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सीसीएसयू की मार्कशीट में अब नहीं होगी गलती
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 12 Sep 2016 02:26 AM IST
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सीसीएसयू का लोगो।
- फोटो : अमर उजाला
सीसीएसयू की मार्कशीट में अब स्पेलिंग मिस्टेक पर ध्यान दिया जाएगा। छात्र ने अगर गलती कर भी दी है तो उसको क्रास चेक किया जाएगा। परीक्षा फार्म भरने से पहले छात्र को जागरूक किया जाएगा। नए सत्र के एडमिशन प्रक्रिया में तो रजिस्ट्रेशन के दौरान ही स्पेलिंग को लेकर सतर्कता बरती जाएगी। इससे छात्रों को वेरिफिकेशन आसान हो जाएगा। नौकरी लगने पर उनके काम अटकेगा नहीं।
मेरठ और सहारनपुर मंडल से हर साल करीब छह लाख प्राइवेट और रेग्युलर छात्र-छात्राएं सीसीएसयू की परीक्षा देते हैं। विवि हर साल इतनी ही मार्कशीट जारी करता है। मार्कशीट में छात्र और उसके पिता के नाम में स्पेलिंग मिस्टेक, सरनेम में स्पेलिंग मिस्टेक होना आम बात है। ऐसे केस हजारों में हैं। छात्रों द्वारा गलत स्पेलिंग लिख देने तो कभी विवि के स्तर से भी स्पेलिंग की गलती हो जाती है। मार्कशीट जारी होने पर बहुत से छात्र इस गलती पर ध्यान नहीं देते।
नौकरी में जब उनका वेरिफिकेशन होता है यह गलती सुधरवाने के लिए उन्हें चक्कर लगाने पड़ते हैं। नौकरी के काम में रुकावट आती है। मार्कशीट ही नहीं डिग्री में भी यह गलती होती है। जब से विवि ने प्रिंटेड डिग्री देनी शुरू की है स्पेलिंग क्रास चेक होनी लगी है। डिग्री प्रिंट होने से पहले विवि रिकॉर्ड में उसका मिलान होता है। रजिस्ट्रार दीप चंद्र का कहना है स्पेलिंग मिस्टेक के काफी मामले आते हैं। छात्र ऑनलाइन अपने और पैरेंट्स के नाम की जो स्पेलिंग लिखते हैं, वही मार्कशीट और डिग्री पर लिखी जाती है। यह गलती न हो इसके लिए विवि क्रास चेक की योजना बना रहा है। स्पेलिंग का मिलान किया जाएगा। नए सत्र के रजिस्ट्रेशन के दौरान स्पेलिंग मिस्टेक न हो इसके लिए अलर्ट की व्यवस्था की जाएगी। मार्कशीट प्रिंट करने से पहले डाटा में क्रास चेक की व्यवस्था की जाएगी।
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मेरठ और सहारनपुर मंडल से हर साल करीब छह लाख प्राइवेट और रेग्युलर छात्र-छात्राएं सीसीएसयू की परीक्षा देते हैं। विवि हर साल इतनी ही मार्कशीट जारी करता है। मार्कशीट में छात्र और उसके पिता के नाम में स्पेलिंग मिस्टेक, सरनेम में स्पेलिंग मिस्टेक होना आम बात है। ऐसे केस हजारों में हैं। छात्रों द्वारा गलत स्पेलिंग लिख देने तो कभी विवि के स्तर से भी स्पेलिंग की गलती हो जाती है। मार्कशीट जारी होने पर बहुत से छात्र इस गलती पर ध्यान नहीं देते।
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नौकरी में जब उनका वेरिफिकेशन होता है यह गलती सुधरवाने के लिए उन्हें चक्कर लगाने पड़ते हैं। नौकरी के काम में रुकावट आती है। मार्कशीट ही नहीं डिग्री में भी यह गलती होती है। जब से विवि ने प्रिंटेड डिग्री देनी शुरू की है स्पेलिंग क्रास चेक होनी लगी है। डिग्री प्रिंट होने से पहले विवि रिकॉर्ड में उसका मिलान होता है। रजिस्ट्रार दीप चंद्र का कहना है स्पेलिंग मिस्टेक के काफी मामले आते हैं। छात्र ऑनलाइन अपने और पैरेंट्स के नाम की जो स्पेलिंग लिखते हैं, वही मार्कशीट और डिग्री पर लिखी जाती है। यह गलती न हो इसके लिए विवि क्रास चेक की योजना बना रहा है। स्पेलिंग का मिलान किया जाएगा। नए सत्र के रजिस्ट्रेशन के दौरान स्पेलिंग मिस्टेक न हो इसके लिए अलर्ट की व्यवस्था की जाएगी। मार्कशीट प्रिंट करने से पहले डाटा में क्रास चेक की व्यवस्था की जाएगी।
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