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Meerut News: साल्वर गैंग के तीन सदस्य समेत सात जेल भेजे, 23 पर मुकदमा
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मेरठ। सीएसआईआर नेट परीक्षा में नकल मामले में सॉल्वर गैंग के सदस्यों और अभ्यर्थियों समेत 23 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। सॉल्वर गैंग के तीन सदस्यों और हरियाणा के चार अभ्यर्थियों को शनिवार को जेल भेज दिया गया है। इनमें तीन महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। सभी आरोपियों को शुक्रवार को ही हिरासत में ले लिया गया था। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
दिल्ली-देहरादून हाईवे स्थित सुभारती विवि में चल रहे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (एनएसईआईटी) के सेंटर पर हुई सीएसआईआर-नेट की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान एसटीएफ ने शुक्रवार सुबह छापा मारा था। टीम को सर्वर रूम में एनएसईआईटी के कर्मचारी विनीत के पास एक मोबाइल मिला था। जिसमें 15 अभ्यर्थियों के रोल नंबर और उनके सिस्टम का आईपी एड्रेस था।
एसटीएफ ने विनीत कुमार निवासी गांव मवीमीरा थाना दौराला मेरठ, कंप्यूटर लैब ऑपरेटर अंकुर सैनी नूरनगर थाना लिसाड़ी गेट मेरठ, विवि के आईटी मैनेजर अरुण शर्मा निवासी थाना सैदगढ़ी भीकमपुर बुलंदशहर को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा अभ्यर्थी अंकित निवासी गांव डोकी थाना दादरी जनपद झज्जर हरियाणा, तमन्ना निवासी ओमेक्स सिटी रोहतक हरियाणा, मोनिका कुमारी निवासी गांव माईना थाना कोतवाली रोहतक और ज्योति निवासी सांपला जनपद रोहतक हरियाणा को भी गिरफ्तार किया गया।
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जांच में सामने आया है कि 25 जुलाई के पेपर में भी नकल कराई गई थी। सर्वर रूम में दो लैपटॉप मिले, जिसमें एनी डेस्क रिमोट एक्सेस टूल से अभ्यर्थियों के कंप्यूटर की स्क्रीन शेयर की जा रही थी। एक मोबाइल भी एग्जाम कराने वाले कर्मचारी से मिला था। मोबाइल में चार अभ्यर्थियों के नाम रोल नंबर और उनके सिस्टम का आईपी एड्रेस मिला। इस आईपी को सेंटर के बाहर एक व्यक्ति को शेयर किया गया था। इनके प्रश्नपत्र को बाहर बैठा सॉल्वर हल कर रहा था।
सुभारती विवि प्रबंधन के कुलसचिव सैय्यद जफर हुसैन ने बताया था कि परीक्षा के आयोजन से विश्वविद्यालय प्रबंधन का कोई संबंध नहीं है। विवि ने यह सेंटर एनएसईआईटी को किराए पर दिया है। इसमें सर्वर से लेकर परीक्षा कराने की जिम्मेदारी उसी कंपनी की है। पकड़े गए आईटी मैनेजर अरुण शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है।
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इस तरह कंपनी के सर्वर में लगाई सेंध
एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर छह लैब में एनएसईआईटी कंपनी यह परीक्षा करा रही थी। इसके लिए कंपनी ने दो नोड सिस्टम तैयार किए थे। एक नोड सिस्टम से तीन लैब कनेक्ट थी। कंपनी ने अंकुर सैनी व राहुल देखरेख के लिए तैनात किया था। जिन्हें कंपनी के एग्जाम सॉफ्टवेयर को लैब के सिस्टम में रन कराने के लिए एक-एक बूटेबल पेन ड्राइव दी गई थी। हैकिंग के लिए तैयार किए सिस्टम में कंपनी की पेन ड्राइव की आवश्यकता थी। इसलिए विवि के आईटी मैनेजर अरूण शर्मा ने एनएसईआईटी कंपनी के सर्वर ऑपरेटर अंकुर सैनी को लालच देकर उसकी पेन ड्राइव ले ली। राहुल की पेन ड्राइव चोरी से उसके नोड सिस्टम से निकाल ली। दोनों पेन ड्राईव एक-एक करके आईटी मैनेजर ने अवैध सिस्टम में लगाई और एनी डेस्क सॉफ्वेयर से अजय उर्फ बच्ची निवासी झज्जर हरियाणा ने इस पेन ड्राइव में कोई अन्य फाइल इंस्टाल की। इससे परीक्षार्थी के क्लाइंट कंप्यूटर की कनेक्ट की गई डिस्प्ले कंपनी का सर्वर न पकड़ सके।
अरुण ने अंकुर को मास्टर कंप्यूटर में लगाने को दी पेन ड्राइव
