SC-ST Act: हाथों में तिरंगा लेकर हिंसा करते रहे उपद्रवी, जमकर तोड़फोड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्र की अस्मिता और गौरव के प्रतीक तिरंगे झंडे का ऐसा अपमान शायद ही इस देश में पहले कभी हुआ हो। हाथों में तिरंगा थामे उपद्रवियों ने हिंसा का ऐसा खेल खेला, जिसमें तिरंगे की मान मर्यादा को भी भुला दिया गया। तिरंगा हाथ में लिए पथराव से लेकर आगजनी तक की गई।
याद करें वर्ष 2011 का अन्ना आंदोलन जिसमें राष्ट्र की अस्मिता और गौरव के प्रतीक तिरंगे को लेकर युवा सड़कों पर उतर पड़े थे। यह जुनून शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ देशभक्ति और भ्रष्टाचार के विरोध का था। कहीं भी इस आंदोलन में तिरंगे का मान कम नहीं होने दिया गया था। इस जनआंदोलन में बच्चे-बच्चे के हाथ में तिरंगा नजर आया। इसके अलावा धार्मिक और राष्ट्रभक्ति का अनूठा मिश्रण तिरंगे ने तैयार किया। कांवड़ यात्रा में जहां कावंडिए तिरंगा लेकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे थे तो वहीं मोहर्रम के जुलूसों में भी तिरंगा शान से फहराता नजर आया। कावंड़ यात्रा में तिरंगे के पूरे मान का ध्यान कावंडियों ने रखा। मुहर्रम जुलूसों में मुस्लिमों ने कभी भी इसका मान कम नहीं होने दिया। शान से तिरंगा फहराया।
पढ़ें : ...जब 7 घंटे तक जलता रहा शहर, SP सिटी समेत 100 घायल, देखें तस्वीरें
तिरंगा था पर शांति नहीं
दलितों के इस विरोध प्रदर्शन में भी लोग सुबह सड़कों आए तो तिरंगे उनकेहाथों में थे। लगा कि यह विरोध भी शांति से उसी अंदाज में होगा जैसे अन्य दूसरे आंदोलन होते रहे हैं। हाथों में तिरंगा था पर दस बजते बजते माहौल ही बदल गया। तिरंगा हाथों में लेकर ही आगजनी शुरू कर दी गई। पुलिस चौकी, बसें, बाइकें फूंकते समय भी उपद्रवियों के हाथों में तिरंगा रहा। तोड़फोड़, बवाल, पथराव शुरू हो गया। यह भुला दिया गया है कि तिरंगे का एक मान है। एक हाथ में तिरंगा और दूसरे में पत्थर। बावजूद इसके यह सिलसिला चलता रहा। घंटों चले इस बवाल में तिरंगे का अपमान ही होता रहा।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/