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Meerut News: सुरक्षा या सजा... खाकी के साये में हर पल नजरबंद, बहन की शादी टलने का डर

Sat, 31 Jan 2026 02:46 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jan 2026 02:46 AM IST
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Security or punishment... under constant surveillance, fearing the postponement of her sister's wedding.
कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की युवती रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय देने के बजाय पुलिस पहरे में नजरबंद कर दिया गया है। मृतका सुनीता के पति सतेंद्र और पुत्र नरसी ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति से होने के कारण उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है और उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
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मृतका के बेटे नरसी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके घर को चौबीसों घंटे पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें किसी भी रिश्तेदार से मिलने या घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। नरसी ने दावा किया कि प्रशासन उनके फोन तक टैप करवा रहा है। इस सख्ती का सबसे बुरा असर परिवार के सामाजिक और निजी जीवन पर पड़ रहा है।
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नरसी के अनुसार उनकी बहन रूबी का विवाह इसी वर्ष अप्रैल में प्रस्तावित है। लड़के पक्ष के लोग शादी के लिए तैयार हैं लेकिन पुलिस की पाबंदियों के कारण उनसे मुलाकात और बातचीत नहीं हो पा रही है। यदि यही स्थिति रही तो रूबी की शादी टल सकती है। जिससे परिवार की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
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पुलिस पर धमकाने का आरोप

इस मामले में पुलिस पर पीड़ित पक्ष को धमकाने का आरोप भी लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि मीडिया में खबरें छपने के बाद पुलिस पीड़ित परिवार के घर पहुंची और नरसी को धमकाया है। नरसी का आरोप है कि उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव में रखा जा रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि अनुसूचित जाति से होने के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल रहा और प्रशासन का रवैया पक्षपाती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा और न्याय नहीं मिला तो मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।


वादों से पीछे हटने का आरोप
पीड़ित परिवार ने बताया कि घटना के बाद प्रशासन ने कई बड़े आश्वासन दिए थे जो अब तक अधूरे हैं। नरसी ने बताया कि बृहस्पतिवार को तहसील में उन्होंने एसडीएम उदित नारायण सेंगर और सीओ आशुतोष से मुलाकात की थी। नरसी ने कहा कि इस दौरान उन्हें बताया गया कि गोशाला में नौकरी दी जाएगी, जबकि पूर्व में दौराला या खतौली शुगर मिल में नौकरी का वादा किया था। वहीं प्रशासन की ओर से 50 लाख रुपये के मुआवजे का आश्वासन मिला था लेकिन अब तक केवल 10 लाख रुपये ही मिले हैं। आरोप है कि पिस्टल लाइसेंस और भूमि के पट्टे की मांग पर भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।



सियासी गलियारों में गूंजा था मामला

कपसाड़ कांड ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मचा दी थी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार की घेराबंदी की थी। राजनीतिक दबाव को देखते हुए घटना के बाद से ही गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और 26 जनवरी तक बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध भी लगाया गया था।



पुलिस बोली आरोप निराधार

इन गंभीर आरोपों पर सीओ सरधना आशुतोष कुमार का कहना है कि पीड़ित परिवार को शासन के निर्देशानुसार सुरक्षा मुहैया कराई गई है। उनके आने-जाने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने परिवार के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि जो भी सहायता राशि और अन्य वादे किए गए थे उनकी कागजी कार्रवाई जारी है।




आरोपी पारस की उम्र पर सुनवाई आज

मामले के मुख्य आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर शनिवार को अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। आरोपी के परिजनों ने उसे नाबालिग बताते हुए मामला किशोर न्याय बोर्ड में चलाने की मांग की है। अदालत ने इस संबंध में स्कूल के शिक्षक को मूल शैक्षिक प्रमाण पत्रों के साथ तलब किया है।
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