर डीएम को सौंपने की बात कही है। उधर, पीड़िता की हालत अब ठीक है और महिला जिला अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है।
नवजात के शव के साथ भी होता रहा अमानवीय व्यवहार
दुष्कर्म पीड़िता किशोरी के प्रसव के बाद नवजात के शव के साथ भी अमानवीय व्यवहार होता रहा। स्वास्थ्य विभाग ने शव पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस को सौंप दिया। पुलिस यह शव शनिवार दोपहर तक थाने में लिए घूमती रही।
दुष्कर्म पीड़िता को जिला अस्पताल में रेफर करने के बाद नवजात के शव को भी पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया था। अधिकारियों के आदेश पर नवजात के शव पोस्टमार्टम व डीएनए की जांच होनी थी, लेकिन शुक्रवार को पोस्टमार्टम और डीएनए टेस्ट नहीं हो पाया था।
शव पुलिस को सौंप दिया गया था। इसके बाद थाना पुलिस ने नवजात के शव को सुरक्षा की दृष्टि से सरधना के निजी अस्पताल में फ्रिज में रखने के लिए सुपुर्द किया। शव निजी अस्पताल के बाहर एक कैंटीन के फ्रिज में रखा गया।
यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने पर पुलिस ने हड़बड़ी में शव वहां से निकाला। इसके बाद पुलिसकर्मी दोपहर बारह बजे तक शव लिए थाने में लिए ही घूमते रहे। शाम को नवजात के शव से डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लिया गया। इसके बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
इस संबंध में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रताप सिंह का कहना है कि शव को जांच सुरक्षा की दृष्टि निजी अस्पताल के फ्रिज में रखा गया था। जिला अस्पताल में ही फ्रिज की सुविधा को लेकर अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
दुष्कर्म के आरोपी का डीएनए सैंपल लिया, जेल गया
किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी सुभाष को गिरफ्तार कर पुलिस ने पूछताछ की। इसके बाद आरोपी का डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लिया गया। बाद में आरोपी से पूछताछ कर कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे जेल भेज दिया गया। थाना प्रभारी निरीक्षक प्रताप सिंह का कहना है आरोपी और नवजात का डीएनए टेस्ट कराया गया है। दोनों जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
धरना-प्रदर्शन कर दोषी स्वास्थ्यकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग
सीएचसी परिसर में दुष्कर्म पीड़िता किशोरी के खुले में प्रसव के मामले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को लेकर किसान संगठनों ने सीएचसी पर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान जांच करने पहुंची टीम की गाड़ी को रोककर कार्यकर्ताओं ने दोषी स्वास्थ्यकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग उठाई। भारतीय किसान यूनियन आंदोलनकारी गुट के पदाधिकारियों ने सीएचसी प्रभारी को सही जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।