घोषित हुए सातों उम्मीदवार :गठबंधन में न पड़ जाए दरार, सिवालखास से सपा नेता को रालोद के सिंबल पर लड़ाकर भरपाई की कोशिश
एक तरह देखा जाए तो सारी सीटों पर सपा से जुड़े रहे उम्मीदवारों को ही टिकट को सौगात मिली है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे कहीं गठबंधन तो कमजोर नहीं पड़ जाएगा, क्योंकि इसका विरोध भी शुरू हो गया है।
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सात सीटों में से पांच सपा के खाते में गई हैं, जबकि दो रालोद के खाते में। हालांकि जो दो सीटें रालोद को मिली हैं, उनमें से सिवालखास के अलावा कैंट से प्रत्याशी बनाई गईं मनीषा अहलावत भी सपा से ही सरधना से टिकट मांग रही थीं। यानी एक तरह देखा जाए तो सारी सीटों पर सपा से जुड़े रहे उम्मीदवारों को ही टिकट को सौगात मिली है।
इसी वजह से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे कहीं गठबंधन तो कमजोर नहीं पड़ जाएगा, क्योंकि इसका विरोध भी शुरू हो गया है। हालांकि सपाई इसकी भरपाई ऐसे कर रहे हैं कि रालोद के खाते में दो सीटें ही गईं जो पहले से तय था।
विधानसभा सीट प्रत्याशी सिंबल
मेरठ शहर रफीक अंसारी सपा
मेरठ दक्षिण आदिल चौधरी सपा
सरधना अतुल प्रधान सपा
हस्तिनापुर योगेश वर्मा सपा
किठौर शाहिद मंजूर सपा
कैंट मनीषा अहलावत रालोद
सिवालखास गुलाम मोहम्मद रालोद
कहीं पड़ जाए भारी
सिवालखास क्षेत्र में बने सियासी माहौल का असर आसपास की सीटों पर भी पड़ सकता है। वहीं, मुजफ्फरनगर में कोई मुस्लिम प्रत्याशी न देना और मेरठ की सात में से चार सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशी मुस्लिम होना, कहीं सियासी लिहाज से बड़े नुकसान का कारण तो नहीं बन जाएगा।
भाजपा कर सकती है भुनाने की कोशिश
सपा-रालोद गठबंधन में सिवालखास सीट पर हुई खींचतान, रालोद के किसी जाट प्रत्याशी के बजाय सपा के ही मुस्लिम चेहरे को रालोद के सिंबल पर लड़ाने को भाजपा मुद्दा बना सकती है। इससे रालोद के वोटरों को गठबंधन से नाराज करने की कोशिश कर अपनी वोटबैंक बनाने का प्रयास कर सकती है।