फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   sasti sharaab ke liye liye hudaang

सस्ती शराब के लिए शराबियों का हुड़दंग   

Sun, 01 Apr 2018 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 01 Apr 2018 01:07 AM IST
विज्ञापन
sasti sharaab ke liye liye hudaang
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन देसी शराब के ठेकों पर अजब ही नजारा था। लोग लाइन में लगकर शराब खरीद रहे थे, स्थिति ये थी कि रिक्शा चालक भी एक-दो पव्वा नहीं बल्कि पूरी पेटी खरीदकर ले जा रहे थे। कुछ लोग 10-10 पेटी तक खरीदकर ले गए।
विज्ञापन

देसी शराब की सरकारी स्तर पर जो दुकानें आवंटित होती हैं, उसमें कोटा निर्धारित होता है। किसी दुकान का 100 पव्वा प्रतिदिन है तो किसी दुकान का 3000 पव्वा तक का कोटा है। यह कोटा साल के पूरे 365 दिन के हिसाब से तय होता है। शराब बिके या न बिके, लेकिन दुकानदार को अपना कोटा खरीदना ही होता है। यदि दुकान संचालक तय कोटे से कम शराब खरीदता है तो एक तरफ जहां उसकी सिक्योरिटी जब्त हो जाती है, वहीं जितना कोटा तय किया जाता है, उसके अनुपात में बचे हुए कोटे की कीमत तय कर उसके खिलाफ रिकवरी जारी कर दी जाती है और आगामी दुकान आवंटन प्रक्रिया से उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है। 
विज्ञापन


सस्ती बेचने को मजबूूर
मार्च के अंतिम शराब के कोटे को समाप्त करने की बाध्यता के चलते दुकान संचालक सस्ती दरों पर शराब बेचने को मजबूर हो जाते हैं। देसी शराब पिछले कई सालों से बोतल या हॉफ नहीं, बल्कि पव्वा में ही उपलब्ध है। जिसका सरकारी प्रिंट 69 रुपये होता है, लेकिन शराब की दुकानों पर यह 65 रुपये में दी जाती है। लेकिन पिछले तीन दिन से देसी शराब लगातार सस्ती करके बेची गई। बृहस्पतिवार को पव्वा 65 रुपये के बजाए 40 रुपये में बिका। शुक्रवार को इसकी कीमत 30 रुपये कर दी गई। शनिवार को मार्च का अंतिम दिन होने के कारण बैनर लगाते हुए देसी शराब के पव्वे 20 रुपये में बेचे गये। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अंग्रेजी शराब की दुकानों पर लटके ताले
अंग्रेजी शराब की दुकानों का कोटा तय नहीं होता है। बिक्री के हिसाब से इनकी फीस निर्धारित होती है। इसके बाद दुकानदार अपनी मर्जी से कितनी भी शराब बेच सकता है। इस बार चूंकि आबकारी नीति में बदलाव हुआ था तो सिंडिकेट ने फरवरी में ही शराब खरीदना बंद कर दिया था। ऐसे में अंग्रेजी शराब की दुकानों पर शराब धीरे-धीरे खत्म होती गई। जनपद की अंग्रेजी शराब की अधिकांश दुकानें तो मार्च के अंतिम दिन में बंद ही रहीं।


सिंडिकेट के हिस्से में आईं दुकानों पर बिका माल
बदली आबकारी नीति में अधिकांश दुकानें नये लोगों को मिली हैं। इसमें अंग्रेजी शराब की करीब 35 दुकानें सिंडिकेट के लोगों के हाथ आयी हैं। जिस कारण उन्होंने अपनी पुरानी दुकान में ही मॉल का स्टॉक भर लिया और सिर्फ इन्हीं दुकानों पर अब हर वैरायटी और पूरी मात्रा में अंग्रेजी शराब उपलब्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed