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झुलसे मरीजों को मेडिकल में जल्द मिलेगा उपचार
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मेरठ। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज में जल्द ही बर्न यूनिट की सुविधा शुरू होगी। इसकी इमारत बन चुकी है। इसे मेडिकल कॉलेज को सौंपे जाने से पूर्व अंतिम रूप दिया जा रहा है। शासन ने इसके लिए पांच करोड़ से अधिक का बजट पारित किया था।
इसमें पांच बेड की आईसीयू बनेगी, जबकि 20 बेड का जनरल वार्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए सर्जन और अन्य स्टाफ के लिए भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने शासन को पत्र लिखा है। मेडिकल कॉलेज में आने वाले गंभीर मरीजों को अभी तक रेफर किया जाता है। झुलसे मरीजों को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसलिए बर्न वार्ड को पूरी तरह विषाणु मुक्त रखा जाएगा। नए वार्ड में महिलाओं का खास ख्याल रखा जाएगा। दूसरे फ्लोर पर इसको प्रस्तावित किया गया है। एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए भी खास व्यवस्था की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में हर दिन 20 से 25 मरीज झुलसे रोगी आते हैं। इनमें कम झुलसे मरीजों को इलाज मुहैया हो जाता है। वहीं, महीने में 10 से 12 मरीज ऐसे आते हैं जिन्हें रेफर करना पड़ता है। साल भर में करीब 100 से 150 गंभीर मरीज रेफर किए जाते हैं।
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मार्च तक शुरू होने की उम्मीद
नई बर्न यूनिट लगभग तैयार है। उम्मीद है मार्च तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। मैं इसका निरीक्षण कर चुका हूं। फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। यहां के लिए अन्य स्टाफ व सर्जन की तैनाती की कोशिश की जा रही है।-डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
जिला अस्पताल में नहीं बर्न यूनिट
पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में भी बर्न यूनिट नहीं है। यहां से मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। हालांकि डायलिसिस यूनिट वाली बिल्डिंग में दस बेड का बर्न वार्ड है। यह चिकित्सक और अन्य स्टाफ न होने के कारण संचालित नहीं हो पा रहा है।
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इसमें पांच बेड की आईसीयू बनेगी, जबकि 20 बेड का जनरल वार्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए सर्जन और अन्य स्टाफ के लिए भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने शासन को पत्र लिखा है। मेडिकल कॉलेज में आने वाले गंभीर मरीजों को अभी तक रेफर किया जाता है। झुलसे मरीजों को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसलिए बर्न वार्ड को पूरी तरह विषाणु मुक्त रखा जाएगा। नए वार्ड में महिलाओं का खास ख्याल रखा जाएगा। दूसरे फ्लोर पर इसको प्रस्तावित किया गया है। एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए भी खास व्यवस्था की जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज में हर दिन 20 से 25 मरीज झुलसे रोगी आते हैं। इनमें कम झुलसे मरीजों को इलाज मुहैया हो जाता है। वहीं, महीने में 10 से 12 मरीज ऐसे आते हैं जिन्हें रेफर करना पड़ता है। साल भर में करीब 100 से 150 गंभीर मरीज रेफर किए जाते हैं।
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मार्च तक शुरू होने की उम्मीद
नई बर्न यूनिट लगभग तैयार है। उम्मीद है मार्च तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। मैं इसका निरीक्षण कर चुका हूं। फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। यहां के लिए अन्य स्टाफ व सर्जन की तैनाती की कोशिश की जा रही है।-डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
जिला अस्पताल में नहीं बर्न यूनिट
पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में भी बर्न यूनिट नहीं है। यहां से मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। हालांकि डायलिसिस यूनिट वाली बिल्डिंग में दस बेड का बर्न वार्ड है। यह चिकित्सक और अन्य स्टाफ न होने के कारण संचालित नहीं हो पा रहा है।