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संयम, सदाचार और साधना से ही आत्मकल्याण संभव : विमर्श सागर
Sun, 01 Mar 2026 05:46 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sun, 01 Mar 2026 05:46 PM IST
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कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
भक्तामर विधान एवं पाठ के 22 वें दिन पूजा-अर्चना के लिए उमड़े श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 22वें दिन धार्मिक उल्लास का वातावरण रहा। विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ कराया। जैनाचार्य 108 विमर्श सागर महाराज ने कहा कि संकल्प ही आत्मकल्याण का प्रथम सोपान है। संयम, सदाचार और साधना के माध्यम से ही आत्मकल्याण संभव है।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने जीवन में दृढ़ संकल्प धारण कर लेता है तो उसका जीवन एक सीढ़ी ऊपर उठ जाता है और वह आत्मोन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। मुनिराज ने कहा कि आज मनुष्य बाहरी साधनों में सुख खोजता है, जबकि वास्तविक सुख और शांति आत्मा की साधना में निहित है। ब्रह्मचर्य की साधना स्वयं की आत्मा की साधना है। इसे जीवन में निरंतर अपनाते रहने से आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य नवीन जैन, नीतीश जैन, पीयूष, राहुल व अतिशय जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा उषा जैन, नवीन जैन व नीतीश जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन ऊषा जैन, तनु, जीवांशी, मानसी व शिवानी जैन ने की। भगवान आदिनाथ की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित कर भक्तामर विधान आरंभ हुआ। विधान में 86 परिवारों ने सहभागिता निभाई। डॉ. ध्रुव कुमार जैन, रीना जैन, डॉ. श्रेया, शोभित जैन, वर्धन जैन, नरेंद्र जैन परिवार तथा मोनिका जैन परिवार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई।
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महामंत्री मुकेश जैन ने भक्तामर पाठ का शुभारंभ कराया। गाजियाबाद, रुड़की, नहटौर व गन्नौर से आए श्रद्धालुओं ने पाठ वाचन किया। भजन संध्या में सुनील जैन व प्रवीण जैन ने मधुर प्रस्तुति दी। अंत में आरती व प्रश्नमंच के बाद विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम की सफलता में पदाधिकारियों व समाजसेवियों का विशेष सहयोग
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 22वें दिन धार्मिक उल्लास का वातावरण रहा। विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ कराया। जैनाचार्य 108 विमर्श सागर महाराज ने कहा कि संकल्प ही आत्मकल्याण का प्रथम सोपान है। संयम, सदाचार और साधना के माध्यम से ही आत्मकल्याण संभव है।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने जीवन में दृढ़ संकल्प धारण कर लेता है तो उसका जीवन एक सीढ़ी ऊपर उठ जाता है और वह आत्मोन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। मुनिराज ने कहा कि आज मनुष्य बाहरी साधनों में सुख खोजता है, जबकि वास्तविक सुख और शांति आत्मा की साधना में निहित है। ब्रह्मचर्य की साधना स्वयं की आत्मा की साधना है। इसे जीवन में निरंतर अपनाते रहने से आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
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स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य नवीन जैन, नीतीश जैन, पीयूष, राहुल व अतिशय जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा उषा जैन, नवीन जैन व नीतीश जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन ऊषा जैन, तनु, जीवांशी, मानसी व शिवानी जैन ने की। भगवान आदिनाथ की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित कर भक्तामर विधान आरंभ हुआ। विधान में 86 परिवारों ने सहभागिता निभाई। डॉ. ध्रुव कुमार जैन, रीना जैन, डॉ. श्रेया, शोभित जैन, वर्धन जैन, नरेंद्र जैन परिवार तथा मोनिका जैन परिवार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई।
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महामंत्री मुकेश जैन ने भक्तामर पाठ का शुभारंभ कराया। गाजियाबाद, रुड़की, नहटौर व गन्नौर से आए श्रद्धालुओं ने पाठ वाचन किया। भजन संध्या में सुनील जैन व प्रवीण जैन ने मधुर प्रस्तुति दी। अंत में आरती व प्रश्नमंच के बाद विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम की सफलता में पदाधिकारियों व समाजसेवियों का विशेष सहयोग