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संप्रेक्षण गृह में बालक से कुकर्म में अधीक्षक भी मुल्जिम
amarujala
Updated Sun, 02 Sep 2018 01:49 AM IST
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- फोटो : amarujala
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सूरजकुंड स्थित बाल संप्रेक्षण गृह (राजकीय बाल सुधार और संरक्षण गृह) में आठ जुलाई को बच्चे से कुकर्म का मामला खुलने के बाद शनिवार को शासन तक पहुंच गया। पुलिस-प्रशासन ने इसकी जांच तेज कर दी है। पुलिस ने संप्रेक्षण गृह के प्रभारी अधीक्षक को इस केस में मुल्जिम बनाया है।
एसपी सिटी रणविजय सिंह के मुताबिक 22 अगस्त को प्रशासनिक अधिकारी सूरजकुंड स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में निरीक्षण करने गए थे। इस दौरान एक बालक ने एक न्यायिक अधिकारी को चिट्ठी दी थी। जिसमें संविदा कर्मचारी (केयर टेकर) जावेद अंसारी पर आठ जुलाई को कुकर्म करने का आरोप लगाया था। कहा था कि संप्रेक्षण गृह के प्रभारी अधीक्षक अयूब हसन से भी बच्चों ने शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
न्यायिक अधिकारी ने इस संबंध में डीएम और एसएसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिस पर 24 अगस्त को नौचंदी थाने में केस दर्ज हुआ। मुख्य आरोपी जावेद को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले की एक सप्ताह से डीएम व एसएसपी द्वारा बनाई कमेटी जांच कर रही है। विवेचक शशि कुमार ने बताया कि जांच में प्रभारी अधीक्षक की लापरवाही भी सामने आयी है। जानकारी मिलने पर उसने मामले को दबाए रखा था।
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मुकदमे में शामिल, भेजी रिपोर्ट
एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि मुकदमे में प्रभारी अधीक्षक का नाम शामिल कर लिया है। जिसकी रिपोर्ट विवेचक ने डीएम और एसएसपी को भेजी है। विवेचक ने पीड़ित बच्चे के पुलिस बयान अंकित किए थे। जिसमें बच्चे ने प्रभारी अधीक्षक का नाम भी बताया। उसके आधार पर अधीक्षक का नाम मुकदमे में खोला गया है।
तेज हुई जांच, बच्चों के बयान
यह मामला शासन तक पहुंचने पर पुलिस-प्रशासन की जांच तेज हो गई है। एसीएम सदर अमिताभ यादव ने संप्रेक्षण गृह पहुंचकर 22 बच्चों के बयान दर्ज किए। संप्रेक्षण गृह के बारे में बच्चों ने कई महत्वपूर्ण बातें भी एसीएम को बताई हैं, जिनकी जांच चल रही है।
अधीक्षक से लेकर डीपीओ की घोर लापरवाही
आरोपी केयर टेकर जावेद अंसारी 8 जुलाई की रात बालक से कुकर्म करने के बाद बाल संरक्षण गृह से फरार हो गया था। जब मामला खुला और उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा। वहीं, जिलाधिकारी के आदेश पर जावेद की सेवा समाप्त कर दी गयी है।
इस मामले में पीड़ित बालक ने बाल संप्रेक्षण गृह के अधीक्षक अयूब हसन को जानकारी दी। लेकिन अधीक्षक ने इस पर संज्ञान लेने के बजाय उल्टे बालक को चुप करा दिया। साथ ही प्रभारी अधीक्षक अयूब हसन का भी बिना अवकाश के अनुपस्थित होना उनकी भूमिका को संदिग्ध बना रहा है। इस पूरे मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता की भी घोर लापरवाही सामने आ रही है। क्योंकि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद उनका घटना की जानकारी होने से इंकार करना उन्हें पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार मजिस्ट्रेट जांच के पहले चरण में जो रिपोर्ट आयी है, उसमें प्रभारी अधीक्षक और जिला प्रोबेशन अधिकारी दोनों की घोर लापरवाही बतायी गयी है। इसी को आधार बनाते हुए डीएम अनिल ढींगरा ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र लिखा है।
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एसपी सिटी रणविजय सिंह के मुताबिक 22 अगस्त को प्रशासनिक अधिकारी सूरजकुंड स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में निरीक्षण करने गए थे। इस दौरान एक बालक ने एक न्यायिक अधिकारी को चिट्ठी दी थी। जिसमें संविदा कर्मचारी (केयर टेकर) जावेद अंसारी पर आठ जुलाई को कुकर्म करने का आरोप लगाया था। कहा था कि संप्रेक्षण गृह के प्रभारी अधीक्षक अयूब हसन से भी बच्चों ने शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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न्यायिक अधिकारी ने इस संबंध में डीएम और एसएसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिस पर 24 अगस्त को नौचंदी थाने में केस दर्ज हुआ। मुख्य आरोपी जावेद को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले की एक सप्ताह से डीएम व एसएसपी द्वारा बनाई कमेटी जांच कर रही है। विवेचक शशि कुमार ने बताया कि जांच में प्रभारी अधीक्षक की लापरवाही भी सामने आयी है। जानकारी मिलने पर उसने मामले को दबाए रखा था।
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मुकदमे में शामिल, भेजी रिपोर्ट
एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि मुकदमे में प्रभारी अधीक्षक का नाम शामिल कर लिया है। जिसकी रिपोर्ट विवेचक ने डीएम और एसएसपी को भेजी है। विवेचक ने पीड़ित बच्चे के पुलिस बयान अंकित किए थे। जिसमें बच्चे ने प्रभारी अधीक्षक का नाम भी बताया। उसके आधार पर अधीक्षक का नाम मुकदमे में खोला गया है।
तेज हुई जांच, बच्चों के बयान
यह मामला शासन तक पहुंचने पर पुलिस-प्रशासन की जांच तेज हो गई है। एसीएम सदर अमिताभ यादव ने संप्रेक्षण गृह पहुंचकर 22 बच्चों के बयान दर्ज किए। संप्रेक्षण गृह के बारे में बच्चों ने कई महत्वपूर्ण बातें भी एसीएम को बताई हैं, जिनकी जांच चल रही है।
अधीक्षक से लेकर डीपीओ की घोर लापरवाही
आरोपी केयर टेकर जावेद अंसारी 8 जुलाई की रात बालक से कुकर्म करने के बाद बाल संरक्षण गृह से फरार हो गया था। जब मामला खुला और उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा। वहीं, जिलाधिकारी के आदेश पर जावेद की सेवा समाप्त कर दी गयी है।
इस मामले में पीड़ित बालक ने बाल संप्रेक्षण गृह के अधीक्षक अयूब हसन को जानकारी दी। लेकिन अधीक्षक ने इस पर संज्ञान लेने के बजाय उल्टे बालक को चुप करा दिया। साथ ही प्रभारी अधीक्षक अयूब हसन का भी बिना अवकाश के अनुपस्थित होना उनकी भूमिका को संदिग्ध बना रहा है। इस पूरे मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता की भी घोर लापरवाही सामने आ रही है। क्योंकि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद उनका घटना की जानकारी होने से इंकार करना उन्हें पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार मजिस्ट्रेट जांच के पहले चरण में जो रिपोर्ट आयी है, उसमें प्रभारी अधीक्षक और जिला प्रोबेशन अधिकारी दोनों की घोर लापरवाही बतायी गयी है। इसी को आधार बनाते हुए डीएम अनिल ढींगरा ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र लिखा है।