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आत्मबल और दृढ़ संकल्प ही साधना की सबसे बड़ी शक्ति: मुनि भाव भूषण
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- आचार्य धर्म भूषण के तप-त्याग का स्मरण कर भावुक हुए श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में 13वें दिन 140 परिवार शामिल हुए। श्रद्धा और भक्ति के साथ जिनेंद्र भगवान की आराधना की गई।
शांतिधारा सुधा जैन, प्रकाशचंद जैन, अनुराग जैन, तरु जैन, शाश्वत जैन और अनंत जैन परिवार ने की। मंगलवार को विधान में शामिल होने के लिए कई जनपदों से श्रद्धालु पहुंचे। मुनि भाव भूषण महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य धर्म भूषण महाराज के तप, त्याग, संयम और साधनामय जीवन का विस्तार से स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि आचार्य धर्म भूषण महाराज का संपूर्ण जीवन जैन धर्म के सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम छह वर्षों तक प्रथम निशियाजी के घने जंगलों में रहकर कठोर तप और साधना की।
मुनि ने कहा कि आचार्य धर्म भूषण महाराज ने आत्मकल्याण और धर्म प्रभावना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका तपस्वी जीवन आज भी साधकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आचार्य श्री के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा धर्म, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
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विधान की मांगलिक क्रियाएं आगमोक्त विधिविधान और शुद्ध मंत्रोच्चार के साथ बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी के निर्देशन में संपन्न कराई गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में 13वें दिन 140 परिवार शामिल हुए। श्रद्धा और भक्ति के साथ जिनेंद्र भगवान की आराधना की गई।
शांतिधारा सुधा जैन, प्रकाशचंद जैन, अनुराग जैन, तरु जैन, शाश्वत जैन और अनंत जैन परिवार ने की। मंगलवार को विधान में शामिल होने के लिए कई जनपदों से श्रद्धालु पहुंचे। मुनि भाव भूषण महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य धर्म भूषण महाराज के तप, त्याग, संयम और साधनामय जीवन का विस्तार से स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि आचार्य धर्म भूषण महाराज का संपूर्ण जीवन जैन धर्म के सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम छह वर्षों तक प्रथम निशियाजी के घने जंगलों में रहकर कठोर तप और साधना की।
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मुनि ने कहा कि आचार्य धर्म भूषण महाराज ने आत्मकल्याण और धर्म प्रभावना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका तपस्वी जीवन आज भी साधकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आचार्य श्री के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा धर्म, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
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विधान की मांगलिक क्रियाएं आगमोक्त विधिविधान और शुद्ध मंत्रोच्चार के साथ बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी के निर्देशन में संपन्न कराई गई।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद