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Meerut News: दबिश की सूचना लीक होने पर भाग गया संजय मानपुर
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मेरठ। विमल उर्फ शैंकी हत्याकांड में आरोपी संजय मानपुर और उसके साथी दबिश की सूचना लीक होने पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संजय मानपुर की पुलिस महकमे में कितनी गहरी पैठ है। जांच में सामने आया कि हत्यारोपी मेडिकल पहुंचने वाले मरीजों को कमीशन के लिए निजी अस्पतालों में भेजते थे। इसके लिए एंबुलेंस चालकों से सेटिंग कर रखी थी। एंबुलेंस चालकों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है।
न्यूटिमा अस्पताल के सामने रविवार रात जागृति विहार सेक्टर-2 निवासी रिटायर्ड पुलिस दरोगा प्रमोद त्यागी के इंजीनियर बेटे विमल उर्फ शैंकी की लाठी-डंडों और चाकू से हमला कर हत्या कर दी गई थी। पिता ने भावनपुर क्षेत्र के मानपुर गांव निवासी संजय और उसके भाई मोनू, भांजे कंकरखेड़ा निवासी विशाल और सागर व मेडिकल क्षेत्र निवासी दोस्त सुनील फौजी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विमल का संजय मानपुर से 80 हजार रुपये को लेकर विवाद था। कई बार वापस मांगने पर भी वह रुपये वापस नहीं कर रहा था। दो सितंबर को संजय मानपुर ने विमल और उसके साथियों के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मुकदमे में कोई कार्रवाई नहीं की। तभी से संजय मानपुर अपने साथियों संग विमल से बदला लेने की फिराक में था। इसकी भनक लगने पर विमल ने सीएम पोर्टल पर शिकायत कर संजय व उसके भाई मोनू और भांजे विशाल से जान का खतरा जताया था।
विमल की हत्या के चार दिन बाद भी पुलिस के हाथ कोई आरोपी नहीं आया है। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि हत्यारोपियों गिरोह मेडिकल काॅलेज के गेट के आसपास ही मौजूद रहता था। संजय मानपुर और अन्य लोग इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को वह निजी अस्पतालों में भिजवाते थे। इसके बदले इन अस्पतालों से मोटा कमीशन वसूला जाता था। पुलिस ने कुछ एंबुलेंस चालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। एंबुलेंस चालकों द्वारा बताए उसके एक ठिकाने पर बुधवार रात मेडिकल पुलिस ने दबिश दी थी। लेकिन संजय मानपुर को इसकी भनक पहले ही लग गई। पुलिस के पहुंचने से पहले ही साथियों के साथ वह फरार हो गया। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि आरोपियों की तलाश में कई टीमें लगी हैं। कई जगह दबिश दी जा रही हैं। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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मोबाइल बंद होने से नहीं मिल रही लोकेशन
संजय बेहद शातिर है। वह पुलिस के लिए मुखबिरी करता था और पुलिस के कामकाज के तरीके से वाफिक है। इसीलिए हत्या की वारदात के बाद से ही उसका मोबाइल बंद है। यही वजह है कि पुलिस उसकी लोकेशन का पता नहीं लगा पाई है। घटना के बाद पुलिस ने पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले थे, लेकिन कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिला। पुलिस उसके संपर्क में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है।
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न्यूटिमा अस्पताल के सामने रविवार रात जागृति विहार सेक्टर-2 निवासी रिटायर्ड पुलिस दरोगा प्रमोद त्यागी के इंजीनियर बेटे विमल उर्फ शैंकी की लाठी-डंडों और चाकू से हमला कर हत्या कर दी गई थी। पिता ने भावनपुर क्षेत्र के मानपुर गांव निवासी संजय और उसके भाई मोनू, भांजे कंकरखेड़ा निवासी विशाल और सागर व मेडिकल क्षेत्र निवासी दोस्त सुनील फौजी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विमल का संजय मानपुर से 80 हजार रुपये को लेकर विवाद था। कई बार वापस मांगने पर भी वह रुपये वापस नहीं कर रहा था। दो सितंबर को संजय मानपुर ने विमल और उसके साथियों के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मुकदमे में कोई कार्रवाई नहीं की। तभी से संजय मानपुर अपने साथियों संग विमल से बदला लेने की फिराक में था। इसकी भनक लगने पर विमल ने सीएम पोर्टल पर शिकायत कर संजय व उसके भाई मोनू और भांजे विशाल से जान का खतरा जताया था।
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विमल की हत्या के चार दिन बाद भी पुलिस के हाथ कोई आरोपी नहीं आया है। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि हत्यारोपियों गिरोह मेडिकल काॅलेज के गेट के आसपास ही मौजूद रहता था। संजय मानपुर और अन्य लोग इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को वह निजी अस्पतालों में भिजवाते थे। इसके बदले इन अस्पतालों से मोटा कमीशन वसूला जाता था। पुलिस ने कुछ एंबुलेंस चालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। एंबुलेंस चालकों द्वारा बताए उसके एक ठिकाने पर बुधवार रात मेडिकल पुलिस ने दबिश दी थी। लेकिन संजय मानपुर को इसकी भनक पहले ही लग गई। पुलिस के पहुंचने से पहले ही साथियों के साथ वह फरार हो गया। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि आरोपियों की तलाश में कई टीमें लगी हैं। कई जगह दबिश दी जा रही हैं। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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मोबाइल बंद होने से नहीं मिल रही लोकेशन
संजय बेहद शातिर है। वह पुलिस के लिए मुखबिरी करता था और पुलिस के कामकाज के तरीके से वाफिक है। इसीलिए हत्या की वारदात के बाद से ही उसका मोबाइल बंद है। यही वजह है कि पुलिस उसकी लोकेशन का पता नहीं लगा पाई है। घटना के बाद पुलिस ने पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले थे, लेकिन कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिला। पुलिस उसके संपर्क में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है।