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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   SC-ST Act: Ambedkar jayanti will not be celebrated in Shobapur village of Meerut

यूपी: शोभापुर गांव के दलित नहीं मनाएंगे आंबेडकर जयंती, ये रही वजह

Fri, 13 Apr 2018 10:03 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 13 Apr 2018 10:03 PM IST
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SC-ST Act: Ambedkar jayanti will not be celebrated in Shobapur village of Meerut
एडीजी और एसएसपी मौके पर - फोटो : अमर उजाला

भारत बंद के दौरान 2 अप्रैल को हुए बवाल के बाद चर्चा में आए शोभापुर गांव में इस बार दलित समाज के लोग 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती नहीं मनाएंगे। जानिए क्यों?

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बता दें कि शोभापुर गांव में दलितों ने इस बार आंबेडकर जयंती नहीं मनाने का निर्णय लिया है। बवाल के अगले दिन दलित युवक गोपी की हत्या और दलितों पर किए जा रहे उत्पीड़न से वह आहत हैं। उनका कहना है कि बवाल में बहुत से निर्दोष लोगों को पुलिस ने जेल भेज दिया। कई को बेरहमी से पीटा। इसके चलते कई युवक अस्पताल में उपचार करा हैं। इन सभी घटनाओं से दलितों में रोष है।  
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दो अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में दलितों ने भारत बंद किया था। इस दौरान कंकरखेड़ा क्षेत्र में वाहनों में तोड़फोड़ व आगजनी हुई थी। पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। बवाल के अगले दिन दलित युवक गोपी पारिया पुत्र ताराचंद की गांव के मनोज गुर्जर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद से अभी तक गांव में पीएसी तैनात है। बवाल में पुलिस अब तक सैकड़ों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। बृहस्पतिवार को सीओ दौराला पंकज कुमार मय टीम शोभापुर गांव पहुंचे।
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पढ़ें : SC-ST Act: शोभापुर में पुलिस का खौफ, गांव छोड़कर जा रहे उपद्रवी, फोर्स तैनात

SC-ST Act: Ambedkar jayanti will not be celebrated in Shobapur village of Meerut
पुलिसफोर्स तैनात - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती पर गांव के दलितों से किए जा रहे कार्यक्रम के बारे में जानकारी ली। इस पर गांव के दलितों ने बाबा साहब की जयंती मनाने से इंकार कर दिया। हालांकि सीओ ने कार्यक्रम में सहयोग का आश्वासन दिया। लेकिन दलित समाज तैयार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दो अप्रैल को जो भी हुआ वह बाहरी लोगों का षड़यंत्र था। दलित उत्पीड़न के प्रतिशोध में यह निर्णय लिया गया है। 

सीओ का कहना है कि आंबेडकर जयंती को लेकर गांव में दलित ग्रामीणों की राय ली गई थी। अभी तक गांव के लोगों इस बार जयंती मनाने से इंकार कर रहे हैं। अगर वह किसी कार्यक्रम का आयोजन नियमानुसार करेंगे तो पुलिस प्रशासन उनका सहयोग करेगा।  

कैसे मनाएं जयंती गांव में नहीं हैं युवा
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि बाबा साहब की जयंती मनाएं भी तो कैसे मनाएं। अधिकतर युवाओं का नाम बवाल में है। सभी के खिलाफ केस दर्ज हैं। पुलिस के डर से सभी भागे हुए हैं। जो बचे हैं, वह भी डरे हुए हैं। कहीं जयंती पर कोई बखेड़ा हो गया तो पता नहीं कितने लोग जेल जाएंगे। दूसरे गांव में दूसरे पक्ष के लोग जयंती के दिन ही गांव में तरह तरह के आयोजन करने की बात कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि गांव में फिर कोई विवाद कराना चाहते हैं।

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