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कृषि विवि के वैज्ञानिक दे रहे पशुपालकों को सलाह
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मोदीपुरम। लॉकडाउन के चलते मवेशियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निस्तारण के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के वैज्ञानिक सलाह प्रदान कर रहे हैं।
पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि देशव्यापी लॉकडाउन को एक माह से अधिक बीत गया है। इस दौरान पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों ने 100 से अधिक पशुओं को चिकित्सा, चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया है। जिनमें 54 गाय, भैंस तथा 43 कुत्ते, बिल्लियां शामिल हैं। पशु चिकित्सा के मेडिसिन विभाग द्वारा विशेष परिस्थिति के दृष्टिगत पशुपालक को उक्त सुविधा उपलब्ध कराई है। लॉकडाउन अवधि में गोवंशीय पशुओं में अंतरू एवं वाह्य परजीवियों से फैलने से तेज बुखार, डायरिया, थैलेरिओसिस, रेड वाटर इत्यादि बीमारियां ज्यादा मिल रही हैं। वहीं, कुत्ते, बिल्लियों में भूख न लगना, बुखार, लीवर एवं किडनी से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। मेरठ के अतिरिक्त अन्य जिले मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, संभल, बरेली, रामपुर, अमरोहा इत्यादि के पशुपालकों को दूरभाष पर चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। पशु चिकित्सा महाविद्यालय के विभिन्न विभागों मेडिसिन, सर्जरी एवं गायनोकोलॉजी के चिकित्सकों द्वारा पशुओं में अल्ट्रासाउंड एवं सर्जरी की सुविधा प्रदान की जा रही है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरके मित्तल ने का कहना है कि विश्वविद्यालय किसानों की सेवा में तत्पर है। पशुपालक पशुओं की बीमारियों से संबंधित जानकारी एवं चिकित्सा संबंधी परामर्श विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों से ले सकते हैं।
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पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि देशव्यापी लॉकडाउन को एक माह से अधिक बीत गया है। इस दौरान पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों ने 100 से अधिक पशुओं को चिकित्सा, चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया है। जिनमें 54 गाय, भैंस तथा 43 कुत्ते, बिल्लियां शामिल हैं। पशु चिकित्सा के मेडिसिन विभाग द्वारा विशेष परिस्थिति के दृष्टिगत पशुपालक को उक्त सुविधा उपलब्ध कराई है। लॉकडाउन अवधि में गोवंशीय पशुओं में अंतरू एवं वाह्य परजीवियों से फैलने से तेज बुखार, डायरिया, थैलेरिओसिस, रेड वाटर इत्यादि बीमारियां ज्यादा मिल रही हैं। वहीं, कुत्ते, बिल्लियों में भूख न लगना, बुखार, लीवर एवं किडनी से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। मेरठ के अतिरिक्त अन्य जिले मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, संभल, बरेली, रामपुर, अमरोहा इत्यादि के पशुपालकों को दूरभाष पर चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। पशु चिकित्सा महाविद्यालय के विभिन्न विभागों मेडिसिन, सर्जरी एवं गायनोकोलॉजी के चिकित्सकों द्वारा पशुओं में अल्ट्रासाउंड एवं सर्जरी की सुविधा प्रदान की जा रही है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरके मित्तल ने का कहना है कि विश्वविद्यालय किसानों की सेवा में तत्पर है। पशुपालक पशुओं की बीमारियों से संबंधित जानकारी एवं चिकित्सा संबंधी परामर्श विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों से ले सकते हैं।
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