एएसपी के मुताबिक, अरूण शर्मा ने एक पेन ड्राइव निकालकर अंकुर सैनी को वापस लैब-4 के मास्टर कंप्यूटर में लगाने को दी। दूसरी पेन ड्राइव लैब-एक के मास्टर कंप्यूटर में लगा दी थी। परीक्षा के दौरान चेकिंग होती तो अरूण शर्मा अपने साथियों के मोबाइल पर स्टार्ट, स्टाॅप का मेसेज भेज देता था। वह लोग कुछ देर के लिए काम बंद कर देते थे। जिससे चेकिंग के दौरान संबंधित अभ्यर्थी पकड़े न जा सकें। अरूण शर्मा को दीपक व अजय उर्फ बच्ची, मोनू उर्फ मनीष, अनिल राठी आदि प्रति अभ्यर्थी 50 हजार रुपये देते थे। इसमें से वह कंप्यूटर लैब असिस्टेंट विनीत कुमार व एनएसईआईटी कंपनी के सर्वर ऑपरेटर अंकुर सैनी को 10-10 हजार रुपये प्रति अभ्यर्थी देता था। गिरफ्तार अभियुक्तों के विरूद्ध थाना जानी में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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दिल्ली-देहरादून हाईवे स्थित सुभारती विवि में चल रहे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (एनएसईआईटी) के सेंटर पर हुई सीएसआईआर-नेट की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान एसटीएफ ने शुक्रवार सुबह छापा मारा था। टीम को सर्वर रूम में एनएसईआईटी के कर्मचारी विनीत के पास एक मोबाइल मिला था। जिसमें 15 अभ्यर्थियों के रोल नंबर और उनके सिस्टम का आईपी एड्रेस था।
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एसटीएफ ने विनीत कुमार निवासी गांव मवीमीरा थाना दौराला मेरठ, कंप्यूटर लैब ऑपरेटर अंकुर सैनी नूरनगर थाना लिसाड़ी गेट मेरठ, विवि के आईटी मैनेजर अरुण शर्मा निवासी थाना सैदगढ़ी भीकमपुर बुलंदशहर को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा अभ्यर्थी अंकित निवासी गांव डोकी थाना दादरी जनपद झज्जर हरियाणा, तमन्ना निवासी ओमेक्स सिटी रोहतक हरियाणा, मोनिका कुमारी निवासी गांव माईना थाना कोतवाली रोहतक और ज्योति निवासी सांपला जनपद रोहतक हरियाणा को भी गिरफ्तार किया गया।
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जांच में सामने आया है कि 25 जुलाई के पेपर में भी नकल कराई गई थी। सर्वर रूम में दो लैपटॉप मिले, जिसमें एनी डेस्क रिमोट एक्सेस टूल से अभ्यर्थियों के कंप्यूटर की स्क्रीन शेयर की जा रही थी। एक मोबाइल भी एग्जाम कराने वाले कर्मचारी से मिला था। मोबाइल में चार अभ्यर्थियों के नाम रोल नंबर और उनके सिस्टम का आईपी एड्रेस मिला। इस आईपी को सेंटर के बाहर एक व्यक्ति को शेयर किया गया था। इनके प्रश्नपत्र को बाहर बैठा सॉल्वर हल कर रहा था।
सुभारती विवि प्रबंधन के कुलसचिव सैय्यद जफर हुसैन ने बताया था कि परीक्षा के आयोजन से विश्वविद्यालय प्रबंधन का कोई संबंध नहीं है। विवि ने यह सेंटर एनएसईआईटी को किराए पर दिया है। इसमें सर्वर से लेकर परीक्षा कराने की जिम्मेदारी उसी कंपनी की है। पकड़े गए आईटी मैनेजर अरुण शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है।
इस तरह कंपनी के सर्वर में लगाई सेंध
एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर छह लैब में एनएसईआईटी कंपनी यह परीक्षा करा रही थी। इसके लिए कंपनी ने दो नोड सिस्टम तैयार किए थे। एक नोड सिस्टम से तीन लैब कनेक्ट थी। कंपनी ने अंकुर सैनी व राहुल देखरेख के लिए तैनात किया था। जिन्हें कंपनी के एग्जाम सॉफ्टवेयर को लैब के सिस्टम में रन कराने के लिए एक-एक बूटेबल पेन ड्राइव दी गई थी। हैकिंग के लिए तैयार किए सिस्टम में कंपनी की पेन ड्राइव की आवश्यकता थी। इसलिए विवि के आईटी मैनेजर अरूण शर्मा ने एनएसईआईटी कंपनी के सर्वर ऑपरेटर अंकुर सैनी को लालच देकर उसकी पेन ड्राइव ले ली। राहुल की पेन ड्राइव चोरी से उसके नोड सिस्टम से निकाल ली। दोनों पेन ड्राईव एक-एक करके आईटी मैनेजर ने अवैध सिस्टम में लगाई और एनी डेस्क सॉफ्वेयर से अजय उर्फ बच्ची निवासी झज्जर हरियाणा ने इस पेन ड्राइव में कोई अन्य फाइल इंस्टाल की। इससे परीक्षार्थी के क्लाइंट कंप्यूटर की कनेक्ट की गई डिस्प्ले कंपनी का सर्वर न पकड़ सके।
अरुण ने अंकुर को मास्टर कंप्यूटर में लगाने को दी पेन ड्राइव
एएसपी के मुताबिक, अरूण शर्मा ने एक पेन ड्राइव निकालकर अंकुर सैनी को वापस लैब-4 के मास्टर कंप्यूटर में लगाने को दी। दूसरी पेन ड्राइव लैब-एक के मास्टर कंप्यूटर में लगा दी थी। परीक्षा के दौरान चेकिंग होती तो अरूण शर्मा अपने साथियों के मोबाइल पर स्टार्ट, स्टाॅप का मेसेज भेज देता था। वह लोग कुछ देर के लिए काम बंद कर देते थे। जिससे चेकिंग के दौरान संबंधित अभ्यर्थी पकड़े न जा सकें। अरूण शर्मा को दीपक व अजय उर्फ बच्ची, मोनू उर्फ मनीष, अनिल राठी आदि प्रति अभ्यर्थी 50 हजार रुपये देते थे। इसमें से वह कंप्यूटर लैब असिस्टेंट विनीत कुमार व एनएसईआईटी कंपनी के सर्वर ऑपरेटर अंकुर सैनी को 10-10 हजार रुपये प्रति अभ्यर्थी देता था। गिरफ्तार अभियुक्तों के विरूद्ध थाना जानी में मुकदमा दर्ज किया गया है।