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घरेलू क्रिकेट से दूर हुए सीनियर... नतीजा, घर में मिली हार : मदनलाल
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गंगानगर (मेरठ)। 1983 क्रिकेट वर्ल्डकप टीम के सदस्य मदनलाल शर्मा ने कहा कि सीनियर खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट से दूर हो गए हैं। इस कारण वे भारत के पिचों पर संघर्ष कर रहे हैं। इसका नतीजा न्यूजीलैंड से मिली करारी हार है। सोमवार को वे आईआईएमटी विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे।वर्ल्डकप फाइनल में वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज डेसमंड हेंस, विवियन रिचर्ड्स और लैरी गोम्स का विकेट लेने वाले मदनलाल ने युवाओं को एकाग्रता से खेलने की सलाह दी।
आईआईएमटी विवि में मदनलाल का कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता व प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमारी टीम विश्व की सबसे अच्छी टीमों में शुमार है। मुंबई और पुणे की पिच ठीक नहीं थीं। इस कारण भी बल्लेबाज संघर्ष करते दिखे। दोनों ही मैच मात्र तीन दिन में समाप्त हो गए। यह टेस्ट मैच के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। उन्होंने टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा के बारे में कहा कि एक खराब प्रदर्शन से खिलाड़ी को बेकार नहीं कहा जा सकता है।
स्पिन नहीं खेल पाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आजकल के खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट कम खेलते हैं, जबकि स्पिन गेंदों का सबसे अच्छा अभ्यास घरेलू मैचों से होता है। अलग-अलग स्थानों की पिच से अच्छा अभ्यास खिलाड़ी को आगे ले जाने में मदद करता है। उन्होंने घरेलू क्रिकेट के लिए समय न मिलने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लगातार टी-20, वंडे, टेस्ट मैचों की शृंखला के चलते खिलाड़ी को खुद को निखारने का पूरा समय नहीं मिल पाता है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए कहा कि हमारा मुकाबला विश्व की सबसे खतरनाक टीम से होगा। वहां विकेट भी अलग हैं। वहां सीनियर खिलाड़ियों को खुद को साबित करना होगा।
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निर्णय लेने की क्षमता का टेस्ट
टेक्नोलॉजी के प्रयोग पर मदनलाल ने कहा कि यह खेल में मदद करती है, परंतु सही समय पर निर्णय लेने की दक्षता केवल हमारे मस्तिष्क के पास है। हर मैच में एक कप्तान का टेस्ट होता है। अच्छे निर्णय टीम को जीत की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की फिटनेस भी बहुत मायने रखती है।
खिलाड़ी के लिए मैदान पर रीटेक नहीं मिलता
आने वाले क्रिकेट के हीरो के सवाल पर उन्होंने कहा एक फिल्म के हीरो और खिलाड़ी में अंतर होता है। हीरो फिल्मों में अपना हुनर दिखाते हैं। वहीं, खिलाड़ी मैदान पर, हां खिलाड़ियों को मैदान पर रीटेक नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि जब हमारी टीम ने 1983 में विश्व कप जीता तो उसके बाद हमें पता चला कि हमें लोग कितना प्यार करते हैं। उन्होंने फिल्म 83 को बेस्ट मूवी बताया।
जीवन सरल, हम खुद कठिन बनाते हैं
मदनलाल ने छात्र-छात्राओं से रूबरू होते हुए कहा कि जीवन बहुत सरल है, परंतु हम उसे कठिन बना देते हैं। उन्होंने कहा अधिक मोटीवेशन खुद से पा सकते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कर्म करते रहो जो भगवान आपको दे रहे हैं उसका आभार जताते रहो। इस मौके पर राजबीर कौशिक, विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन डॉ. संदीप कुमार, आईआईएमटी एकेडमी के ऑपरेशन हेड उदित गौड़ मौजूद रहे।
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आईआईएमटी विवि में मदनलाल का कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता व प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमारी टीम विश्व की सबसे अच्छी टीमों में शुमार है। मुंबई और पुणे की पिच ठीक नहीं थीं। इस कारण भी बल्लेबाज संघर्ष करते दिखे। दोनों ही मैच मात्र तीन दिन में समाप्त हो गए। यह टेस्ट मैच के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। उन्होंने टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा के बारे में कहा कि एक खराब प्रदर्शन से खिलाड़ी को बेकार नहीं कहा जा सकता है।
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स्पिन नहीं खेल पाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आजकल के खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट कम खेलते हैं, जबकि स्पिन गेंदों का सबसे अच्छा अभ्यास घरेलू मैचों से होता है। अलग-अलग स्थानों की पिच से अच्छा अभ्यास खिलाड़ी को आगे ले जाने में मदद करता है। उन्होंने घरेलू क्रिकेट के लिए समय न मिलने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लगातार टी-20, वंडे, टेस्ट मैचों की शृंखला के चलते खिलाड़ी को खुद को निखारने का पूरा समय नहीं मिल पाता है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए कहा कि हमारा मुकाबला विश्व की सबसे खतरनाक टीम से होगा। वहां विकेट भी अलग हैं। वहां सीनियर खिलाड़ियों को खुद को साबित करना होगा।
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निर्णय लेने की क्षमता का टेस्ट
टेक्नोलॉजी के प्रयोग पर मदनलाल ने कहा कि यह खेल में मदद करती है, परंतु सही समय पर निर्णय लेने की दक्षता केवल हमारे मस्तिष्क के पास है। हर मैच में एक कप्तान का टेस्ट होता है। अच्छे निर्णय टीम को जीत की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की फिटनेस भी बहुत मायने रखती है।
खिलाड़ी के लिए मैदान पर रीटेक नहीं मिलता
आने वाले क्रिकेट के हीरो के सवाल पर उन्होंने कहा एक फिल्म के हीरो और खिलाड़ी में अंतर होता है। हीरो फिल्मों में अपना हुनर दिखाते हैं। वहीं, खिलाड़ी मैदान पर, हां खिलाड़ियों को मैदान पर रीटेक नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि जब हमारी टीम ने 1983 में विश्व कप जीता तो उसके बाद हमें पता चला कि हमें लोग कितना प्यार करते हैं। उन्होंने फिल्म 83 को बेस्ट मूवी बताया।
जीवन सरल, हम खुद कठिन बनाते हैं
मदनलाल ने छात्र-छात्राओं से रूबरू होते हुए कहा कि जीवन बहुत सरल है, परंतु हम उसे कठिन बना देते हैं। उन्होंने कहा अधिक मोटीवेशन खुद से पा सकते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कर्म करते रहो जो भगवान आपको दे रहे हैं उसका आभार जताते रहो। इस मौके पर राजबीर कौशिक, विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन डॉ. संदीप कुमार, आईआईएमटी एकेडमी के ऑपरेशन हेड उदित गौड़ मौजूद रहे।